प्यारे के ठुमकों ने किया दर्शकों को घायल


ना पैसे की चाह, ना अभिनय को भविष्य बनाने की योजना. चाह है तो बस रामलीला में मिलने वाले अपने रोल में जान फूंक देने की। शायद यही वजह है कि प्यारे लाल घायल के रोल वाले दिन दर्शकों की संख्या दोगुना तक हो जाती है। उनके ताडक़ा व सुर्पनखा के रोल विख्यात हैं तथा उनके इस रोल के दौरान पंडाल में तिल रखने भर की जगह तक नहीं बचती। सोमवार की रात को सुर्पनखा नाईट में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। सुर्पनखा बने प्यारे ने भगवान श्री राम व लक्ष्मण को रिझाने के लिए लगाए अपने ठुमकों से दर्शकों को घायल कर डाला। मूल रूप से संदूक, पेटियां बनाने का काम करने वाले प्यारे लाल घायल अस्सी के दशक से लाला चेतराम सत्या रामलीला कमेटी के साथ जुड़े हुए हैं। रामलीला में वह सुमित्रा, अंगद, जटायू जैसे अलग अलग रोल करके आल राउंडर कलाकार के तौर पर तो जाने ही जाते हैं, लेकिन ताडक़ा, सुर्पनखा के अलावा केकई का उनका रोल देखने के लिए दर्शकों में कुछ अलग ही उत्साह नजर आता है।

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