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Friday, June 16, 2017

नशा चुराने पर नेत्रहीन छोटे भाई ने उतार डाला मौत के घाट - पहले भी हत्याकांड मेें लिप्त रहा है राजेन्द्र अरोड़ा

कब्जा करके बनाए गए घर में रहते थे अव्वल दर्जे के नशेड़ी अधेड़ उम्र दोनों भाई

श्रीगंगानगर


एक नेत्रहीन अधेड़ ने नशे की पुडिय़ा चोरी कर लेने पर अपने ही भाई की सरिये से हमला कर नृशंस हत्या कर दी। पुलिस के लिए यह मामला कईं घंटे तक अबूझ पहेली बना रहा। संदेह के आधार पर पकडकर थाने में लाये गये नेत्रहीन शख्स अधेड़ पर पहले तो पुलिस को विश्वास नहीं हुआ कि वह ऐसी घटना अंजाम दे सकता है, लेकिन अपराह्न बाद मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाने से साफ हो गया कि मौत गम्भीर चोटों की वजह से हुई है। दोबारा पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, तो नेत्रहीन भाई ने कथित रूप से अपना जुर्म कबूल कर लिया। कत्ल की यह वारदात श्रीगंगानगर में पुरानी आबादी में श्रीकरणपुर रोड से मिर्जेवाला को जाने वाले मार्ग पर नहर के पास आज सुबह हुई। पुलिस ने बताया कि इस जगह पर अधेड़ उम्र के दो भाई, एक कब्जा करके बनाये हुए कमरे में रहते हैं। दोनों ही अव्वल दर्जे के नशेड़ी हैं। इनमें एक भाई राजेन्द्र अरोड़ा पुत्र रामकिशन नेत्रहीन है, जो इसी कमरे में पड़ा रहता था। दूसरा भाई रामकुमार (47) रिक्शा चलाने के साथ-साथ कबाड़ इक_ा कर बेचने का काम करता था। उसे भी नशे की लत्त लगी हुई थी। राजेन्द्र अरोड़ा इधर-उधर से अपने लिये नशे का इंतजाम कर लेता था। दोनों का यह कमरा नहर के किनारे पर है। आज सुबह करीब 10 बजे इस कमरे के बाहर रामकिशन चोटिल हालत में पड़ा था। आसपास के लोगों ने उसे देखा, तो उन्होंने उसे जिला अस्पताल पहुंचा दिया। अस्पताल लाये जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल से जानकारी मिलने पर सदर थाना से सब इंस्पेक्टर काशीराम ने आकर शव की हालत देखी, तो उसे मौत संदिग्ध लगी। आलाधिकारियों को बताये जाने पर डीएसपी तुलसीदास पुरोहित व थानाप्रभारी कुलदीप वालिया घटनास्थल का निरीक्षण करने के लिए पहुंच गये।

वहां मौजूद राजेन्द्र अरोड़ा से पूछताछ की गई, तो उसने अनभिज्ञता व्यक्त की। उसने कहा कि वह देख नहीं सकता। उसे नहीं पता कि रामकुमार के साथ क्या हुआ है? वह नशा पत्ता करता है। शायद कहीं गिरने-पडऩे से उसके चोट लग गई होगी। आसपास कोई और कुछ संदिग्ध देखने वाला कोई नहीं था। लिहाजा पुलिस ने बड़ी गहनता से तफ्तीश और पूछताछ जारी रखी। इस बीच अपराह्न पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाया। इसी दौरान पता चला कि इन दोनों भाइयों की एक बहन सुनीता पुरानी आबादी में विवाहित है। सुनीता और उसके पति को इसकी सूचना दी गई, तब वे भी अस्पताल में पहुंच गये। थानाधिकारी कुलदीप वालिया ने बताया कि रामकुमार के कंधे और पैरों में काफी चोटें लगी हुई थीं। पुलिस के मुताबिक यह चोटें गिरने-पडऩे से लगी हुई नहीं प्रतीत हुईं। इसीलिए मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया। डीएसपी तुलसीदास ने बताया कि यह मामला शुरू से ही संदिग्ध लग रहा था। शाम होते-होते थाने में पूछताछ के लिए लाये हुए राजेन्द्र ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस के मुताबिक राजेन्द्र ने बताया कि उसके पास गांजे की एक पुडिय़ा थी, जिसे उसने कमरे में कहीं रखा हुआ था। यह पुडिय़ा आज सुबह उसे नहीं मिली। दूसरी तरफ रामकुमार नशे की हालत मेें बेसुध पड़ा था। तब उसे आइडिया हो गया कि रामकुमार ने यह गांजा चुराकर उसका सेवन कर लिया, जो अब नशे में बेसुध पड़ा है। ऐसी हालत में गुस्से में उसने सरिये से रामकुमार पर कईं वार कर दिये।  फिर उसे कमरे से बाहर लाकर डाल दिया। पुलिस ने बताया कि रामकुमार की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। देर शाम को पुलिस ने पास में ही ज्यूस की रेहड़ी लगाने वाले बलवंत पुत्र कालूराम नायक द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर राजेन्द्र के विरुद्ध हत्या का मामला दर्ज कर लिया। रामकुमार का शव उसकी बहन व अन्य परिवारजनों के सुपुर्द कर दिया।

 बहुचर्चित विमला गोयल हत्याकांड में पकड़ा गया था - 18 वर्ष तक रहा था जेल में

अपने बड़े भाई की पीट-पीटकर हत्या कर देने के इल्जाम में गिरफ्तार किया गया नेत्रहीन राजेन्द्र अरोड़ा (42) पहले भी शहर के एक बहुचर्चित विमला गोयल हत्याकांड मेें लगभग 18 वर्ष जेल की सजा काट चुका है। वह जन्मजात नेत्रहीन नहीं है। वह एक सडक़ हादसे में सिर में चोट लगने के पश्चात् उसकी आंखों की ज्योति चली गई थी। वर्ष 2011 में वह जेल से रिहा हुआ था। अपने बड़े भाई रामकुमार (58) की हत्या करने के जुर्म में गिरफ्तार किये गये राजेन्द्र अरेाड़ा को सदर थाना पुलिस ने आज कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने बताया कि पूछताछ करने तथा वारदात में इस्तेमाल किये गये ल_ को बरामद करने के लिए उसका 18 जून तक का रिमांड प्राप्त हुआ है। ज्ञात रहे कि पुरानी आबादी में श्रीकरणपुर रोड रेलवे फाटक के नजदीक चक 7 जैड में नहर के किनारे एक कमरे में रहने वाले राजेन्द्र अरोड़ा ने कल गुरुवार सुबह अपने भाई रामकुमार को लट्ठ से बुरी तरह से पीटा। फिर उसे अपने कमरे के बाहर डाल दिया। उसकी वहीं मौत हो गई थी। घटनास्थल के समीप ज्यूस की रेहड़ी लगाने वाले बलवंत की रिपोर्ट पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर राजेन्द्र अरोड़ा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आज बताया कि पूछताछ के दौरान पता चला कि राजेन्द्र अरोड़ा वर्ष 1994 में श्रीगंगानगर में एफ ब्लॉक में मस्जिद के पास विमला गोयल हत्या एवं लूटकांड में लिप्त रहा था। तब वह दिल्ली निवासी अपनी एक परिचित युवती तथा दो अन्य अभियुक्तों के साथ पकड़ा गया था। यह श्रीगंगानगर के एक बहुचर्चित हत्याकांडों में से एक है, जिसने इलाके के पूरे जनमानस को स्तब्ध कर दिया था। इस वारदात को दो जनों ने अंजाम दिया था, लेकिन इसमें राजेन्द्र अरोड़ा और उसकी दिल्ली निवासी गर्लफ्रेंड की सहयोगी के रूप में भूमिका थी। उसे अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वर्ष 2004 में राजेन्द्र अरोड़ा के पिता का निधन हो गया, जिस पर उसे कुछ दिनों के लिए पैरोल पर रिहा किया गया था। इस दौरान मोटरसाइकिल पर जाते समय वह दुर्घटना का शिकार हो गया। सिर में चोट लगने के कारण उसकी आंखों की ज्योति चली गई। बाद में उसे वर्ष 2011 में जेल से रिहा कर दिया गया। राजेन्द्र अरोड़ा ने पुलिस को बताया कि उसने तब हाईकोर्ट में रिट लगाई थी। इस रिट के चलते उसे अच्छे चाल-चलन के कारण स्थाई रूप से पैरोल देकर रिहा किया गया था। पुलिस ने बताया कि तब से राजेन्द्र अरोडा चक 7 जैड में नहर के किनारे एक कब्जे की जमीन पर कब्जा बनाकर रह रहा था। नेत्रहीन होने के बावजूद वह ब्लैक में शराब बेचने व नशीले पदार्थ बेचने का काम करने लगा। उसका भाई रामकुमार भी बाद में उसके साथ आकर रहने लगा। राजेन्द्र अरोड़ा ने बताया कि रामकुमार 20-22 वर्षांे से पोस्त व अन्य प्रकार के नशीले पदार्थांे का सेवन करता आ रहा था। पहले उनका पुरानी आबादी में मकान था, जो रामकुमार की नशाखोरी के कारण बिक गया। फिर उन्हेांने मीरा चौक के पास मकान लिया था, वह भी इसी कारण रामकुमार ने बेच दिया। रामकुमार की हत्या के बारे में राजेन्द्र ने पुलिस को बताया कि वह उसे मारना नहीं चाहता था।  जब रामकुमार के पास पैसे नहीं होते थे, तो वह भीख मांगने लगता था। भीख में जो रुपये मिलते थे, उससे नशा करने लगता था। परसों रात वह देर से सोया था। कल सुबह रामकुमार ने दरवाजा खटखटाकर उसे उठाया और नशे के लिए रुपये मांगे। तब उसने कहा कि अभी सुबह-सवेरे का समय है। हाथ-मुंह धो लें व चाय-पानी पी लें, उसके बाद वह रुपये दे देगा, लेकिन रामकुमार नहीं माना। वह बाहर जाकर ल_ उठा लाया, जिसे उसने छीन लिया। उसे रामकुमार की नशाखोरी व रुपये मांगने की आदत पर गुस्सा आ गया। उसने उसी ल_ से रामकुमार के कमर के नीचे प्रहार किये। राजेन्द्र ने कहा कि जो शख्स 20-22 वर्ष से नशा करता आ रहा था, उसके शरीर में ज्यादा जान नहीं थी। वह इस बात को जानता था। इसलिए उसने हल्की चोटें ही मारी थीं, लेकिन जहां भी चोट पड़ी, वहीं हड्डी क्रैक हो गई। बता दें कि मृतक रामकुमार के सिर में भी चोट लगी हुई थी, लेकिन राजेन्द्र ने कहा कि उसने सिर में कोई वार नहीं किया। हो सकता है कि मारपीट के दौरान गिरने-पडऩे से उसके सिर में चोट लगी होगी। पुलिस ने बताया कि अभी उससे पूछताछ चल रही है।


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