डबवाली (हरियाणा)

 धार्मिक पुस्तकों, ग्रंथों की बेअदबी  के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। सोमवार को चार वाणियों से सुसज्जित सुंदर गुटका खंडित हालत में डबवाली के राजीव नगर में पानी के खाल में बहता हुआ मिला। इस गुटके से सिख नितनेम करते हैं। गुटके के साथ-साथ बाबा रामदेव की संपूर्ण कथा भी बरामद हुई है। संदेह जताया जा रहा है कि किसी ने दोनों को एक साथ खाल में फेंका है या विसर्जित किया है। दोनों का अंतिम संस्कार रतिया के अंगीठा साहिब में होगा। सुबह करीब सवा 8 बजे प्रॉपर्टी डीलर एसोसिएशन के प्रधान करनैल सिंह राजीव नगर में डेयरी से दूध लेने गए थे।
 उन्होंने खाल में बह रहे गुटका को देखकर गुरुद्वारा बाबा विश्वकर्मा के प्रधान सुखङ्क्षवद्र सिंह काका तथा गुरमिंद्र सिंह निंदा को सूचित किया। मौका पर राजीव नगर निवासी दङ्क्षवद्र सिंह, सोमजीत शर्मा, हरचरण सिंह भी मौका पर आ गए। खंडित स्वरूप कब्जे में कर लिया। कुछ दूरी पर जाकर खाल में बह रही बाबा रामदेव जी की संपूर्ण कथा भी बरामद हुई। दोनों को सम्मानपूर्वक गुरुद्वारा बाबा विश्वकर्मा में ले जाया गया। वहां पश्चाताप अरदास की गई। सिख संगतों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की हजूरी में बेनती की कि जिसने भी ऐसा घिनौना कार्य किया है, वाहेगुरु उसे सद्बुद्धि बख्शे। अंतिम संस्कार के लिए गुटखा को रतिया स्थित अंगीठा साहिब में भेजने के बाद डबवाली के गुरुद्वारा में पश्चाताप पाठ शुरु होंगे।

शिकायत पर होगी आगामी कार्रवाई : थाना प्रभारी

 डबवाली सिटी थाना प्रभारी सुखदेव सिंह ने खाल से मिले धार्मिक पुस्तकों के अंश।  पंजाब सीमा से सटे डबवाली में मामला सामने आने के बाद गुप्तचर एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। खाल में गुटका बहाया गया है या फिर किसी साजिश के तहत फेंका गया है, इसकी पड़ताल करने में जुटी हैं।

एजेंसियां कर रही हैं पड़ताल

 डबवाली शहर में बेअदबी का यह पहला मामला पंजाब में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कई मामलों में ङ्क्षहसक वारदातें भी हो चुकी हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा खूब उछला था। ऐसे हालातों में पंजाब से सटे शहर डबवाली में पहली बार ऐसा मामला सामने आया है।

वृद्ध स्वरूप पहुंचाएं गुरुद्वारे

 धार्मिक ग्रंथ या गुटका के वृद्ध स्वरूप को नहर, खाल या फिर माइनर में नहीं फेंकना चाहिए। इससे पवित्र वाणी की बेअदबी होती है, वहीं सांप्रदायिक विवाद की वजह बनता है। वृद्ध स्वरूप निकटवर्ती गुरुद्वारा में जमा करवाए जा सकते हैं। जिनका अंगीठा साहिब में सम्मान पूर्वक संस्कार किया जाता है।
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