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Tuesday, July 25, 2017

स्कूल भेजने से खफा दसवीं के छात्र ने काट डाला बाप का गला

 

सोते हुए पर कापे से गर्दन पर किया वार, गम्भीर हालत में अस्पताल में दाखिल

श्रीगंगानगर
 स्कूल भेजने से खफा एक बिहारी किशोर ने रात को सोते समय अपने पिता की गर्दन पर तेज धार वाले कापे से वार कर उसे मौत के घाट उतारने का प्रयास किया। गर्दन पर गहरी चोट लगने से इस शख्स की हालत गम्भीर है, जो कि एक निजी अस्पताल मेें उपचाराधीन है। पुलिस ने इस किशोर को निगरानी में ले लिया है, जो कि 10वीं में पढ़ता है। यह घटना श्रीगंगानगर में हनुमानगढ़ मार्ग पर स्थित रिको उद्योग विहार के सैकिंड फेज में एक ऑयल फैक्टरी के बाहर रात्रि लगभग साढ़े 11 बजे हुई। पुलिस के मुताबिक सैकिंड फेज में स्थित अरिहंत ऑयल फैक्टरी में रात लगभग साढ़े 11 बजे अफरा-तफरी मच गई, जब बाहर तख्त पर सोये हुए फैक्टरी के एक मिस्त्री सत्येन्द्र (62) पुत्र शत्रूघ्न एकाएक जोर से चिल्लाने लगा। फैक्टरी में कार्यरत अन्य कर्मचारी व मजदूर भागकर आये, तो उन्होंने देखा कि सत्येन्द्र खून से लथपथ तडफ़ रहा है। उसकी गर्दन और हाथ पर चोटें मारी गई थीं। वहीं पर उन्होंने सत्येन्द्र के करीब 17 वर्षीय पुत्र को भागते हुए देखा, जिसके पास तेज धार वाला कापा था। फैक्टरी के मैनेजर जीवनराम मीणा की सूचना पर सदर थाना से पुलिस मौके पर पहुंची। इससे पहले घायल सत्येन्द्र को जिला अस्पताल इलाज के लिए भिजवाया गया। बाद में


सत्येन्द्र को जवाहरनगर में मीरा मार्ग पर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया। पुलिस ने बताया कि सत्येन्द्र के गर्दन के अलावा एक हाथ पर भी वार किया हुआ है। रात को ही पुलिस ने भागदौड़ कर सत्येन्द्र के पुत्र को निगरानी में ले लिया। जीवनराम द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर हत्या का प्रयास करने के आरोप में मामला दर्ज कर लिया गया।

स्कूल भेजने से खफा था

पुलिस के अनुसार सत्येन्द्र, जोकि बिहार में दरभंगा जिले में थाना तिहारा के गांव तीतरा का निवासी है, जो पिछले काफी समय से अपनी पत्नी व एक पुत्र के साथ रिको में रह रहा था। वह अरिहंत ऑयल फैक्टरी में मिस्त्री है। उसका एक पुत्र गांव में रहता है। यहां साथ रह रहे पुत्र को उसने रिको में ही एक निजी स्कूल में डाल रखा है। करीब 15 दिन पहले स्कूल मेें उसके पुत्र के साथ कोई बात हो गई, जिस पर उसे स्कूल प्रबंधकों ने निकाल दिया था। तब से सत्येन्द्र का पुत्र इधर-उधर भटकता रहता था। सत्येन्द्र उसे वापिस स्कूल में लगाना चाहता था, जबकि वह इससे मना करता था। इसी बात को लेकर पिता-पुत्र में कुछ दिनों से तकरार चल रही थी। पिछले सप्ताह सत्येन्द्र ने स्कूल में जाकर प्रबंधकों से आग्रह किया। उनके समक्ष हाथ जोड़ी की, तब


उन्होंने उसके पुत्र को वापिस स्कूल में लेने के लिए सहमति दे दी, लेकिन उसका पुत्र स्कूल जाने से मना करता रहा। सत्येन्द्र उसे स्कूल जाने के लिए बार-बार कहता, लेकिन वह मना कर देता। समझा जाता है कि इसी बात को लेकर रात को पुत्र ने उस समय पिता पर तेजधार वाले हथियार से हमला कर दिया, जब वह फैक्टरी के बाहर तख्त पर सो रहा था।

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