महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने 70 वर्ष पुराने महात्‍मा गांधी हत्‍याकांड की सुनवाई फिर शुरू किये जाने के विरोध में उच्‍चतम न्‍यायालय में याचिका दायर की है। न्‍यायमूर्ति एस ए बोबड़े और न्‍यायमूर्ति एम एम शांतनागोदार की पीठ ने इस मामले में तुषार गांधी के अधिकार पर सवाल उठाया है। श्री तुषार गांधी की ओर से पेश वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता इंदिरा जयसिंह ने कहा है कि अगर न्‍यायालय नोटिस जारी करता है, तो वे उनका अधिकार स्‍पष्‍ट कर देंगी। सुश्री जयसिंह ने याचिकाकर्ता मुम्‍बई के शौधकर्ता और अभिनव भारत के ट्रस्‍टी पंकज फडणीस के अधिकार पर भी सवाल उठाया है, जिन्‍होंने फिर सुनवाई की याचिका दायर की थी। श्री फडणीस ने सुनवाई फिर शुरू करने के कई आधार बताए हैं और दावा किया है कि मामला दबाने की यह इतिहास की सबसे बड़ी घटना है। न्‍यायालय की पीठ ने कहा कि इस मामले में कई किन्‍तु परन्‍तु हैं और हम न्‍यायमित्र अमरेन्‍द्र शरण की रिपोर्ट का इंतजार करेंगे। न्‍यायमित्र अमरेन्‍द्र शरण ने चार सप्‍ताह का समय मांगा है, क्‍योंकि उन्‍हें अभी राष्‍ट्रीय अभिलेखागार से दस्‍तावेज प्राप्‍त होने हैं। पीठ ने मामले की सुनवाई चार सप्‍ताह बाद के लिए सूचीबद्ध की है। महात्‍मा गांधी को नई दिल्‍ली में 30 जनवरी 1948 को कट्टरवादी हिन्‍दू नाथूराम गोड़से ने गोली मार दी थी।

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