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Saturday, July 08, 2017

लावारिश पशुओं ने ली युवक की जान, गजसिंहपुर मेें प्रिंसीपल घायल

आवारा सांड की टक्कर लगने से दी गंगानगर उपभोक्ता होलसेल भंडार के रिटायर्ड जीएम सतीश तलवार (65) की मौत हो जाने से श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में निराश्रित पशुओं की समस्या और ज्यादा विकराल हो जाने के रूप में उभरकर आई है।


श्री तलवार की ऐसे बड़ी बेदर्दी से अचानक हुई मौत ने दोनों जिलों के शासन-प्रशासन के सामने निराश्रित पशुओं को लेकर यक्ष प्रश्न खड़े कर दिये हैं, वहीं इन पशुओं की वजह से जहां पहले भी अनेक लोग अपनी जाने गंवा चुके हैं या बुरी तरह से जख्मी होने के कारण जिन्दगीभर के लिए लाचार हो गये हैं, वहीं ऐसे हादसे निरंतर जारी हैं। शुक्रवार को हनुमानगढ़ जिले मेें रावतसर कस्बे में एक युवक की मौत हो गई। इधर, श्रीगंगानगर जिले के गजसिंहपुर कस्बे में एक कॉलेज के प्रिंसीपल गोधे की टक्कर लगने से घायल हो गये। श्रीगंगानगर में सतीश तलवार की मृत्यु के पश्चात् प्रशासन आज कुछ सक्रिय तो हुआ है, लेकिन निराश्रित पशुओं को पकडऩे के लिए संसाधनों का भारी अभाव भी एक बड़ी समस्या है। सुबह कुछ पशुओं की धरपकड़ की गई। धरपकड़ के लिए आवश्यक संसाधन न होने के कारण नगरपरिषद के दो कर्मचारी इस दौरान घायल हो गये। इस पर धरपकड़ को बीच में ही छोड़ देना पड़ा।

ऐसे आ गई मौत

हनुमानगढ़ जिले के रावतसर कस्बे में गुरुवार रात लगभग साढ़े 8 बजे वार्ड नं. 5 के निवासी मदनलाल का 20 वर्षीय पुत्र फूसाराम किसी काम से बाजार आ रहा था। वह मोटरसाइकिल पर कस्बे की एक गली से होते हुए जैसे ही मेगा हाइवे पर आया और कुछ ही दूर गया था कि कोको पेट्रोल पम्प के पास एक आवारा सांड से टकरा गया। इस मेगा हाइवे पर आवारा पश्ुाओं की रोकथाम का जिम्मा हाइवे पर टोल वसूल करने वाली कम्पनी का है, लेकिन कम्पनी कभी इस तरफ ध्यान नहीं देती। सांड से टकरा जाने से फूसाराम गम्भीर रूप से जख्मी हो गया। उसे रावतसर के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया, लेकिन इस अस्पताल मेें भी इलाज की सुविधाओं का भारी अभाव है। डॉक्टरों ने मात्र प्राथमिक उपचार देकर उसे हनुमानगढ़ के लिए रैफर कर दिया। हनुमानगढ़ मेें भर्ती करवाये जाने के पश्चात् आज बड़े तडक़े फूसाराम की मौत हो गई। उसके परिवार वालों पर वज्रपात हुआ। फूसाराम हलवाई का काम करता था। परिवार वाले उसके शव को घर ले आये। इस हादसे के सम्बंध में कोई मामला देर शाम तक थाने में दर्ज नहीं करवाया गया था। बता दें कि हनुमानगढ़ जिले में संगरिया से लेकर पल्लू तक के इस मेगा हाइवे पर बीते कुछ वर्षांे में सैकड़ों लोग निराश्रित-आवारा पशुओं की वजह से अपनी जानें गंवा चुके हैं। इसके लिए जिम्मेदार टोल टैक्स वसूल करने वाली कम्पनी पर कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई। कम्पनी की जिम्मेवारी है कि वह इस मेगा हाइवे पर निराश्रित-आवारा पशुओं को नहीं आने दे। इसके लिए पर्याप्त रोकथाम के लिए इंतजाम किये जायें।

हरा चारा टाल बनी कारण

गजसिंहपुर में शुक्रवार सुबह लगभग सवा 9 बजे रेलवे स्टेशन के बाहर मेन रोड पर पैदल जा रहे गुरुनानक कॉलेज के प्रिंसीपल डॉ. मदन मेव, जोकि जिला परिषद के पूर्व डायरेक्टर भी है, को अचानक पीछे से एक सांड ने टक्कर मार दी। सांड उन्हें टक्कर मारते हुए भाग गया। डॉ. मेव के काफी गम्भीर चोट लगी। वे बेहोश होकर गिर गये। भागकर आये लोगों ने उन्हें संभाला। उन्हें अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉ. मेव को उनका गहन चैकअप करवाने के लिए श्रीगंगानगर लाया गया। उनकी कमर, पांव और सिर में चोट लगी है। डॉ. मेव ने बताया कि वे रोजाना की तरह रेलगाड़ी से गजसिंहपुर गये थे। स्टेशन से बाहर आकर वे पैदल गुरुनानक कॉलेज के लिए जा रहे थे। रास्ते में हरा चारा टाल के आगे से गुजरते समय उन्होंने देखा कि टाल का संचालक लठ लेकर एक सांड को भगाने वाला है। उन्होंने उसे ऐसा करने से मना भी किया, लेकिन फिर भी टाल संचालक ने सांड के लठ मार दिया, जिससे वह बिदककर भागा। भागते हुए सांंड ने उनको चपेट में ले लिया। इस घटना का पता चलने पर नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारी मौके पर आये। हरा चारा टाल संचालक को फटकार लगाकर चले गये।

बीच में छोडऩी पड़ी धरपकड़



 श्रीगंगानगर में सुबह नगरपरिषद के अमले ने आवारा-निराश्रित पशुओं की धरपकड़ की कार्रवाई बड़े जोर-शोर से शुरू की। रामलीला मैदान में आसपास के इलाके से नगरपरिषद के सफाई कर्मचारी ऐसे पशुओं को हांककर ले आये, लेकिन उनके टैग लगाना और उन्हें वाहनों में लादकर गऊशालाओं-नंदीशालाओं में भिजवाने के कोई संसाधन न होने के कारण इस धरपकड़ को बीच में छोडऩा पड़ा। धरपकड़ के दौरान नगरपरिषद के दो कर्मचारी घायल हो गये। बताया जा रहा है कि इनमें से एक के फ्रेक्चर भी हो गया। रिटायर्ड जीएम सतीश तलवार की मृत्यु के बाद शहरवासियों मेें उपजे आक्रोश और प्रशासन के अधिकारियों पर अपनी जिम्मेवारी का निवर्हन न करने के उठे सवालों को देखते हुए नगरपरिषद आनन-फानन में पशुओं की धरपकड़ को तो तैयार हो गई, लेकिन उसके पास किसी तरह के कोई संसाधन नहीं है। प्रशासन ने इस अभियान में वन विभाग को नहीं जोड़ा। फलस्वरूप बमुश्किल 100 पशुओं की ही धरपकड़ की जा सकी। हालांकि दावा 300 पशुओं की धरपकड़ का किया जा रहा है। दिक्कत यह भी है कि टैग लगाते समय यह पशु हिंसक हो जाते हैं। उस पर काबू पाना संभव नहीं हो पाता। परिषद को इस अभियान में श्रीगंगानगर चैम्बर ऑफ कॉमर्स का ही सहयोग मिल पाया। आम लोग व शहर में अन्य सामाजिक व धार्मिक संस्थाएं इसके लिए आगे नहीं आईं। परिषद का कहना है कि बिना जनसहयोग के इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल सकता।



चाहिए काफी संसाधन
निराश्रित-आवारा पशुओं की धरपकड़ कर उन्हें गौशालाओं व नंदीशालाओं में पहुंचाने के लिए नगरपरिषद ने काफी संसाधनों की जरूरत बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया है। अब निश्चित नहीं है कि कल यह अभियान चलेगा या नहीं। शहर में ऐसे पशुओं की संख्या 1 हजार से अधिक बताई जा रही है। परिषद के कर्मचारियों का कहना है कि कम से कम 40 ट्रेक्टर-ट्रॉलियां चाहिएं, जिनसे पशुओं को नंदीशालाओं-गौशालाओं में भेजा जा सके। एक ट्रेक्टर-ट्रॉली में दो या तीन से ज्यादा पशु नहीं भेजे जा सकते। काउकेचर भी ज्यादा संख्या में चाहिए। परिषद ने चेता दिया है कि न नौ मन तेल होगा और न ही राधा नाचेगी।

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