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Saturday, July 29, 2017

यात्रा- प्राकृतिक प्रेमियों के लिए जन्नत है कश्मीर - रंजीत



मुझे भीड़भाड़ व शोरगुल वाले शहर नहीं भाते हैं। अब तो नैनीतालशिमला, डलहौजी हो या मनाली सभी जगह भीड़भाड़ हो गई है। आम तौर पर लोग छुट्टियां इंज्वाये करने इन जगहों पर जाते हैं, मगर मुझे मुंबई के भाग-दौड़ भरे माहौल से कुछ समय भीड़भाड़ से दूर बिताने का मन करता है तो मेरे जेहन में कश्मीर जाने का ही ख्याल आता है।

जिंदगी के  इस मुकाम तक पहुंचने के इस यादगारी सफर में यूं तो मैं  देश-विदेश में अनेकों जगहों पर घूम चुका हूं। मगर मुंबई क ी भाग-दौड़ भरी जिंदगी से कुछ पल निजात पाने के लिए मुझे कहीं जाने की इच्छा हो तो मेरे
जेहन में पहला नाम कश्मीर का ही सामने आता है। आम तौर पर भारतीय लोग नैनीताल, शिमला, डलहौजी, कुल्लू-मनाली आदि जाना पसंद करते हैं, मगर मुझे यहां जाना नहीं भाता क्योंकि आज-कल इन हिल स्टेशनों पर पर्यटकों की भीड़ बहुत ज्यादा हो चुकी है और मुझे भीड़-भाड़ से दूर ही कहीं जाना पसंद है। इसलिए मुझे कश्मीर ही भाता है। बेशक कश्मीर आज आंतकवाद के हालातों से जूझ  रहा है, मगर वहां की शांति व प्राकृतिक नजारे दिल को छू लेते हैं। जो एक बार कश्मीर जाता है, वहीं का होकर रह जाता है। कश्मीर की वादियां पर्यटकों का का मन मोह लेती हैं। कश्मीर के पर्वतीय क्षेत्र, ग्लेशियर, झीलें व मंदिर वहां की शोभा में चार चांद लगा देते हैं। कश्मीर का मौसम बेहद शानदार है। वहां की बर्फबारी व फूलों से लदी वादियां देखते ही बनती हैं। मुझे तो बचपन से ही पहाड़ व बारिश बहुत भाती है। कश्मीर के साथ लगते सोनमर्ग, पहलगाम, पटनीटॉप व गुलमर्ग समेत अनेकों जगहें देखने लायक हैं।
कश्मीर की डल झील काफी प्रसिद्ध है। पर्वतारोहन, रॉफ्टिंग, स्कीइंग, ट्रैकिंग जैसे साहसिक व रोमांचक कारनामे करने वाले 





युवाओं के लिए कश्मीर से बेहतर कोई जगह नहीं होगी। यहां पर्यटक पवर्तारोहन, रॉफ्टिंग, स्कीइंग व ट्रैकिंग का मजा ले सकते हैं। पहले तो हर पुरानी फिल्म की शूटिंग ही कश्मीर में हुआ करती थी। हर दूसरी या तीसरी फिल्म में कश्मीर जरुर दिखाया जाता था। मैं फिल्मों की शूटिंग के चलते अनेकों बार कश्मीर गया। मुझे कश्मीर की वादियों में अपनतत्व का ऐसा अहसास हुआ कि उसके बाद मैं जब भी फुर्सत में रहना पसंद करता था तो कश्मीर ही चला जाता। अब उम्र के 75वें पड़ाव पर पहुंच चुका हूं। बढ़ती उम्र में ठहराव आने शुरु हो जाते हैं। ऐसे में अब पिछले कुछ सालों से कश्मीर न जा सका। मगर अब मन में एक बार फिर से दोबारा कश्मीर जाने की इच्छा जागृत हो चुकी है। समुद्र मुझे अच्छा नहीं लगता है। मैं शुद्ध शाकाहारी हूं और मुंबई में भी समुद्र व आस-पास मछलियां बेचने वाले लगे रहते हैं तो दुर्गंध से घुटन हो उठती है। इसलिए मैं समुद्र के पास भी जाना पसंद नहीं जाता। मेरी कुंडली में बारिश भी लिखी है। मुझे बारिश बहुत पसंद है और मैं जहां जाता हूं वहां बारिश होने लगती है। इसलिए मेरे दोस्त मुझे बारिश मैन भी बुलाते हैं। अगर मुझे विदेश में कहीं घूमने का मन करता है तो मैं यूरोप या जर्मनी जाना पसंद करता हूं, क्योंकि थाईलैंड या बैकॉंक जैसे शहरों के मुकाबले यहां शांति व शोरगुल बहुत कम है। जिंदगी के इस पड़ाव तक आने के सफर में मैंने हर देश-विदेश देख लिया है, मगर हैरानी की बात है कि मुंबई में रहते हुए मैं मुंबई स्थित हाजी अली दरगाह अभी तक न देख पाया हूं। मुंबई में रहते हुए पचास वर्ष बीत चुके  हैं और रोजाना दरगाह के आगे से आना-जाना होता है। मगर अभी तक दरगाह देखना नसीब न हुआ है।
 
(जगदीश जोशी से हुई बातचीत पर आधारित)
जगह - कश्मीर  

राजधानी - ग्रीष्मकालीन श्रीनगर व शीतकालीन जम्मू  

आधिकारिक भाषा - कश्मीरी, उर्दू व डोगरी  

मुद्रा - रुपया  

 कश्मीर भारतीय उप महाद्वीप का एक हिस्सा है। जिसके अलग-अलग भागों पर भारत और पाकिस्तान का आधिपत्य है। ये भारत का लोकप्रिय पर्यटक स्थल है। प्राकृतिक प्रेमियों की नजर में कश्मीर जन्नत से कम नहीं है। हिमालय की गोद में बसा कश्मीर नेचुरल ब्यूटी के लिए अपने आप में खास मुकाम रखता है।


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