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Tuesday, November 28, 2017

'ओलंपिया' का किरदार निभाना अब तक का सबसे अनोखा अनुभव : समीक्षा सिंह


ऐतिहासिक शो बनाने के लिए प्रसिद्ध स्वास्तिक प्रोडक्शन के फाउंडर निर्माता-निर्देशक सिद्धार्थ कुमार तिवारी बहुचर्चित शो 'महाभारत' की अपार सफलता के बाद महान योद्धा पोरस व सिकंदर की गाथा और दस्यु सामाज्य की दास्तां को छोटे पर्दे पर शो 'पोरस' के रुप में लाए हैं। ये शो 350 ईसापूर्व के महान योद्धा पोरस व सिकंदर की कहानी है। शो में 'सिकंदर' की मां महारानी ओलंपिया का किरदार निभा रही अदाकारा समीक्षा सिंह। इस किरदार को निभा उत्साहित नजर आ रही अदाकारा समीक्षा से बातचीत के कुछ अंश :-

 'ओलंपिया' के किरदार के बारे में बताएं? 

- इस शो में मैं फिलिप की पत्नी 'ओलंपिया' का किरदार निभा रही हूं। यह किरदार निभाना मेरे लिए काफी चैलेंजिंग व अब तक का सबसे अनोखा अनुभव रहा। शो में दिखाया गया है कि 350 ईसापूर्व में ग्रीक में कैसे महिलाएं सिर्फ उपहार की वस्तु ही थीं। महिलाओं का खुद का कोई वजूद नहीं था बल्कि उन्हें खरीदा या जीता ही जाता था। मगर ओलंपिया ऐसा किरदार है जो इस पुरुष प्रधान समाज की दबंगई का विरोध करती है। उसे आग व सांपों से खेलने का महारथ हासिल है।

 'ओलंपिया' के किरदार को खुद में ढालने के लिए क्या तैयारी की?

 - मैंने खुद को ओलंपिया के किरदार में ढालने के लिए ओलंपिया की हिस्ट्री सर्च की। हालांकि यह बहुत पुराना किरदार है। इसलिए इसके बारे में कुछ ज्यादा सर्च करके भी सामने न आ पाया। मगर फिर भी मुझे जहां-तहां से इस किरदार के बारे में जानकारी मिल सकती थी। मैंने वो जानकारी जुटा खुद को इसमें ढालने की पूरी कोशिश की है। 'पोरस' शो करने का कैसा अनुभव रहा? - ये शो करने का अनुभव बेहद ही रोमांच भरा रहा। मैंने इससे पहले कभी भी ऐसा शो नहीं किया था। 'ओलंपिया' का किरदार निभा कुछ नया करने का अनुभव हो रहा है। मैंने अब खुद को इस किरदार में ढाल लिया है।

शो के शूट दौरान का कोई यादगार पल? 

- शूट दौरान का हर पल ही यादगार रहा है। जितना रोमांच व इंज्वाय इस शो के शूट दौरान किया, उतना आज से पहले कभी नहीं किया था। ये शो 350 ईसापूर्व के महान योद्धा पोरस व सिकंदर की कहानी है। उन दिनों भारत दुनिया के सबसे अमीर देशों में एक हुआ करता था। भारत को सोने की चिडिय़ा कहा जाता था, जिससे दुनिया जलती थी। 'पोरस' उसी गौरवशाली दौर व समय की कहानी है। शो में उस समय का माहौल बनाने के लिए टीम ने काफी मेहनत की है। जहां इतने वर्ष पुराने योद्धाओं के वस्त्रों व आभूषणों को उस दौर के अनुरूप दिखाने की कोशिश की गई है, वहीं कई महीने थाईलेंड के अंडर वाटर क्षेत्र में सीन शूट किए गए। जहां शो की टीम का बाहरी दुनिया से मोबाइल नेटवर्क संपर्क तक टूटा रहा। इस दौरान थाइलेंड के समुद्र के बीचो-बीच सैट लगाया गया था। जहां पर कलाकारों व टीम क्रू को जाने के लिए बोटिंग के जरिए ही करीब दो घंटे लगते थे। यहां शूट का अनुभव सभी कलाकारों के लिए रोमांच भरा एवं डरावना भी रहा।

 आने वाले फिल्म प्रोजेक्टों के बारे में भी बताएं?

 - हिंदी फिल्म 'प्रणाम' की शूटिंग मुकम्मल हो चुकी है। यह फिल्म शीघ्र ही रिलीज होगी। इस फिल्म में मैंने मंजरी का किरदार निभाया है। फिल्म में मेरे आपोजिट अभिनेता राजीव खंडेलवाल हैं। यह फिल्म विद्यार्थी वर्ग पर राजनीति के मुद्दे से जुड़ी है।

 किसी नए पंजाबी फिल्म प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है? 

- कई पंजाबी फिल्मों की आफर आईं हैं। मगर मुझे किरदार पसंद नहीं आ रहे। मैं फिल्मों में चयन के मामले में बेहद संजीदा हूं। मेरा मानना है कि फिल्में कम करो, मगर अच्छे किरदार वाली करो। मैं फिल्मों की भीड़ में शामिल होने की बजाए चुनिंदा व अच्छे विषय वाली फिल्में करने को ही तरजीह दे रही हूं। यही वजह है कि मेरी फिल्में भी काफी अंतराल के बीच आ रही हैं। मैं महज कॉमेडी व मनोरंजन भरपूर फिल्मों का हिस्सा नहीं बनना चाहती। इसलिए सोच-समझकर ही फिल्में साइन कर रही हूं। जिस किरदार को निभा मजा ही न आए, मैं वैसे किरदार नहीं करती।

 पॉलीवुड में कैसे विषय की फिल्म में अभिनय करना चाहती हैं?

 - मैं रीयल लाइफ से जुड़े किरदार निभाना चाहती हूं। ऐसे किरदार जिसे निभाने के बाद दर्शक उस किरदार को हमेशा अपने जेहन में याद रखें। मेरी तमन्ना अमृता प्रीतम के जीवन पर बायोपिक में अभिनय करने की है। अगर मुझे किसी फिल्म में अमृता प्रीतम जी के जीवन से जुड़ा किरदार निभाने का मौका मिलेगा तो मेरी खुशकिस्मती होगी। इसके अलावा किसी महिला प्रधान फिल्म में काम करने का मौका मिला तो जरुर करना चाहूंगी। मेरा मानना है कि आज पंजाबी सभ्याचारक विषय पर अच्छी फिल्में बन रही हैं और आगे भी बन सकती हैं। मुझे भी किसी फिल्म में अगर ऐसे ही पंजाब व पंजाबियत से जुड़े किरदार निभाने का मौका मिलता है तो पहल के आधार पर वह फिल्म करूंगी।

 आपको इस फील्ड में कितना पारिवारिक स्पोर्ट मिला? - क्योंकि अक्सर लड़कियों के इस फील्ड में आने पर परिवार के सदस्य एतराज उठाते हैं। 

- शुरु में मेरे पारिवारिक सदस्यों द्वारा भी फिल्मों में आने पर एतराज जताया गया था। हर मां-बाप के मन में फिल्म इंडस्ट्री को लेकर यह डर होता है कि यह इंडस्ट्री लड़कियों के लिए सेफ नहीं है। फिल्म इंडस्ट्री बारे उन्हें कुछ पता नहीं था। एक बार मैं अपनी साउथ फिल्म की शूटिंग के सैट पर अपनी मां को साथ लेकर पहुंची थी। उस समय वहां मेरी मां ने देखा कि किस तरह फिल्म टीम का हर सदस्य मुझे सम्मान दे रहा है तो धीरे-धीरे उनका नजरिया बदलता गया। अब वह मेरे फिल्मों में काम करने के फैसले से खुश हैं। 

 आपने फिल्म जगत को ही करिअर बनाने के लिए क्यों चुना?

 - मैंने शुरुआत में तो कभी फिल्म लाइन से जुडऩे का ख्वाब तक न देखा था। मैं तो इंजीनियरिंग कर रही थी। मगर इस दौरान फ्रेंड्स द्वारा मॉडलिंग और एक्टिंग के लिए प्रेरित करने के चलते इस ओर आने के बारे में सोचने लगी। इस तरह मॉडलिंग शुरु कर दी। इसके बाद फिल्मों के आफर भी आने लगे। अब पूरा ध्यान फिल्म इंडस्ट्री पर ही टिका हुआ है। 

कभी सोचा है अगर आप अदाकारा न होती तो क्या होती ? 

- योग ट्रेनर होती या इंजीनियरिंग लाइन में ही कार्य कर रही होती। मेरी रुचि योग में भी है। योग शारीरिक फिटनेस के लिए बेहतर उपाय है। अगर में अभिनेत्री न होती तो शायद योग फिटनेस सेंटर चला रही होती। -

 जगदीश जोशी

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