क्या है जीएसटी?-
भारत में आम नागरिकों पर दो तरह के टैक्स लगते हैं- प्रत्यक्ष कर और अप्रत्यक्ष कर। आयकर और कॉर्पोरेट टैक्स इत्यादि प्रत्यक्ष कर हैं। बिक्री कर और सेवा कर इत्यादि अप्रत्यक्ष कर हैं। संविधान में 122वें संशोधन विधेयक के जरिए देश में लगने वाले सभी अप्रत्यक्ष करों की जगह एक जुलाई 2017 से केवल एक टैक्स “वस्तु एवं सेवा कर” लगाया जाएगा। दुनिया के 150 से अधिक देशों में ऐसी ही कर व्यवस्था लागू है।

जीएसटी पर किस चीज पर लगेगी कितना टैक्स?-
जीएसटी परिषद ने सभी वस्तुओं और सेवाओं को चार टैक्स स्लैब (पांच प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत) में विभाजित किया है। जीएसटी परिषद ने 12011 वस्तुओं को इन चार वर्गों में रखा है। आम जनता के लिए उपयोगी करीब 80 वस्तुओं पर शून्य  टैक्स (कर मुक्त ) लगेगा। सिगरेट, शराब और पेट्रोलियम उत्पादों (पेट्रोल, डीजल इत्यादि) को अभी जीएसटी से बाहर रखा गया है।

कोई टैक्स नहीं लगेगा-
 जूट, ताजा मीट, मछली, चिकन, अंडा, दूध, छाछ, दही, प्राकृतिक शहद, ताजा फल, सब्जियां, आटा, बेसन, ब्रेड, प्रसाद, नमक, बिंदी, सिंदूर, स्टांप पेपर, मुद्रित किताबें, अखबार, चूड़ियां, हैंडलूम, अनाज, काजल, बच्चों की ड्राइंग, कलर बुक इत्यादि। एक हजार रुपये से कम कीमत वाले होटल और लॉज इत्यादि।

12 प्रतिशत टैक्स-
एक हजार रुपये से ऊपर के परिधान, मक्खन, चीज, घी, सॉसेज, दंत मंजन, सेलफोन, केचअप, चम्मच, कांटे, चश्मे, ताश, कैरम बोर्ड, छाता, आयर्वेदिक दवाएं, सिलाई मशीन, नमकीन, भुजिया इत्यादि। राज्य सरकार द्वारा चलाई जाने वाली लाटरियां, नॉन-एसी होटल, बिजनेस क्लास एयर टिकट, खाद इत्यादि।

18 प्रतिशत टैक्स-
सबसे ज्यादा वस्तुएं इस वर्ग में रखी गई हैं। 500 रुपये से अधिक के जूते-चप्पल, सॉफ्टवेयर, बीड़ी पत्ता, सभी तरह के बिस्किट, पास्ता, कॉर्नफ्लेक्स, मिनरल वाटर, एनवेलप, नोटबुक, स्टील के सामान, कैमरा, स्पीकर, मॉनिटर, काजल पेंसिल, एलुमिनियम फॉयल इत्यादि। शराब परोसने वाले एसी होटल, टेलीकॉम सेवाएं, आईटी सेवाएं, ब्रांडेड कपड़े, वित्तीय सेवाएं इत्यादि।

28 प्रतिशत टैक्स –
 बीड़ी, चूइंग गम, बगैर कोकोआ वाले चाकलेट, पान मसाला, पेंट, डियोड्रेंट, शेविंग क्रीम, शैम्पू, वाशिंग मशीन, ऑटोमोबाइल्स, मोटरसाइकिल इत्यादि। राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त प्राइवेट लॉटरियां, 7500 रुपये से ज्यादा कीमत वाले होटल, पांच सितारा होटल, रेस क्लब बेटिंग, सिनेमा इत्यादि।


जीएसटी भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बदलाव लाते हुए एकल बाजार में 2,000 अरब डालर की अर्थव्यवस्था और 1.3 अरब लोगों को जोड़ेगी। जीएसटी काउंसिल ने सभी वस्तुओं और सेवाओं को चार टैक्स स्लैब (5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत) में बांटा है। काउंसिल ने 12011 वस्तुओं को इन चार वर्गों में रखा है। इसके तहत 20 लाख तक का व्यापार करने वालों को जीएसटी से मुक्ति मिलेगी। साथ ही 75 लाख तक के व्यापारी को जीएसटी में राहत मिलेगी।


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