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Saturday, April 22, 2017

मुख्यमंत्री द्वारा अपने सुरक्षा अमले में 376 कर्मचारियों की कटौती

अन्य को मुहैया करवाई सुरक्षा में से 1500 कर्मचारी वापिस बुलाये 

नई दिल्ली, 21 अप्रैल:
कैप्टन अमरिनदर सिंह के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने वीआईपी सुरक्षा में तैनात 2000 कर्मचारियों की बड़ी कटौती की है ताकि पुलिस कर्मचारियों को अधिक महत्वपूर्ण स्थानों पर लगाकर बढिय़ा पुलिस सुविधा मुहैया करवाने के लिये बुनियादी ढांचा पैदा किया जा सके और उनको राज्य में कानून व्यवस्था को विश्वसनीय बनाने का आवश्यक कार्य सौंपा जा सके। 
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सुरक्षा का जायजा लेने संबंधी हुई एक बैठक के दौरान यह फैसला लिया गया जिसमें मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव सुरेश कुमार, डीजीपी सुरेश अरोड़ा और डी जी पी (इंटेलीजेंस) दिनकर गुप्ता भी शामिल हुये। सुरक्षा वापिस लेने का फैसला करने संबंधी बैठक के पश्चात एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि इसमें मुख्यमंत्री की सुरक्षा भी शामिल है जोकि 1392 से घटाकर 1016 कर दी गई है। इसके अतिरिक्त सैंविधानिक और सरकारी अधिकारियों की श्रेणीयों में भी 1500 सुरक्षा कर्मचारी वापिस बुलाये गये हैं। 
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने पहले ही अपने सफर करने वाले रूटों पर हर प्रकार की तैनाती बंद करने के आदेश जारी किये हैं। प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा संबंधी जायजा लेने बाबत आगामी चरण की बैठक के बाद यह सुरक्षा और भी घटाये जाने की संभावना है। प्रवक्ता अनुसार इस संबंधी फैसला खतरे की संभावनाओं की ताजा रिपोर्टो के आधार पर होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि वह जरूरत से अधिक किसी प्रकार की अतिरिक्त सुरक्षा नही लेना चाहते। 
शुक्रवार की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने पुलिस एवं अन्य एजेंसियों को मौजूदा सुरक्षा नीति संबंधी जायजा लेने के भी निर्देश दिये जोकि पंजाब मंत्रीमंडल द्वारा मंजूर की गई है और वर्ष 2013 में गृह मामले एवं न्याय विभाग द्वारा अधिसूचित की गई है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इसका जायजा संपूर्ण करने के बाद शीघ्र ही रिपोर्ट पेश करने के लिये एजेंसियों को कहा है। 
मुख्यमंत्री ने किसी भी व्यक्ति के लिये खतरे की संभावना संबंधी ताजा स्थिति के मद्देनज़र जरूरत आधारित सुरक्षा मुहैया करवाने की जरूरत पर बल दिया। मौजूदा सुरक्षा नीति 3 वर्ष पुरानी होने के कारण मुख्यमंत्री ने पुलिस को हिदायत की कि खतरे की संभावना संबंधी राज्यीय एवं केंद्रीय एजेंसियों ताजा रिपोर्ट को आधार बनाकर सुरक्षा प्रदान करने का फैसला किया जाये। 
कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने सत्ता में आने के बाद सुरक्षा जायजा लेने के लिये द्वितीय बैठक की है। बीते मार्च में डीजीपी (कानून एवं व्यवस्था) पंजाब के नेतृत्व वाली कमेटी की हुई बैठक के दौरान सुरक्षा का जायजा लिया गया जिसमें विभिन्न श्रेणीयों तहत सुरक्षा हासिल कर रहे व्यक्तियों से 749 पुलिस कर्मचारी एवं अद्र्धसैनिक बल वापिस बुला लिये गये थे। बैठक को संबोधित करते हुये कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि मौजूदा सुरक्षा स्थितियों जो किसी व्यक्ति को खतरे की संभावना को निर्धारित करने की मुख्य कसौटी हैं, में भी गत् तीन वर्षो में अह्म परिवर्तन की गई जिसको संबंधित एजेंसियों द्वारा दुरूस्त किया जाने की आवश्यकता है  
बैठक में गृह मामलों के मंत्रालय के दिशा निर्देशों पर भी विचार किया गया जिनमें नियमित तौर पर सुरक्षा का जायजा लेने के लिये कहा गया है और खतरे की संभावनाओं के आधार पर सुरक्षा तैनाती को बढ़ाने एवं घटाने के लिये कहा गया है। इन दिशा निर्देशों में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि खतरे की कमी की सूरत में सुरक्षा प्रबंध को लगातार बनाये रखने के रूझान से बचा जाये। इसके अनुसार ही सुरक्षा विंग ने नये सिरे से खतरे की संभावनाओं संबंधी रिपोर्ट (टीपीआरएस) इंटेलीजेंस विंग और फील्ड यूनिटों से मांगी है। यह रिपोर्ट आने के बाद सुरक्षा की पुन: समीक्षा की जायेगी। 
गौरतलब है कि पंजाब विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस घोषणा पत्र में राजनीतिज्ञों और अफसरशाहों द्वारा निजी सुरक्षा के लिये पुलिस के प्रयोग किये जाने के गैर स्वास्थय रूझान को रोकने की बात कही थी। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी लगातार पुलिस की सियासी दुरूप्रयोग सहित पुलिस सुधारों के प्रति वचनबद्धता दोहराई है।