विद्यार्थी, लेखक, अध्यापक, मजदूर, किसान व मुलाजिमों ने मिलकर किया रोष मार्च

श्री मुक्तसर साहिब

दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा गुरमेहर कौर को विचार प्रगटाने को लेकर दी जा रही धमकियों के विरोध में विभिन्न जत्थेबंदियां भी सड़कों पर उतर आई हैं। वीरवार की शाम को शहर के विद्यार्थी, लेखक, अध्यापक, मजदूर, किसान व मुलाजिमों ने मिलकर शहर में रोष मार्च करते हुए कोटकपूरा चौक में प्रदर्शन किया। इस दौरान नेताओं ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद व भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। 


नेताओं ने कहा कि जब से केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार आई है तब से ही एक सोची समझी साजिश के अधीन लोगों की जुबान बंद की जा रही है। इसी कारण ही डॉ. नरेंद्र दाभोलकर व गो¨वद पंसारे जैसे नेताओं को भी कुर्बानी देनी पड़ी है। सांप्रदायिक सोच पर चलकर यह सरकार विद्यार्थी जत्थेबंदी के बल पर लोगों को अत्याचार कर रही है। उन्होंने लगा कि केंद्र सरकार लोगों को ऐसे विचारों को उलझाकर उनका ध्यान असल मुद्दों से हटाना चाहती है। भाजपा सरकार नोटबंदी के बाद अब जुबान बंदी करना चाहती है। गुरमेहर का आरोप इतना है कि उसने जुर्म के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी। नेताओं ने मांग की कि गुरमेहर कौर को धमकियां देने और लोगों को अपनी आवाज बुलंद करने पर पाबंदी लगाने वालों पर सख्ती से कार्रवाई की जाए। इस मौके पर प्रो. लोकनाथ, लखवीर ¨सह हरीके, पूरण ¨सह दोदा, ¨वदर ¨सह, सुखदेव ¨सह, प्यारे लाल दोदा, बलवंत सिं, नरेंद्र बेदी, राम स्वर् लक्खेवाली, बूटा सिं वाकिफ, गुरदास सिं, जीवन सिं, बल्ला सिं आदि भी मौजूद थे।

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