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Thursday, July 27, 2017

अस्पताल की लापरवाही उस पर पुलिस की सुपर लापरवाही


संदिग्धावस्था हो गई थी बारहवीं कक्षा की छात्रा की उपचार के दौरान अस्पताल में मौत


लकीर पीटती पुलिस ने अंत्येष्टी के बाद परिजनों से लिखवाया नहीं कराना चाहते पोस्टमार्टम


पुलिस और अस्पताल की लापरवाही के चलते पड़ा रह गया रहस्य पर पर्दा  


श्रीगंगानगर के एक निजी अस्पताल में संदिग्ध हालातों में 12वीं कक्षा की छात्रा की हुई मौत के मामले जहां अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही बरतते हुए शव परिजनों को सौंप दिया वहीं पुलिस ने इस मामले में सुपर लापरहवाही का प्रदर्शन किया। पुलिस को संदिग्ध हालातों में लडक़ी के अस्पताल में उपचार के लिए आने संबंधी सूचना मिलने के बावजूद पहुंचने में करीब 16 घंटे लगा दिए, जब तक इतनी देरी हो चुकी थी कि शव का अंतिम संस्कार होने के साथ आस पास के लोग व रिश्तेदार भी घर से वापिस लौट चुके थे। मृतका के अंतिम संस्कार हो जाने के करीब डेढ़ घंटे के बाद लकीर पीटते हुए पहुंची पुलसि ने आखिर अपना चर्म बचाने के लिए मृतका के परिवार वालों से लिखवा लिया कि वह मृतका का पोस्टमार्टम नहीं करवाना चाहते हैं। इन हालातों में जहां निजी अस्पताल की गम्भीर करतूत और पुलिस की गफलत तो उजागर हुई ही है किशोरी की मौत किन कारणों और किन परिस्थितियों में हुई, इस रहस्य पर भी पर्दा पड़ गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जैतसर थाना क्षेत्र के एक गांव की निवासी 16 वर्षीय किशोरी सीमा (काल्पनिक नाम) को उसके परिवार वाले कल दोपहर को गम्भीर बेहोशी की हालत में श्रीबिजयनगर के सरकारी अस्पताल मेें लेकर आये, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन साथ ही हालत गम्भीर देखते हुए श्रीगंगानगर जिला अस्पताल में रैफर कर दिया। परिजन किशोरी को जिला अस्पताल की बजाय श्रीगंगानगर में ब्लॉक एरिया में स्थित एक निजी अस्पताल में ले आये। अस्पताल ने पुलिस कंट्रोल रूम को कल शाम 7.20 बजे सूचित किया कि एक किशोरी को किसी अज्ञात जहरीले पदार्थ का सेवन कर लेने पर उनके यहां भर्ती करवाया गया है। कंट्रोल रूम ने इसकी सूचना जैतसर थाना पुलिस को दे दी। जैतसर थाने से किसी जांच अधिकारी को रवाना ही नहीं किया गया। रात लगभग 12 बजे किशोरी की मौत हो गई। इसकी सूचना भी जैतसर थाने में दी गई। रात को कोई साधन न होने के कारण जांच अधिकारी को श्रीगंगानगर के लिए रवाना नहीं किया गया। आज सुबह एक एएसआई को गंगानगर भेजा गया, ताकि वह किशोरी के शव का पोस्टमार्टम करवाकर जांच-पड़ताल कर सके। यह एएसआई इस निजी अस्पताल में पहुंचा, तो पता चला कि किशोरी के शव को उसके परिवार वाले रात को ही अपने गांव ले गये। निजी अस्पताल के संचालकों ने सीधे ही शव परिवारजनेां को सौंप दिया, जबकि नियमानुसार व कानूनन शव को जिला अस्पताल के मुर्दाघर में रखवाया जाना चाहिए था। पुलिस के आने पर ही शव परिवारजनों को सौंपा जा सकता था। इस एएसआई ने शव परिजनों द्वारा रात को ही गांव में ले जाने की सूचना थाने के कार्यवाहक प्रभारी रमेश कुमार को दे दी। बावजूद इसके इस मामले को


जैतसर पुलिस ने कतई गम्भीरता से नहीं लिया। किशोरी के शव को तत्काल पुलिस द्वारा कब्जे में लिया जाना आवश्यक था। फिर भी पुलिस टीम गांव में नहीं गई। दोपहर करीब 11.30 बजे जब इस किशोरी की संदिग्ध परिस्थितियों की मृत्यु हो जाने की सूचना सूरतगढ़ में डीएसपी ओनाड़ सिंह को मिली, तब उनकी फटकार पर जैतसर थाना से सब इंस्पेक्टर गोविन्दराम गांव में पहुंचे। तब तक किशोरी की अंत्येष्टी को किये हुए डेढ़ घंटा हो गया था। एसआई गोविन्दराम ने पुलिस के बचाव के लिए परिवार वालों से लिखवा लिया कि उन्हें किशोरी की मौत पर कोई शक नहीं है और वे पोस्टमार्टम नहीं करवाना चाहते। हालंाकि किशोरी की अंत्येष्टी पहले ही हो चुकी थी। सिर्फ खानापूर्ति के लिए यह लिखवाया गया। उधर, पुलिस ने दबी जुबान में बताया कि किशोरी की मौत बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। उसने खुद ही कोई जहरीली दवा खा ली थी। किशोरी ने यह कदम क्यों उठाया, यह गहन जांच का विषय था, लेकिन उसकी अंत्येष्टी आनन-फानन में कर दिये जाने के कारण इन सब पर रहस्य का पर्दा पड़ गया।
बहुत गम्भीर है मामला : डीएसपी
सूरतगढ़ के डीएसपी ओनाड़ सिंह ने स्वीकार किया है कि यह पूरा मामला बेहद गम्भीर है। पूरी जांच होनी चाहिए कि आखिर किशोरी ने किन परिस्थितियों में और किन परेशानियों से दु:खी होकर कोई जहरीली दवा खा ली। इस मामले में निजी अस्पताल के संचालकों ने बहुत गम्भीर हरकत की है। उन्हें किशोरी का शव सीधे परिवार वालों को नहीं सौंपना चाहिए था। ऐसे तो कल को कोई भी किसी को जहर खिला देगा और निजी अस्पताल में उसकी मौत हो जाने पर सीधे शव का अन्तिम संस्कार कर हत्या के सबूतों को नष्ट कर देगा। किशोरी के इस मामले में देखा जायेगा कि निजी अस्पताल के संचालकों पर क्या कार्रवाई की जा सकती है। अगर कार्रवाई नहीं की गई, तो इस तरह की गलत परिपाटी निजी अस्पतालों में शुरू हो जायेगी।

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