गिरफ्तार कैशियर पुलिस रिमांड पर, रकम बरामदगी के प्रयास

श्रीगंगानगर

 भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में 1.33 करोड़ का गबन करने वाले कैशियर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट में पेश करने पर पुलिस को उसका रकम की बरामदगी के लिए रिमांड मिला है। गबन का यह मामला लगभग दो महीने पहले बीकानेर जिले में नोखा कस्बे में भारतीय स्टेट बैंक की पीपल चौक शाखा मेें उजागर हुआ था, जब शाखा प्रबंधक ने कैशियर लोकेश मेघवाल पर मुकदमा दर्ज करवाया। नोखा थानाप्रभारी मनोज शर्मा ने शनिवार को बताया कि अपने खिलाफ यह मुकदमा दर्ज होने से पहले ही लोकेश मेघवाल फरार हो गया था। केस दर्ज होने के बाद से ही उसकी तलाश की जा रही थी।


इस दौरान गिरफ्तारी से बचने के लिए लोकेश ने जिला सैशन कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी भी लगाई, जिसे सुनवाई के बाद खारिज कर दिया गया था। इसके बाद लोकेश हाईकोर्ट की शरण में जाने के प्रयास में था। इससे पहले ही पुलिस ने उसे दबोच लिया। थानाप्रभारी ने बताया कि लोकेश का परिवार मूल रूप से हरियाणा में फतेहबाद का निवासी है। फतेहबाद में उसके पिता एक अन्य बैंक में शाखा प्रबंधक है। इसके अलावा लोकेश का परिवार इन दिनों हनुमानगढ़ में रह रहा है। विवाहित लोकेश भारतीय स्टेट बैंक में 9-10 वर्ष से पदस्थापित है। नोखा में पीपल चौक शाखा में वह कुछ ही अरसा पहले तैनात हुआ था। उसने इसी वर्ष मई-जून-जुलाई माह में एक करोड़ 33 लाख की राशि का गबन कर डाला। लगभग दो महीने पहले बैंक की आंतरिक जांच में पकड़ में आया था कि 62 लाख का गबन हुआ है। जिस दिन गबन की यह बात सामने आई, उसी दिन ही लोकेश गायब हो गया। बाद में बैंक के अधिकारियों ने विस्तृत जांच करवाई तो कुल गबन की राशि एक करोड़ 33 लाख पाई गई। तब शाखा प्रबंधक की ओर से मुकदमा दर्ज करवाया गया था।

इस तरह किया गबन

थानाप्रभारी मनोज शर्मा ने बताया कि कैशियर होने के कारण लोकेश की ड्यूटी थी कि वह बैंक शाखा भवन में लगी एटीएम में कैश वही डालेगा। इसी बैंक में एटीएम में कैश जमा करने की भी सुविधा थी। जमा हुए कैश को निकालने का काम भी उसी का ही था। लोकेश दोनों तरफ से गड़बड़ कर रहा था। वह जब एटीएम में कैश भरने जाता था, तो उसमें से कुछ राशि अपने पास रख लेता था। रिकॉर्ड में वह पूरी रकम एटीएम में डाल देने की एंट्री कर देता था। दूसरी तरफ वह जो लोग इस एटीएम मशीन के जरिये अपने खातों में रकम जमा करवा जाते थे, वह रकम निकालने के बाद उसमें से भी वह कुछ राशि अपने पास रख लेता था। बाकी बैंक में जमा करवाते हुए उन लोगों के खातों में पूरी एंट्री कर देता था, जिन्होंने राशि जमा करवाई होती थी। इस तरह वह दोनों तरफ से ही बैंक में गबन करने में लगा हुआ था। उसका यह गबन तब पकड़ में आया, जब एटीएम में भरी गई राशि और उसमें लोगों द्वारा जमा करवाई गई राशि के रिकॉर्ड का मिलान किया गया।

जुए-सट्टे की लत्त

थानाप्रभारी ने बताया कि अभी लोकेश मेघवाल ने गबन की हुई राशि को बरामद नहीं करवाया है, लेकिन अभी तक की पूछताछ मेें पता चला है कि उसे जुए-सट्टे तथा इस तरह की दूसरी गलत आदतें लग गई थीं। इनमें पडक़र वह बुरी तरह से फंस गया। जुए-सट्टे पर ही पैसा लगाते जाने से वह आर्थिक रूप से तंग हो गया। तब वह बैंक के कैश में ही हाथ मारने लगा, जबकि उसे कैशियर जैसे जिम्मेवार पद की नौकरी मिली हुई थी।

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