मनदीप घई बनी इंटरनेशनल कान्स फिल्म फेस्ट में पहुंचने वाली पहली पंजाबी महिला कलाकार - BTTNews

Breaking

�� बी टी टी न्यूज़ है आपका अपना, और आप ही हैं इसके पत्रकार अपने आस पास के क्षेत्र की गतिविधियों की �� वीडियो, ✒️ न्यूज़ या अपना विज्ञापन ईमेल करें bttnewsonline@yahoo.com पर अथवा सम्पर्क करें मोबाइल नम्बर �� 7035100015 पर

Wednesday, June 14, 2017

मनदीप घई बनी इंटरनेशनल कान्स फिल्म फेस्ट में पहुंचने वाली पहली पंजाबी महिला कलाकार


अमृतसर की रहने वाली मनदीप घई ने किया पंजाब का नाम रोशन

अमृतसर

 फ्रांस में होने वाले इंटरनेशनल कान्स फिल्म फेस्ट में फिल्मों को शामिल किया जाना हर कलाकार के जीवन का सपना होता है तथा यह उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी सफलता और कमाई आंकी जाती है। हालांकि लोगों की उम्र गुजर जाती है इस मुकाम को पाने में लेकिन अमृतसर की रहने वाली मनदीप घई ने बहुत कम आयु में इस मुकाम को हासिल कर जहां पहली पंजाबी महिला कलाकार होने का गौरव पाया है वहीं पूरे पंजाब का नाम भी रोशन किया है। बंगाली पृष्टभूमि वाली हिंदी फिल्म के जरिए उक्त मुकाम पाने वाली मनदीप घई इसे बड़ों की दुआओं का असर मानती है।

वह कहती हैं कि दर्शकों की दुआओं के चलते वह इस मुकाम तक पहुंची हैं। बीती 14 मई को यूं तो दुनिया भर से कान फिल्म फेस्ट में हजारों फिल्में गई थीं, लेकिन इसमें करीब दर्जन भर भारतीय फिल्में शामिल रही। इनमें से पहली हिंदी फीचर फिल्म पैरादीशो मनदीप घई अभिनीत है तथा उसका विधिवत वल्र्ड प्रीमियर शो भी हुआ। पैरादीशो इटालियन शब्द है तथा अंग्रेजी के शब्द पैराडाइस से बना हुआ है। फिल्म को बंगाली डायरेक्टर सुदीप रंजन सरकार ने डायरेक्ट किया है तथा इसके प्रोड्यूसर रीटा झावर हैं।

मिर्च मशाला से किया था मनदीप ने अभिनय का आगाज

थिएटर के सफर की शुरूआत पंजाब नाटशाला से करने वाली मनदीप घई ने पहली बार वर्ष 2001 में जतिंदर बराड़ के लिखित नाटक मिर्च मशाला से अपने अभिनय जीवन का आगाज किया। इसके बाद वह प्रोफेशनल तौर पर 2008 में वह मंच पर उतरी तथा कुदेशण में दमदार अभिनय के बाद कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा।

  टीवी जगत में भी मनवाया प्रतिभा का लौहा

थिएटर के साथ मनदीप ने टीवी जगत में भी बेहतर अभिनय के चलते अपनी प्रतिभा का लौहा मनवाया। उसके द्वारा की गई फिल्मों तथा टीवी शो में सॉरी पाजी, दिल खुल के बोल, मां, कौन दिला दियां जाने व घार आजा जीतू आदि प्रमुख हैं। U वह कहती हैं कि उनकी कला को निखारने में नाटशाला के साथ-साथ केवल धालीवाल, जगदीश सचदेवा, मंचप्रीत, मुकेश कुंद्रा, हरदीप गिल, अनिता देवगन, सुदेश विंकल, दीप मनदीप, जसवंत मिंटू, सुदेश विंकल आदि का अहम रोल रहा है

 

No comments:

Post a Comment