अखिल भारतीय अग्रवाल समाज हरियाणा के अध्यक्ष राजकुमार गोयल दवारा पुलिस महकमें से मांगी गई थी जानकारी 

पुलिस महकमें से मिली जानकारी दिखाते राजकुमार गोयल।
आमतौर पर देखा जाता है कि पुलिस के अधिकारी या कर्मचारी पासपोर्ट बनवाने, आर्म लाइसेंस बनवाने या फिर इन्हें रिन्यू करवाने जैसी किसी भी प्रकार की वेरिफिकेशन के लिए आवेदक को फोन करके उसे दो गवाहों को लेकर पुलिस थाने में पहुंचने का आदेश देते है जबकि वास्तव में पुलिस ऐसा नहीं कर सकती। अगर पुलिस ऐसा कर रही है तो बिल्कुल गलत कर रही है। यह बात हम नहीं कह रहे बल्कि विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े प्रमुख समाजसेवी व वरिष्ठ आरटीआई कार्यकत्र्ता डा. राजकुमार गोयल द्वारा मांगी गई आरटीआई से यह खुलासा हुआ है। 
अखिल भारतीय अग्रवाल समाज हरियाणा के अध्यक्ष व आरटीआई कार्यकत्र्ता राजकुमार गोयल ने पुलिस महकमें से जानकारी मांगी थी कि किसी भी व्यक्ति द्वारा पासपोर्ट बनवाने, आर्म लाइसेंस बनवाने या फिर रिन्यू करवाने के दौरान जो पुलिस वेरिफिकेशन करवानी पड़ती है उसमें सरकार के क्या नियम हैं। किस स्तर का अधिकारी यह वेरिफिकेशन करता है। इस वेरिफिकेशन में क्या क्या वेरिफाई किया जाता है। इसके लिए वेरिफिकेशन करवाने वाले को क्या क्या करना पड़ता है। क्या वेरिफिकेशन के लिए खुद व्यक्ति को पुलिस के दरवाजे जाना पड़ता है या फिर खुद पुलिस को व्यक्ति के दरवाजे। इसके लिए सरकार के क्या नियम है। 



इसके साथ साथ यह जानकारी भी मांगी गई थी कि आमतौर पर पुलिस वाले वेरिफिकेशन के लिए व्यक्ति को दो पड़ौसियों को साथ लेकर थाने में आने के लिए फोन करते हैं। क्या थाने में बुलाने का नियम सही है। इसके साथ-साथ यह जानकारी भी मांगी गई कि जिन व्यक्तियों को गवाह के तौर पर बुलाया जाता है, वे व्यक्ति किस क्षेत्र के होने चाहिएं। क्या गवाह के तौर पर बुलाने वाले दोनों व्यक्ति पड़ोस के ही होने जरूरी हैं या फिर दूसरे कस्बे, दूसरे शहर के भी हो सकते हैं। क्या जिले से बाहर का व्यक्ति भी गवाही कर सकता है। क्या मात्र एक व्यक्ति भी गवाही दे सकता है या फिर दो का होना जरूरी है। क्या परिवार का कोई सदस्य भी गवाह बन सकता है। इसके साथ साथ गवाही देने वाले व्यक्ति को कम से कम क्या कागजात देने पड़ते हैं।
राजकुमार गोयल द्वारा पुलिस महकमे से यह पूरी जानकारी मांगी गई लेकिन पुलिस महकमे द्वारा यह पूरी जानकारी नहीं दी गई। आखिरकार गोयल द्वारा प्रथम अपीलेट अथोरिटी को अपील की गई। अपील करने के बाद पुलिस महकमे ने जो जवाब दिया उसमें साफ साफ लिखा है कि वेरिफिकेशन के लिए पुलिस द्वारा खुद आवेदक के घर जाकर आवेदक का नाम, पता, रिहायस व चाल चलन की तसदीक की जाती है। आवेदक जिस गांव या मोहल्ले का निवासी है, गवाही देने वाले उसी गांव या मोहल्ले के होने जरूरी हैं। गवाही देने वाले व्यक्ति को अपना आईडी प्रूफ देना जरूरी है। आवेदक के परिवार का सदस्य गवाही नहीं दे सकता जबकि पडौसी दे सकते हैं। दी गई जानकारी में यह भी साफ लिखा है कि वेरिफिकेशन के लिए गवाहों को थाने में बुलाना सही नहीं है। साथ ही यह भी लिखा गया है कि अलग अलग वेरिफिकेशन के लिए अलग अलग रैंक के अधिकारी सक्षम होते हैं। 

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