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Friday, July 28, 2017

खंड ग्रास चंद्र ग्रहण 7 व 8 अगस्त मध्यरात्रि को : पं. जोशी -भारत समेत दक्षिणी व पूर्वी एशिया में दिखगा-रक्षाबंधन पर नहीं चंद्र ग्रहण का कोई प्रभाव

 

मेष, वृष, कर्क, सिंह, कन्या, धनु, मकर, कुंभ राशि वाले न देंखे ये ग्रहण


इस बार खंड ग्रास चंद्र ग्रहण 7 व 8 अगस्त की मध्यरात्रि को संपूर्ण भारत में खंड ग्रास रूप में दिखाई देगा। यह खंड ग्रास चंद्र ग्रहण रात को 10:52 बजे चंद्रमा को स्पर्श करेगा और रात को 11:50 बजे मध्यगत खंड ग्रास में तब्दील होगा। रात को 12:48 बजे यह समाप्त होगा। यह ग्रहण भारत के सभी नगरों में शुरु से समाप्ति काल तक दिखाई देगा। 


यह जानकारी सनातन धर्म प्रचारक पं. पूरन चंद्र जोशी ने शुक्रवार को भुल्लर कॉलोनी स्थित जय मां चिंतपूर्णी मंदिर में आयोजित सत्संग कार्यक्रम के दौरान खंड ग्रास चंद्र ग्रहण के बारे में प्रकाश डालते हुए दी। उन्होंने कहा कि भारत के अलावा यह ग्रहण दक्षिणी और पूर्वी एशिया के अधिकतर देशों में, संपूर्ण यूरोप, अफ्रीका व आस्ट्रेलिया में भी नजर आएगा। इस ग्रहण का सूतक 7 अगस्त (सोमवार) को दोपहर 1:53 बजे प्रारंभ हो जाएगा। यह ग्रहण मकर राशि में श्रवण नक्षत्र पर लग रहा है। इसलिए इस राशि वालों को चंद्रमा, राहु, एवं


शनिदेव का जप करना चाहिए और दानआदि करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोमवार को लगने के चलते इसे चूड़ामणी चंद्र ग्रहण भी कहते हैं। इसलिए इस ग्रहण का विशेष महत्व है। इस दिन तीर्थों में स्नान दान का  बहुत महत्व होगा। गर्भवती महिलाएं ग्रहण काल में प्रभु का सिमरन करें और ग्रहण भूलकर भी न देखें। इसके  अलावा मेष, वृष, कर्क, सिंह , कन्या, धनु, मकर, कुंभ राशि वाले इस ग्रहण को न देखें। उनके लिए यह हानिकारक साबित होगा।
 पं. जोशी ने कहा कि ग्रहण के प्रभाव से अफगानिस्तान, अरब एवं मुस्लिम बाहुल देशों में उन्माद व युद्धमय वातावरण बनने की संभावना है। वहीं बेमौसमी बरसात एवं प्राकृतिक प्रकोपों से फसल को हानि पहुच सकती है। ग्रहण के प्रकोप से अग्निकांड, चोर भय, उप द्रव, युद्ध भय, प्रजा में रोग, प्राकृतिक प्रकोपों से कष्ट, आवश्यक वस्तुओं के दाम बढऩे की संभावना है। ग्रहण काल में मूर्ति स्पर्श करना व अनावश्यक खाना-पीना वर्जित है।

-- राशियों पर पड़ेगा यह प्रभाव --

मेष-
रोग, कष्ट व भय उत्पन्न करने वाला।
वृष-
संतान संबंधी गुप्त चिंता।
मिथुन-
धन लाभ वाला।
कर्क-
पति व पत्नी के लिए कष्टकारी।
सिह-
रोग, कष्ट व भय उत्पन्न करने वाला।
कन्या-



मान हानि व खर्च वाला।
तुला-
कार्य सिद्धि।
वृश्चिक-
 धन लाभ का योग।
धनु-
धन हानि
मकर-
दुर्घटना, शारीरिक कष्ट, शत्रुता पैदा करने वाला।
कुंभ-
धन हानि वाला।
मीन-
धन लाभ व उन्नति वाला। 
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रक्षाबंधन के लिए 1:53 से होगा शुभ समय शुरु : पं. जोशी

 7 अगस्त (सोमवार) को आ रहा है यह पर्व

भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन शास्त्रों के मुताविक श्रावण मास की शुक्लपक्ष पूर्णमासी के दिन मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 7 अगस्त (सोमवार) को आ रहा है। इस दिन रक्षाबंधन पर्व भद्रा रहित
अपराह्न व्यापिनी पूर्णमासी को मनाया जाना चाहिए। यह जानकारी सनातन धर्म प्रचारक पं. पूरन चंद्र जोशी ने गांव फत्तनवाला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान रक्षाबंधन पर्व पर रोशनी डालते हुए दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 7 अगस्त 2017 के दिन सोमवार को पूर्णमासी के दिन भद्रा प्रात: 11:05 बजे तक व्याप्त है। इस दिन अपराह्नकाल का समय लगभग दोपहर 1:53 बजे से शाम 4:34 बजे तक रहेगा। इसलिए रक्षा बंधन का बिल्कुल सही समय अपराह्नकाल में दोपहर 1:53 बजे से शाम 4:34 बजे तक का है। इस समय में रक्षाबंधन मनाने का योग बन रहा है, क्योंकि भद्रा मकर राशिस्थ होने से पाताल लोक में रहेगी। रक्षाबंधन के समय भद्रा पृथ्वी लोक में नही होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस दिन अर्धरात्रि कालीन  खण्डग्रास चंद्र ग्रहण भी घटित होने जा रहा है। मगर रक्षाबंधन पर्व, अन्य शुभ अनुष्ठानों या सत्य नारायण व्रत कथा आदि पर रात्रिकालीन चंद्र ग्रहण का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा।  

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