वेतन कटौती के विरुद्ध सिपाहियों ने किया मैस का बहिष्कार

श्रीगंगानगर

 
 राज्य सरकार द्वारा वेतन में कटौती किये जाने के खिलाफ पुलिस विभाग के सिपाही एकजुट होकर विरोध करने पर उतर आये हैं। सिपाहियों ने आज सोमवार से विरोध स्वरूप पुलिस थानों और पुलिस रिजर्व लाइन की मैस का बहिष्कार कर दिया। सिपाही न केवल वेतन कटौती किये जाने से नाराज हैं, बल्कि साप्ताहिक अवकाश सहित कुछ अन्य राहतें न दिये जाने से भी खासे खफा हैं। मैस बहिष्कार का गुप्त रूप से निर्णय कल रविवार को लिया गया, जो शाम होते-होते पूरे प्रदेश में फैल गया। सोमवार सुबह से इस पर अमल हो गया। समूचे प्रदेश के तरह श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिलों मेें पुलिस थानों, पुलिस चौकियों और रिजर्व पुलिस लाइन में मैस के चूल्हे तक नहीं जले। कईं मैसों के तो ताले ही नहीं खुले। मैस में खाना न बनने से पुलिस महकमे के अन्य रैंक के कर्मचारी भी भोजन सुविधा नहीं ले पाये। विरोध स्वरूप पुलिसकर्मियों ने आज काली पट्टियां बांधकर रोजाना की तरह अपनी ड्यूटी की। खाकी वर्दी पर लगाई गई यह काली पट्टियंा चर्चा का विषय बन गई हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार सिपाहियों के इस आंदोलन में दूसरे रैंक के कर्मियों की भी पूरी सहानुभूति ही नहीं, बल्कि उनका समर्थन भी प्राप्त है। इस कारण वे भी अघोषित रूप से मैस का बहिष्कार किये हुए हैं। 


सोमवार को पुलिसकर्मियों ने खाना-नाश्ता आदि या तो अपने घर से मंगवाया या फिर होटलों अथवा अपने परिचितों के यहां से। सिपाहियों ने अनिश्चितकाल के लिए मैस के बहिष्कार का निर्णय किया है। जानकारी के मुताबिक देर शाम को सिपाहियों के इस आंदोलन को देखते हुए जयपुर में पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों मेें हलचल देखी गई। इस बहिष्कार को समाप्त करवाने के लिए विभाग के उच्चाधिकारी अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से अभी कोई पहल नहीं की गई है। गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के लिए अलवर गये हुए हैं। उनके देर रात को जयपुर वापिस आने पर सिपाहियों की मांगों पर गौर किये जाने की संभावना है।

सोशल मीडिया पर लगी होड़

पुलिस महकमे के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार रविवार दोपहर को जैसे ही सोशल मीडिया पर सिपाहियों द्वारा सोमवार से मैस का बहिष्कार किये जाने का पता चला, पुलिस मुख्यालय स्तर पर इसे लेकर हलचल मच गई। मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को मौखिक रूप से निर्देश दिये कि यह बहिष्कार नहीं होना चाहिए। इसे किसी भी तरह से रोका जाये। सिपाहियों के इस कदम को रोकने के लिए अधिकारियों ने एक हथकंडा भी आजमाया, लेकिन वह काम नहीं आया। इन्हीं सूत्रों के अनुसार मुख्यालय से जिला पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिये गये थे कि सोशल मीडिया पर जो भी पुलिसकर्मी मैस बहिष्कार का मैसेज पोस्ट कर रहा है, उस पर आईटी एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज किये जायें। श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिलों में सोमवार देर रात समाचार लिखे जाने तक ऐसा कोई मामला दर्ज किये जाने की जानकारी नहीं मिली थी। अलबत्ता इसके विपरीत सोमवार सुबह से ही सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों, विशेषकर सिपाहियों की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों में यह पुलिसकर्मी काली पट्टियां बांधे हुए मैस के सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह तस्वीरें सोशल मीडिया में अपलोड करने वाले पुलिसकर्मी ही हैं। लिहाजा आईटी एक्ट के मुकदमे दर्ज करने का निर्देश कोई असर नहीं दिखा पाया।

सिपाहियों की यह हैं मांगें

वेतन में की जा रही कटौती वापिस लेने, हार्ड ड्यूटी भत्ता 12 भाग के स्थान पर 50 प्रतिशत करने, मैस भत्ता 400 रुपये प्रतिमाह करने, सातवां वेतन आयोग एक जनवरी 2016 से दिये जाने, कांस्टेबल को तृतीय श्रेणी व हैड कांस्टेबल को द्वितीय श्रेणी का कर्मचारी माना जाने, पुलिस कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश देने, पुलिस कांस्टेबल पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं/बीए किये जाने की मांग को लेकर मैस का बहिष्कार किया गया है। आंदोलनरत पुलिसकर्मियों के अनुसार जब तक सरकार यह मांगें स्वीकार नहीं करतीं, मैस का बहिष्कार जारी रहेगा और वे काली पट्टियां लगाकर अपनी ड्यूटी करते रहेंगे।

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