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भ्रूण लिंग जांच मामले में आरोपी डॉक्टर की जमानत याचिका खारिज

क्षेत्राधिकार को लेकर पंजाब के आरोपी डॉ. उमेश शर्मा ने उच्च न्यायालय में दायर की थी अपील

श्रीगंगानगर
भ्रूण लिंग जांच मामले में आरोपी बने पंजाब के एक चिकित्सक की अपील को राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर ने खारिज कर दिया है। पंजाब के इस चिकित्सक ने मुकदमा दर्ज करने संबंधी क्षेत्राधिकार एवं अन्य कुछ तथ्यों को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी, जिसमें अपील खारिज करते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जहां से अपराध शुरु हुआ है, वहीं एफआईआर दर्ज करते हुए पुलिस को जांच का अधिकार है। वहीं अन्य बिंदुओं पर न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि उन पर ट्रायल के दौरान तय होगा कि तथ्य सही है या नहीं। पीबीआई थाना, जयपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रघुवीर सिंह ने बताया कि निश्चित ही यह सराहनीय निर्णय है और इससे टीम का मनोबल बढ़ेगा एवं ऐसे लोगों पर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।  पीसीपीएनडीटी प्रभारी रणदीप सिंह ने बताया कि सूचना मिली थी कि रायसिंहनगर में भू्रण लिंग जांच व कन्या भू्रण हत्या का गौरखधंधा चल रहा है। प्रारंभिक जानकारी जुटाने के बाद टीम गठित कर कार्रवाई शुरू की गई। इसी दौरान रायसिंहनगर स्थित न्यू महावीर नर्सिंग होम के चिकित्सक अशोक गुप्ता व उसकी नर्स संदीप कौर से विभाग की बोगस ग्राहक से वार्ता हुई। जिसमें 35 हजार रुपए लेन-देन तय हुआ और लडक़ी होने पर गर्भपात के अलग से 15 हजार लेन-देन की बात हुई।

"> अगले दिन विगत 17 मार्च को नर्स संदीप कौर निर्धारित राशि लेकर डॉक्टर गुप्ता के बताए अनुसार बोगस ग्राहक को लेकर पंजाब स्थित फिरोजपुर के केंट चौराहे पर पहुंची। जहां से दलाल अमनदीप सिंह डॉक्टर उमेश कुमार शर्मा के एसएसके सोनोग्राफी सेंटर पर बोगस ग्राहक गर्भवती महिला को लेकर गया। जहां सोनोग्राफी कर उसके भ्रूण लिंग की जानकारी दी गई, जिस पर टीम ने कार्रवाई कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस मामले में सेंटर संचालक डॉ. उमेश कुमार शर्मा, चिकित्सक संदीप सिंह, दलाल अमनदीप सिंह, नर्स प्रवीण बॉबी सहित रायसिंहनगर के डॉक्टर अशोक गुप्ता व उसकी नर्स संदीप कौर को आरोपी बनाया गया। इसी मामले में सेंटर संचालक डॉक्टर उमेश शर्मा ने उच्च न्यायालय में अपील करते हुए कहा कि चूंकि घटना पंजाब में हुई है इसलिए एफआईआर वहीं दर्ज हो। न्यायालय ने सुनवाई करते हुए अपील खारिज की और प्रारंभिक जांच व क्षेत्राधिकार को सही माना।

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