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Tuesday, October 03, 2017

पांच बच्चों के बाप ने रिश्तेदार की 14-15 वर्षीय बेटी को अगवा कर किया देहशोषण

छह धाराओं में 15-15 वर्ष सजा, एक लाख अर्थदंड
 देहशोषण से पीडि़त किशोरी बच्चे की मां बनी 

श्रीगंगानगर

 अपने रिश्तेदार के यहां मेहमान बनकर आने-जाने वाले पांच बच्चों के पिता युवक ने रिश्तेदार की 14-15 वर्षीय किशेारी को बहला-फुसलाकर न केवल उसके घर में उसका देहशोषण करता रहा, बल्कि बाद में वह उसे अगवा कर ले गया। उसे महाराष्ट्र एवं गुजरात मेें बंधक बनाये रखकर उसका देहशोषण करता रहा। देहशोषण से यह किशोरी गर्भवती हो गई, जिसने बाद में बच्चे को जन्म दिया। गिरफ्तारी के बाद से न्यायिक हिरासत में इस आरोपित युवक को विशिष्ट न्यायालय (लंैगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण) के न्यायाधीश ने मंगलवार को आधा दर्जन धाराओं में 15-15 वर्ष की सजा सुनाई। उसे दो अन्य धाराओं मेें 5-5 वर्ष, एक अन्य धारा में सात वर्ष तथा एक और धारा में एक वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई। इन सभी धाराओं में कुल मिलाकर उसे एक लाख अर्थदंड लगाया है। इसमें से 90 हजार रुपये पीडि़ता को दिये जाने का आदेश दिया गया है।
यह बहुचर्चित मामला श्रीगंगानगर के ब्लॉक एरिया का है। ब्लॉक एरिया के ही एक स्कूल में आठवीं में पढऩे वाली किशोरी 16 जनवरी 2013 को स्कूल जाने के बाद गायब हो गई थी। बाद में पता चला कि इस किशोरी को उसका ही दूर का एक रिश्तेदार बहला-फुसलाकर कार में बिठाकर कहीं ले गया। किशोरी के घर वालों को उसके स्कूल की एक टीचर ने इसकी जानकारी दी। उस दिन यह किशोरी अपने स्कूल की ओर से गगनपथ पर स्थित एक निजी स्कूल के मैदान में टूर्नामेंट खेलने के लिए गई थी। यह पता चलने पर किशोरी के पिता ने अगले दिन यहां महिला थाना में अपने इस रिश्तेदार पर उसकी पुत्री को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का आरोप लगाते हुए धारा 363 व 366 में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने आरेापित युवक पूर्णमल खत्री पुत्र देबूराम खत्री जाति धोबी निवासी मलसीसर, जिला झुंझुनूंं और इस किशोरी की तलाश शुरू कर दी। पुलिस ने भरसक प्रयास किये, लेकिन इन दोनों का कुछ भी पता नहीं चल पाया। इस बीच किशोरी का पिता और उसके अन्य परिवार वाले यहां लगातार महिला थाना, डीएसपी शहर और पुलिस अधीक्षक के कार्यालयों में चक्कर काटते रहे। उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
ऐसे किशोरी को फांसा
प्रकरण के मुताबिक पूर्णमल की एक बहन श्रीगंगानगर के ब्लॉक एरिया में विवाहित है। उसकी बहन को उसका पति कथित रूप से तंग करता था। इस पर पूर्ण यहां एक-दो बार अपने बहनोई को समझाने-बुझाने के लिए आया। इस दौरान बहनोई ने उसे पास में ही उसे अपने भाई के घर ठहराया था। तत्पश्चात् पूर्ण यहां कईं-कईं दिन ठहरने लगा। बहनोई के भाई की बड़ी पुत्री को उसने अपने जाल में फंसा लिया, जो उसके कमरे मेें ही सोती थी। सात-आठ महीने बाद जब पूर्ण पकड़ा गया, तब उसने कबूल किया कि यह किशोरी उसकी तरफ आकर्षित हो गई थी। पहली बार उसने घर के बडे कमरे में ही उसके साथ शारीरिक सम्बंध बनाये, जबकि परिवार के सदस्य भी वहीं सोये हुए थे। यह किशोरी स्कूल जाने की बजाय घर ही रहती थी। इसलिए उसे आसानी से मौका मिल जाता था। पूर्ण की पत्नी संतोष ने दिसम्बर 2012 में बच्चे को जन्म दिया था। इसके बाद 9 जनवरी को जलवा पूजन की रस्म के बाद वह 13 जनवरी को यहां आया। अगले दिन किशोरी को भगा ले जाने की योजना बनाई। फिर वह 16 जनवरी को सुखाडिय़ा सर्किल से कार किराये पर कर अपने साथ लेकर गायब हो गया।
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
जिला पुलिस के अधिकारियों ने जब किशोरी के पिता की सुनवाई नहीं की, तो उसने 10 जून 2013 को जोधपुर हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दी। इस पर पुलिस हरकत में आई। हालांकि बाद में पता चला कि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक संतोष चालके ने किशोरी को दस्तयाब करने व मुल्जिम को पकडऩे के लिए एक उच्च स्तरीय पुलिस टीम का गठन कर दिया था। इस टीम मेें तत्कालीन एएसपी विनित कुमार, डीएसपी राजेन्द्र ढिढारिया, जवाहरनगर थानाप्रभारी अरविन्द बैरड़, सदर थानाप्रभारी अरविन्द बिश्रोई, पुरानी आबादी थानाप्रभारी देवेन्द्र सिंह और महिला थानाप्रभारी सवाईसिंह को शामिल किया। इस टीम ने मुल्जिम पूर्णमल के पुराने मोबाइल फोनों के ईएमआई नम्बर से उसे ट्रेस करनी की कोशिश की। फिर पता चला कि उसने नया नम्बर ले लिया है। इस नये मोबाइल का ईएमआई नम्बर हासिल किया गया, जिससे उसकी लोकेशन महाराष्ट्र में आई। इसके बाद पुलिस तलाश के लिए महाराष्ट्र पहुंची। कईं दिनों की भागदौड़ के बाद अहमदनगर जिले के गांव शेव में चार सितम्बर 2013 को पुलिस ने पूर्ण को उस समय दबोचा, जब वह किशोरी को वहां के एक धनवंतरी हॉस्पीटल में सोनोग्राफी के लिए लेकर गया हुआ था। किशोरी उस समय 28 सप्ताह से गर्भवती थी।
कईं शहरों में घुमाता रहा
श्रीगंगानगर लाये जाने पर किशोरी के मजिस्टे्रटी बयान कलमबद्ध करवाये गये। इसमें किशोरी ने बताया कि 16 जनवरी 2013 को पूर्ण उसे कोई नशीली चाय पिलाकर अपने साथ ले गया था। उसे बीकानेर में पहुंचने पर होश आया। इसके बाद वह उसे अहमदाबाद, फिर ओरंगाबाद ले गया। ओरंगाबाद के पास पेपरमील गांव में किराये का कमरा लेकर अपने साथ रखा। उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म करता रहा। उसे जान से मारने की धमकियां देता था। वह जब भी बाहर जाता था, कमरे को ताला लगा जाता था। पेपरमील से वह उसे पुणे, सूरत तथा इसके बाद शेव गांव में ले आया था। यहीं से उसे एक दिन मौका मिला और अपने पिता से मोबाइल पर दो-तीन सैकिंड की वह बात कर पाई। पूर्ण को इसका पता चला, तो वह काफी नाराज हुआ। पूर्ण उसे यहां से भी कहीं ओर ले जाने वाला था, लेकिन इससे पहले वह उसे सोनोग्राफी के लिए अस्पताल में ले गया। तभी पुलिस वहां आ गई। यहां लाये जाने के कुछ ही दिन बाद इस किशोरी ने बच्चे को जन्म दिया। फिलवक्त लगभग 19 वर्षीय यह युवती अपने बच्चे के साथ यहां मां-बाप के पास ही रह रही है।
कईं देशों मेें काम करने गया आरोपी
पांच बच्चों का पिता पूर्ण ने सबसे पहले चिनाई मिस्त्री के रूप में काम शुरू किया। फिर उसने मार्बल फिटिंग का काम मुम्बई में जाकर सीखा। उसके पिता विदेश में यही काम करते थे। पिता के प्रयासों से पूर्ण पहली बार 2002 में वर्क वीजा से मस्कट गया। इसके बाद उसका 2012 तक मस्कट, सलाला, ओमान, दुबई आदि अरब के कईं देशों में काम करने के सिलसिले में आना-जाना लगा रहा। जून 2012 में मस्कट जाने के कुछ ही दिन बाद उसके हाथ पर चोट लग गई, जिस पर उसे एक महीने में ही वापिस आना पड़ा। वह सीधे श्रीगंगानगर आया। यहां उसका बहनोई के भाई ने ही उसका इलाज करवाया। पूर्ण जब इस किशेारी को भगा ले गया था, तब वह 33 वर्ष का था। अब उसकी आयु करीब 37 वर्ष है। उसके पांच बच्चे हैं। विदेशों में रहने के कारण वह काफी ठाठ-बाठ से रहता था। वह काफी हैंंडसम भी है। अपने ठाठ-बाठ और शान-शौकत से ही उसने किशोरी को प्रभावित-आकर्षित कर लिया।
इन धाराओं में सुनाई गई सजा
विशिष्ट न्यायालय में विशेष लोक अभियोजक बनवारीलाल कड़ेला ने बताया कि इस प्रकरण में सुनवाई के दौरान अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 17 ग्वाह पेश किये गये। साथ ही साक्ष्य के रूप में 36 दस्तावेज प्रस्तुत किये गये। न्यायाधीश महेश पुनेठा ने मंगलवार को पूर्ण को दोषी करार दिया। उसे भादस की धारा 376(2)एन, 376 (2)आई, 376(एच) में 10-10 वर्ष, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पोक्सो एक्ट) की धारा 3/4 में सात वर्ष, धारा 5(6), धारा 5-एल/6    धारा 5-जे/6 में 15-15 वर्ष कठोर कारावास, भादस की धारा 363 व 366 मेें 5-5 वर्ष कठोर कारावास और धारा 344 में एक वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई। इन सभी 10 धाराओं में 10-10 हजार, यानि कुल एक लाख का अर्थदंड लगाया गया है। इसमें से 90 हजार रुपये पीडि़ता को दिये जाने के आदेश दिये गये हैं। बाकी दस हजार राजकोष में जमा होंगे। अगर अर्थदंड नहीं चुकाया, तो सभी धाराओं में एक-एक माह की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है। श्री कड़ेला के मुताबिक पूर्ण को सुनाई गई सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

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