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Friday, April 13, 2018

क्या है कठुआ अपहरण, रेप और मर्डर मामला, जानिए

जम्मू: जम्मू के कठुआ ज़िले में एक 8 साल की बच्ची के अपहरण, रेप और हत्या की घटना के हिंदू-मुस्लिम रंग लेने के बाद देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में ये वारदात सुर्खियां में है. हिंदू-मुस्लिम आधार पर कठुआ में वकीलों के जरिए क्राइम ब्रांच को चार्जशीट फाइल से रोकने की हरकत की हर तरफ निंदा हो रही है. अब सूबे की सीएम महबूबा मुफ्ती ने एलान किया है कि इंसाफ में किसी तरह की रुकावट बर्शात नहीं की जाएगी. उनका कहना है कि इस मामले में इंसाफ होगा. पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार के एक पूर्व अधिकारी समेत सात अन्य लोगों को आरोपी बनाया है.



बकरवाल मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाली पीड़िता 10 जनवरी को यहां से 90 किलोमीटर दूर कठुआ के रासना गांव के पास के जंगलों में बने अपने घर से गायब हो गई थी। एक सप्ताह बाद उसका शव पास के इलाके से मिला था और मेडिकल जांच में सामूहिक दुष्कर्म का पता चला था। शुरूआती जांच में पुलिस ने एक नाबालिग को पकड़ा था। बाद में मामला जम्मू कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा को सौंपा गया था। 9 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने केस के आठ आरोपियों के खिलाफ 18 पन्नों का चार्जशीट दाखिल किया। इस दौरान वकीलों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान झड़पें हुई। चार्जशीट की मानें तो आरोपियों की बर्बरता हैरान करने वाली है। चार्जशीट के मुताबिक, एक नाबालिग आरोपी ने एक अन्य आरोपी विशाल जंगोत्रा को लड़की के अपहरण के बारे में जानकारी दी और उसे कहा कि अगर वह हवस बुझाना चाहता है तो मेरठ से जल्दी आ जाए। विशाल जंगोत्रा कठुआ के रासना गांव पहुंचा। उसके बाद आरोपी मंदिर गया जहां भूखे पेट बंधक लड़की को नशे की टेबलेट दिए गए। उसका कई बार रेप किया गया। उसके बाद एक आरोपी ने कहा कि अब बच्ची की हत्या कर शव को छुपाना है तो इस सामूहिक दुष्कर्म की जांच में शामिल एक पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया ने आरोपियों से कहा कि वह थोड़ा इंतजार करे, वह भी हवस मिटाना चाहता है। फिर आठ वर्षीय लड़की का सामूहिक बलात्कार किया गया। उसकी पत्थरों से वार कर और गला घोंटकर हत्या कर दी गई। 15 जनवरी को शव को जंगल में फेंक दिया। चार्जशीट के मुताबिक पुलिस ने केस से बचाने के लिए रेप का आरोपी नाबालिग की मां से डेढ़ लाख रुपये घूस ली। चार्जशीट के मुताबिक, लड़की के पिता ने 12 जनवरी को हीरानगर थाने में केस दर्ज कराया था। उनकी शिकायत के मुताबिक, 10 जनवरी को लगभग 12:30 बजे के आसपास उनकी बेटी जंगल में घोड़ा के लिए चारा लेने गई थी। जिसके बाद वह नहीं लौटी। उनकी शिकायत के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। उसके बाद जनता के आक्रोश को देखते हुए जांच स्थानीय पुलिस से लेकर अपराध शाखा को सौंपी गई। विधानसभा में भी खूब हंगामा हुआ। लोगों ने झंडे लेकर आरोपियों के पक्ष में प्रदर्शन किया। तब जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा था, "कठुआ में हाल में पकड़े गए दुष्कर्मी के बचाव में प्रदर्शन और मार्च से स्तब्ध हूं।" अपराध शाखा के मुताबिक आसिफा के साथ दुष्कर्म और हत्या मामले में हेड कांस्टेबल तिलक राज और सब-इंस्पेक्टर आनंद दत्ता को भी गिरफ्तार किया गया। दत्ता पहले इस मामले के जांच अधिकारी थे। सूत्रों ने कहा कि जांचकर्ता पुलिसकर्मी ने महत्वपूर्ण सबूतों को क्षतिग्रस्त कर दिया है। सूत्रों ने कहा था कि पीड़िता द्वारा पहने गए कपड़े को अपराध शाखा को सुपुर्द करने से पहले धोया गया था। कठुआ जिले के हीरानगर के रसाना गांव में आठ साल की बच्ची की हत्या करने से पहले उससे सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। नीचता की हद तो तब हो गई जब स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजूरिया ने बालिका की हत्या से पहले एक बार फिर दुष्कर्म करने की इच्छा जताई। सोमवार को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पुलिस द्वारा दाखिल 15 पेज के आरोप पत्र में यह बात कही गई है। बक्करवाल परिवार की बालिका रसाना के जंगल में 10 जनवरी को लापता हुई थी और उसका शव 17 जनवरी को बरामद हुआ था। इस मामले में गिरफ्तार आठ लोगों में एक नाबालिग भी है। आरोपपत्र के अनुसार बक्करवाल समुदाय को अपनी जमीन से हटाने के मकसद से सांझी राम ने बालिका के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या की साजिश रची थी। लड़की को रसाना गांव में देवस्थान पर रखा गया था। पुलिस का एसपीओ दीपक खजूरिया, सुरेंद्र वर्मा, उसका दोस्त प्रवेश कुमार, सांझी राम का नाबालिग भतीजा व बेटा विशाल जंगोत्रा शामिल थे। आरोप पत्र में जांच अधिकारी सहायक सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता व कांस्टेबल तिलक राज का भी नाम है। उन पर कथित रूप से चार लाख रुपए लेकर महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट करने का आरोप है।