अपडेट - किसान कफ्र्यू से आम लोग हुए परेशान - अढ़ाई सौ जगह लगाये गये नाके - शहरों में नहीं हुई दूध-सब्जियों की सप्लाई - BTTNews

Breaking

�� बी टी टी न्यूज़ है आपका अपना, और आप ही हैं इसके पत्रकार अपने आस पास के क्षेत्र की गतिविधियों की �� वीडियो, ✒️ न्यूज़ या अपना विज्ञापन ईमेल करें bttnewsonline@yahoo.com पर अथवा सम्पर्क करें मोबाइल नम्बर �� 7035100015 पर

POLL- PM KON ?

Tuesday, July 18, 2017

अपडेट - किसान कफ्र्यू से आम लोग हुए परेशान - अढ़ाई सौ जगह लगाये गये नाके - शहरों में नहीं हुई दूध-सब्जियों की सप्लाई

राजस्थान में अपनी विभिन्न मांगों के समाधान की मांग को लेकर किसान सोमवार को फिर से सडक़ों पर दिखाई दिये। आठ दिन के अंतराल पर किसान संगठनों ने पूरे इलाके के मुख्य मार्गांे पर ही नहीं, बल्कि छोटे-छोटे सम्पर्क व कच्चे मार्गांे पर भी नाके लगाकर बैठ गये, जिससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई। श्रीगंगानगर जिले में करीब अढ़ाई सौ जगह नाके लगाये।
इनमें 48 नाके नेशनल तथा स्टेट हाइवे पर लगाये गये। दोपहर 12 बजे तक किसान कफ्र्यू के तहत की गई इस नाकाबंदी का आम जनजीवन पर व्यापक असर पड़ा। स्टेट और नेशनल हाइवे पर वाहनों की लम्बी कतारें लग गईं। कुछेक स्थानों पर ट्रेफिक को डायवर्ट करने का इंतजाम किया जा सका, लेकिन यातायात सामान्य होने में काफी वक्त लगा। दोपहर करीब 2 बजे यातायात सामान्य हुआ, तब जाकर लोगों नेे राहत की सांस ली। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने, फसल की लागत का डेढ़ गुणा मूल्य दिलाने, किसानों को पूर्णत: कर्जमुक्त करने और श्रीगंगानगर जिले के गंगकैनाल एरिया को सिंचित करने वाली गंगकैनाल को पंजाब में पानी मुहैया करवाने वाली फिरोजपुर फीडर नहर के नवनिर्माण की मुख्य मांगों को लेकर इस इलाके के किसान संगठन लम्बे समय से संघर्षरत हैं। सोमवार को प्रदेश के करीब 39 संगठनों ने राष्ट्रीय व राज्य स्तर की किसानेां की मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी चक्काजाम व दूध-सब्जियों की सप्लाई ठप करने का आह्वान किया था। जानकारी के अनुसार इस आह्वान का प्रदेश में सबसे ज्यादा असर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में ही दिखा। इन दोनों जिलों में किसान संगठनों के पदाधिकारी अपने-अपने कार्यकर्ताओं की टोलियां बनाकर और प्रगतिशील-सक्रिय किसानों को साथ लेकर सुबह चार बजे ही मार्गांे पर नाकाबंदी करने के लिए पहुंंच गये। इन टोलियों ने आते-जाते सभी वाहनों को चैक करना शुरू कर दिया कि उनमें दूध, फल सब्जी या कृषि जिन्स तो नहीं ले जाये जा रहे। ऐसे वाहनों को रोककर उनमें लदे दूध, फल-सब्जियों को जब्त कर लिया। यह सामान निकटवर्ती धर्मस्थलों को भिजवा दिया गया, जहां उनका लंगर बनाकर जनता में बांट दिया गया। चक्काजाम का प्रभाव प्रात: 8 से दोपहर 4 बजे तक रहा। श्रीगंगानगर जिले में से होकर निकलने वाले नेशनल हाइवे 62 पर सुबह 8 बजे अनेक जगहों पर वाहनों की लम्बी कतारें लग गईं। इनमें ज्यादातर ट्रक-ट्रॉलर थे। लम्बी दूरी की निजी बसों को भी आठ बजे के बाद आंदोलनकारी किसानों ने वहीं रोक दिया। इन बसों में सवार यात्रियों को भारी परेशानी हुई, जिन्हें अपना सामान उठाकर काफी दूर तक पैदल चलना पड़ा। जिनके साथ महिलाएं एवं बच्चे थे, उन्हें और भी ज्यादा परेशानी हुई। श्रीगंगानगर शहर के नजदीक बाइपास मार्गांे पर आज टैम्पो चालकों और ई-रिक्शा चालकों की खूब चांदी हुई। इनमें सवारियों को भर-भरकर लाया गया। एहतियात के तौर पर राजस्थान रोडवेज की बसों का संचालन दोपहर 1 बजे तक बंद रखा गया। प्राइवेट बस ऑपरेटर भी दोपहर 1 बजे तक अपनी बसों को रोके रहे। सुबह सवेरे उनकी जो बसें जल्दी यहां पहुंच गईं, जिससे उन्होंने राहत की सांस ली। लेकिन जो बसें रास्ते में अटक गई, उनके यात्री परेशान होते रहे। आंदोलनकारी किसानों ने सेना, एम्बुलेंस आदि जरूरी सेवाओं वाले वाहनों को नहीं रोका। किसान नेता अपने वाहनों में अलग-अलग नाकों पर जाकर स्थिति का जायजा लेते रहे। गर्मी और उमस को देखते हुए नाके लगाये गये किसानों के लिए कईं वाहनों में ठंडे पानी के कैम्फर लेकर भी वाहन घूमते रहे। इनके अलावा गुरुद्वारा तथा अन्य स्थलों से वाहनों में लंगर की व्यवस्था भी की गई। श्रीगंगानगर जिले में इस आंदोलन को कामयाब बनाने में गंगनहर किसान समिति के संयोजक रणजीत सिंह राजू, सचिव मंगलसिंह बसरा, कोषाध्यक्ष चमकौर सिंह, भूपेन्द्र सिंह, ग्लैक्सी बराड़, प्रवक्ता संतवीर सिंह मोहनपुरा, अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय कोंसिल सदस्य श्योपतराम मेघवाल, विजय रिवाड़, कालूराम थोरी, राकेश ठोलिया, रविन्द्र तरखान, विक्रमजीत सिंह, किसान संघर्ष समिति के अमर सिंह पूनिया, गंगकैनाल प्रोजेक्ट के पूर्व चेयरमैन गुरबलपाल सिंह संधू, एडवोकेट सुभाष सहगल, ऐटा-सिंगरासर नहर निर्माण समिति के संयोजक राकेश बिश्रोई, सत्यप्रकाश सिहाग, अमित कड़वासरा, ओम राजपुरोहित, बसपा के डूंगरराम गेदर आदि किसान नेता लगातार सक्रिय रहे। माकपा के पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल ने भी अनेक मार्गांे पर जाकर किसान कफ्र्यू का जायजा लिया। किसान कफ्र्यू के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति को बनाये रखने के लिए जिला प्रशासन की ओर से लगभग डेढ़ दर्जन कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त किये गये। जिला पुलिस अधीक्षक हरेन्द्र महावर ने जिले केा दो भागों में बांटकर दोनों अवर एसपी सुरेन्द्र सिंह व भरतराज को सैक्टर प्रभारी नियुक्त किया। इनके अधीन बड़ी संख्या में डीएसपी, इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर, एएसआई, हवलदार और पुलिसकर्मियों के साथ-साथ आरएसी के जवानों की ड्यूटियां लगाई गईं। किसान कफ्र्यू और चक्काजाम शांतिपूर्वक रहने पर सभी ने राहत की सांस ली।
आगामी रणनीति 27 को बनेगी
प्रदेश में महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की तर्ज पर आंदोलन चला रहे किसान संगठनों ने अब आगामी 27 जुलाई को जयपुर में बैठक बुलाई है। इसमें आंदोलन की आगामी रणनीति बनाई जायेगी। अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय काउंसिल सदस्य श्योपतराम मेघवाल ने आज बताया कि 27 जुलाई को राज्य कमेटी की बैठक बुलाई गई है। इसमें आगामी संघर्ष का ऐलान किया जायेगा। संघर्ष के आगामी चरण में जिला स्तर के सभी किसान संगठनों का सहयोग लिया जायेगा। उन्होंने आज के किसान कफ्र्यू और चक्काजाम को पूर्णत: सफल बताते हुए इसमेंं सहयोग करने वाले सभी किसान संगठनों और किसानों का आभार जताया है।

No comments:

Post a Comment