खग्रास सूर्य ग्रहण भाद्र पद सोमवती अमावस्या को 21 व 22 अगस्त की रात्रि 9:16 मिनट पर लग कर रात्रि 2:34 मिनट तक लगेगा। भारत में यह ग्रहण निष्प्रभाव होगा। यह ग्रहण पश्चिमी यूरोप, उत्तरी पूर्वी एशिया, उत्तर पश्चिमी अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, उत्तर पश्चिमी दक्षिणी अमेरिका, प्रशांत एवं एटलांटिक महासागर में विभिन्न रुपों में खग्रास एवं खंडग्रास ग्रस्तात में दिखाई देगा और 11:51 मिनट पर पूर्ण रुप लेगा। पूर्ण रुप से इस ग्रहण को सिर्फ उत्तरी अमेरिका में ही देखा जा सकेगा। बाकी क्षेत्रों में यह खंडग्रास रुप में नजर आएगा। उत्तर पश्चिमी यूरोप में यह खग्रास ग्रहण खंडग्रास ग्रस्तात रुप में ही दिखाई देगा। ब्रिटेन, दक्षिणी नार्वे, हालेंड, बेल्जियम, फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल में यह ग्रहण समाप्ति से पूर्व ही सूर्यास्त हो जाएगा। भारत में यह ग्रहण बिल्कुल नहीं दिखाई देगा। इसलिए सभी धर्म ग्रंथों के मुताबिक इस ग्रहण का कोई भी प्रभाव भारत देश में नहीं पड़ेगा। धर्म ग्रंथों में स्पष्ट लिखा हुआ है जिस देश में ग्रहण नजर नहीं आएगा, वहां उसका कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह थी सनातन धर्म प्रचारक प्रसिद्ध विद्वान पं. पूरन चंद्र जोशी की खग्रास सूर्य ग्रहण के प्रभाव को लेकर एक रिपोर्ट।

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