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संतों की संगत, निमर्ता व सेवा भावना का मार्ग है - भगत शम्मी चावला



श्री मुक्तसर साहिब 29 जून ( ) कल देर रात तक डेरा संत
बाबा बग्गू भगत, सांझा दरबार, संत मंदिर में हुए सतिसंग
दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालूओं ने आनंद लिया। पिछले
करीब पैंतीस वर्षों से मानवता को सचाई के मार्ग पर चलने
की प्रेरना देने वाले डेरा गद्दी नशीन परम पूजनीय भगत
शम्मी चावला जी महाराज उर्फ बाऊ जी ने अपने मुखारबिंद
से प्रवचनों की अमृत वर्षा की। बाऊ जी ने इस समय फरमाया
कि निमर्ता और सेवा भावना एक भगवान का दिया हुआ गुण
है जो बहुत कम लोगों को मिलता है। ऐसे मनुष्य अच्छी
तकदीर वाले होते हैं। ऐसे लोग परमात्मा की हर रज़ा
में राज़ी रहते हैं। सुख मिले अथवा दुखों की आँधी आए कभी
किसी को दोषी नहीं मानते। दुख के समय अरदास और सुख के
समय शुकराना करते हैं। बाऊ जी ने आगे फरमाया कि
संत महां पुरषों व अच्छी सोच वाले मनुष्यों की सतिसंग से
निमर्ता एवं सेवा भावना पैदा होती है। ऐसे महां पुरषों
की संगत ही अच्छे गुणों का मार्ग होती है। जो व्यक्ति
हऊमे और अहंकार का शिकार होते है, उनको न
तो मन की शान्ति मिलती है और न ही सारीरिक अथवा
स्ंसारिक सुख। बाऊ जी ने हर मनुष्य को सेवा व निमर्ता का
विवहार अपनाने की प्रेरना दी। जानकारी देते हुए
डेरा कमेटी के चीफ आरगेनाइजर जगदीश राय
ढोसीवाल ने बताया है कि सबसे पहले ब्रहम लीन संत बाबा
बग्गू भगत जी की पवित्र मूर्ति की चरन वंदना करके आर्शिवाद
लिया। सतिसंग के अंत में बाऊ जी द्वारा सबके भले और सुख

शान्ति के लिए अरदास की गई। सतिसंग उप्रांत संगतों के लिए
त्यार किया गया भंडारा (लंगर) अतुट वितरित किया गया
जिस में बाऊ जी की प्रेरना से डेरा श्रद्धालू सोनू
भटेजा, रवी मोटरों वाला, राजू मिढा, मोहन लाल
खुंगर, रिन्कू धींगड़ा, पवन तनेजा, लाडी कटारिया
और हैपी झांब समेत अन्य सेवादारों ने प्रेम व श्रद्धा
भावना से लंगर की सेवा निभाई।