श्री मुक्तसर साहिब, कांग्रेस सरकार की मुलाजिम मारू नीतियों के खिलाफ आज प्रदेश भर के अध्यापकों द्वारा रोष प्रदर्शन किया गया। इसी के अंतर्गत श्री मुक्तसर साहिब में भी सांझा अध्यापक मोर्चों द्वारा शहर में रोष मार्च निकालने के बाद कोटकपूरा चौंक में सरकार का पुतला फूंक प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर अध्यापकों ने सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन कर अपनी भड़ास निकाली। यदि सरकार ने उनकी मांगों की तरफ ध्यान न दिया तो वह इस संघर्ष को ओर तेज करने के लिए मजबूर होंगे। सांझा अध्यापक मोर्चा पंजाब के आह्वान पर जिले भर के समूह ठेका आधारित अध्यापकों, मुलाजिमों और दफ्तरी कर्मचारियों द्वारा राज्य सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ स्थानीय शहर में रोष मार्च करने के बाद स्थानीय कोटकपूरा चौंक में पुतला फूंक प्रदर्शन किया गया। इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की तरफ ध्यान न दिया तो इस संघर्ष को ओर तेज किया जाएगा। इस अवसर पर बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा विभाग में डी.जी.एस.ई. पंजाब के अधीन अलग -अलग सोसायटियों में पिछले 10 -12 सालों से सेवाएं निभा रहे कर्मचारी जिन में पिकटस अधीन साल 2011 से रेगुलर तौर पर सेवाओं निभा रहे 7000 कंप्यूटर अध्यापक, ससअ /रमसा /माडल स्कूल /आदर्श स्कूल /आई.ई.आर.टी. /एम.डी.एम. सोसायटियों अधीन 10 सालों से ठेके पर लगातार सेवाओं निभा रहे करीब 15000 अध्यापक/कर्मचारी काम कर रहे हैं। नेताओं ने कहा कि कंप्यूटर अध्यापक जो कि 2005 में ठेके पर भरती हुए थे ने पहले 6 साल ठेके पर बहुत थोड़ी तनख्वाह पर काम किया और जुलाई 2011 में अकाली भाजपा सरकार ने पिकटस में वोकेशनल मास्टर का ग्रेड देकर रेगुलर किया था। राज्यपाल पंजाब की मंज़ूरी के साथ किए गए नोटिफिकेशन में लिखा गया कि कंप्यूटर अध्यापकों और पंजाब सिविल सेवाओं के नियम लागू होंगे परन्तु सरकार की तरफ से प्राथमिक वेतन स्केल 10300 और भर्ती करना मन्दभागी बात है। एस.एस.ए/रमसा अधीन ठेके पर 10 सालों से काम कर रहे अध्यापक जो कि 42000 वेतन ले रहे हैं उनको शिक्षा विभाग के नाम पर जबरन 3 साल के लिए 10300 लेने के लिए कहा जा रहा है। सरकार यही नियम एस.एस.ए अधीन काम करते दफ्तरी कर्मचारियों पर थोपने जा रही है। अध्यापक नेताओं ने मांग की कि सरकार पूरी वेतन और भत्तों के साथ अध्यापकों को शिक्षा विभाग में मर्ज करें, मतदान समय किया अपना वायदा पूरा करे, अध्यापकों की रेगुलर भरती की जाए, 5178 अध्यापकों की मांगें पूरी की जाए, सात सालों बाद बदली की नीति और रैशनेलाईजेशन की नीति को तुरंत रद्द करे। इस अवसर पर हरजीत सिंह, प्रदीप कुमार बेरी, कुलविन्दर सिंह मलोट, लखवीर सिंह हरीके, सुखदर्शन जग्गा, अमृतपाल कौर, दलजिन्दर सिंह, कुलविन्दर सिंह रमसा, गुरनैब सिंह, चरण दास, पवन कुमार, अमर सिंह व नरिंदर खिच्ची आदि मौजूद थे।


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