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Wednesday, July 05, 2017

शराब ठेके बंद कर चाबियां प्रशासन को सौंपी


लाइसेंसियों ने कहा वे जिला पुलिस के कारण नहीं कर पा रहे अपना कारोबार

  श्रीगंगानगर शहर तथा आसपास के 10 किमी क्षेत्र में अंग्रेजी व देशी शराब के सभी ठेके बुधवार को पूरी तरह से बंद रहे। शराब की दुकानों के लाइसेंसियों ने सुबह गोल बाजार में मून लाइट होटल में बैठक करने के बाद आबकारी विभाग कार्यालय में जाकर अधिकारी को सभी दुकानों की चाबियां सौंप दीं। दोपहर को लाइसेंसी जिला कलक्टर ज्ञानाराम के पास अपनी गुहार लेकर पहुंचे। इनके साथ आबकारी निरोधक पुलिस के इंस्पेक्टर मांगीलाल और ललित कुमार भी थे। इन दोनों इंस्पेक्टरों ने भी लाइसेंसियों के प्रति सहानुभूति दर्शाते हुए जिला कलक्टर से इनकी समस्या-मांगों का समाधान करने का आग्रह किया। कलक्टर ने लाइसेंसियों के साथ-साथ इन इंस्पेक्टरों को नसीहत दी कि वे अपना कारोबार और ड्यूटी कानून व नियमों के अनुसार ही करें। अगर वे कोई गड़बड़ नहीं करते हैं, तो उन्हें किसी बात का डर नहीं होना चाहिए। नि:सन्देह उनके कारोबार और ड्यूटी में गड़बड़ ही गड़बड़ है, इसीलिए लोगबाग ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी देर रात को उनके पास यह गुहार लेकर आती हैं कि उनके मोहल्ले या मार्केट में अभी भी ठेके से शराब बिक रही है। जिला कलक्टर ने लाइसेंसियों से कहा कि वे कोई गलत काम नहीं करें। उन्हें कोई तंग-परेशान नहीं करेगा। दूसरी ओर उन्होंने इंस्पेक्टरों को निर्देश दिये कि वे न तो रात को आठ बजे के बाद शराब बिकने दें और न ही अवैध रूप से शराब की दुकानें खुलने दें। लाइसेंसियों ने गुहार लगाई कि वे अपना कारोबार जिला पुलिस के कारण ही नहीं कर पा रहे। रात 8 बजे तक ठेके खुलने का समय है, लेकिन इससे आधा-पौना घंटा पहले ही पुलिस की गाडिय़ां ठेकों के आसपास चक्कर ही नहीं लगाने लगती, बल्कि सामने आकर खड़ी हो जाती हैं।
 इस कारण खरीददार घबराकर चले जाते हैं। कलक्टर ने इस मामले में लाइसेंसियों को आश्वस्त किया कि वे पुलिस अधीक्षक से इस बारे मेें बात करेंगे, लेकिन उन्हें चेताया कि आठ बजे के बाद अगर ठेके के अंदर बैठकर सेल्समैन या उनका कारिंदा शराब बेच रहा हो, तब उनका बचाव नहीं हो सकता। पुलिस के साथ-साथ आबकारी निरोधक पुलिस अपनी कार्रवाई करने को स्वतंत्र हैं। उनके इस जवाब से लाइसेंसियों में मायूसी फैल गई। उन्होंने कलक्टर कार्यालय से बाहर आकर आपस में मंत्रणा की। निर्णय किया कि ऐसे माहौल में कारोबार नहीं किया जा सकता। लिहाजा चाबियां आबकारी विभाग के अधिकारियों के पास ही रहेंगी। वे अपनी दुकानें नहीं खोलेंगे। श्रीगंगानगर शहर में अंग्रेजी शराब की 21 और देसी शराब की 16 दुकानें हैं। आसपास ग्रामीण क्षेत्र-100 फुट रोड, त्रिपुली, साहूवाला, चक 2 एमएल व चार एमएल में अंग्रेजी-देसी शराब के कम्पोजिट ठेके भी हैं। यह ठेके भी आज बंद रहे। पूरे दिन शराब के लिए लोग इधर-उधर भटकते रहे। सुप्रीम कोर्ट के नये निर्देशों के तहत शहर में कईं बार भी बंद हो चुके हैं। तीन-चार बार ही चल रहे हैं। इन बारों मेें आज खूब भीड़ रही, लेकिन यहां शराब महंगी मिलती है। एक लाइसेंसी विकेश सेतिया ने बताया कि दुकानें बंद रखने का ही फैसला किया गया है। आज रात 8 बजे के बाद आबकारी पुलिस को साथ लेकर लाइसेंसी शहर तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानों को चैक करने जायेंगे। अगर कहीं शराब बिकती हुई मिली, तो उसके खिलाफ कार्रवाई करवायेंगे।  
यह है विवाद की जड़
शराब की दुकानें बंद होने के पीछे कईं कारण है। लाइसेंसियों पर दबाव रहता है कि वे हर महीने के कोटे के अनुसार शराब की बिक्री करें। यह कोटा पूरा करने के लिए लाइसेंसी रात 8 बजे के बाद भी ठेकों के शटर बंद करके उसके नीचे से अथवा दीवारों में किये हुए छेदों से सारी रात शराब बेचते हैं। आठ बजे के बाद इस तरह शराब की बिक्री को लेकर पुलिस और आबकारी निरोधक विभाग पर लोगों का दबाव है कि वे इसे रुकवायें। आखिर सरकार ने आठ बजे तक शराब बिक्री का नियम क्यों बना रखा है। जबसे नये ठेके हुए हैं, तब से पुलिस और आबकारी निरोधक विभाग इन पर कार्रवाई करने से आनाकानी करता रहा है, लेकिन हाल के दिनों में कईं संगठनों ने धरने-प्रदर्शन कर रोष जताना शुरू कर दिया। साथ ही आठ बजे के बाद जहां बिक रही होती है, वहां लोग घेराव कर देते हैं। इससे कानून व्यवस्था की स्थिति बिगडऩे लगती है। कल मंगलवार रात करीब पौने 10 बजे हनुमानगढ़ मार्ग पर बहल हॉस्पीटल के नजदीक अवर एसपी सुरेन्द्र सिंह ने पुष्पेन्द्र कौर बराड़ लाइसेंसी की दुकान पर छापा मार दिया। उन्होंने पहले दो सादा वर्दी पुलिसकर्मियों को भेजा, जिन्हें शटर के नीचे से शराब दे दी गई। इसके बाद छापेमारी की गई। अवर एसपी ने, आबकारी इंस्पेक्टर मंागीलाल को वहां बुला लिया। मांगीलाल से कार्रवाई करवाने के बाद अवर एसपी वहां से चले गये। मगर इस कार्रवाई से शहर के सभी शराब दुकान के लाइसेंसियों में रोष फैल गया। मौके पर, सभापति अजय चांडक के भाई संदीप चांडक, पिंटा मित्तल, कांग्रेसी नेता एवं शराब ठेकेदार प्रेम नायक, विकेश सेतिया, रफीक आदि लोग पहुंचे। उन्होंने रोष स्वरूप उसी समय ही सभी दुकानों की चाबियां मंगवा लीें। सुबह दुकानें बंद रखने और चाबियां आबकारी विभाग के अधिकारियों को सौंप देने का फैसला कर लिया। 
 भारी जुर्माना, कोई राहत नहीं
शराब लाइसेेंसियों ने आज जिला कलक्ट्रेट में अपनी व्यथा मीडिया को सुनाई ।वहां मौजूद आबकारी निरीक्षकों ने भी उनके प्रति सहानुभूति जताई। लाइसेंसियों ने बताया कि अंग्रेजी शराब के 21 लाइसेंसियों में से अब तक 13 लाइसेंसियों को हर माह की शराब का कोटा सेल नहीं करने पर 17 लाख का जुर्माना हो चुका है। उन्हें हर तीन महीने मेें अंग्रेजी शराब की एक हजार 55 और बीयर की 2115 पेटियां हर हाल में आबकारी विभाग से उठानी पड़ती हैं। आगे वह बिकें, चाहे न बिकें। हालत यह है कि कईं लाइसेंसियों के पास 25-25 लाख की शराब स्टॉक में पड़ी है। दूसरी ओर आबकारी निरीक्षकों ने बताया कि कोटे के अनुसार बिक्री नहीं होने पर उन्हें विभागीय चार्जशीट का सामना करना पड़ता है। लाइसेंसियों ने कहा कि आजकल गर्मियों के दिन हैं। आठ बजे दिन पूरी तरह से नहीं छिपता। शराब की बिक्री 8 से 10 बजे के बीच होती है। इसी दौरान ही पुलिस की छापेमारी शुरू हो जाती है। लिहाजा वे कोटे के मुताबिक शराब की बिक्री कैसे करें, यह एक बड़ी मुसीबत है।
जयपुर का रास्ता सुझाया
आबकारी विभाग के अधिकारियों ने ही लाइसेंसियों को जयपुर जाकर आबकारी आयुक्त ओपी यादव के समक्ष गुहार लगाने का रास्ता सुझाया है। पूर्व में आयुक्त ने एक आदेश जारी किये थे, जिस पर पुलिस के हाथ-पांव बांध दिये गये थे। पुलिस के अधिकार सीमित कर दिये गये थे। अब फिर आयुक्त के पास लाइसेंसियों को जाकर गुहार लगाने के लिए कहा जा रहा है। आयुक्त कोई फिर ऐसा कोई आदेश जारी कर सकते हैं या सरकार से जारी करवा सकते हैं, जिससे पुलिस की मुश्कें और बांध दी जायें। आखिरकार सरकार को शराब की बिक्री से हर वर्ष अरबों रुपये का राजस्व मिलता है।

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