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पोल्ट्री फार्मों से नहीं आएगी बदबू



मक्खियों की समस्या से भी मिलेगा छुटकारा

चंडीगढ़, 8 जुलाई

पिछले दो दशकों में बड़े स्तर पर उद्यौगीकरण और आबादी बढऩे से माँग पूरी करने के लिए पोल्ट्री और ब्रॉयलर फार्म काफ़ी संख्या में अस्तित्व में आए। इससे कई तरह की समस्याएँ भी खड़ी हुई हैं, जिसमें मक्खियाँ और बदबू की समस्या मुख्य है परन्तु अब ये समस्याएँ बीते दिन की बात हो जाएंगी क्योंकि प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने तंदुरुस्त पंजाब मिशन के अंतर्गत बड़ी पहलकदमी की है।

जि़क्रयोग्य है कि 80 के दशक में मुर्गों की खाद इक_ी करने के लिए चावलों की फक्क बिछाई जाती थी और इसको तीन से चार महीनों बाद हटाया जाता था। इस विधि से जहाँ ज़्यादा समय लगता था, वहीं दुर्गंध और मक्खियाँ बहुत पैदा होती थीं। अब पंजाब और साथ लगते राज्यों में पोल्ट्री फार्मों में नई विधि अपनाई जा रही है, जिसके अंतर्गत शैड्डों में पक्षियों के लिए दोहरे पिंजरे बनाऐ जा रहे हैं। शैड्डों को भी धरती से चार से छह फुट ऊँचा बनाया जाता है। इन पिंजरों के नीचे स्लैब बिछाईं जातीं हैं, जिनसे पक्षियों की खाद आसानी से साफ़ की जाती है। पहले इस खाद से मेकेपटन, हाईड्रोजन सल्फाईड, थीओफेनोल और अमोनिया जैसी गैसें पैदा होती थीं। इस खाद को ज़्यादा समय तक रखने के कारण इस पर मक्खियाँ भी बड़ी संख्या में पैदा होती हैं। पोल्ट्री फार्मों के पास के रिहायशी इलाकों के बाशिंदे अक्सर यह समस्या उठाते हैं कि फार्मों से बदबू और मक्खियाँ बड़ी संख्या में पैदा होती हैं। कई स्थान पर गाँवों के लोगों ने धरने भी दिए।

क्षेत्रीय कार्यालय पटियाला के वातावरण इंजीनियर एस.एस. मठाड़ू ने कहा कि अब इस समस्या के ख़ात्मे के लिए खाद को बाकायदा साफ़ करने के लिए पहलकदमी की गई है। ज़्यादातर पोल्ट्री फार्मों ने अब रोज़मर्रा की पक्षियों की खाद इक_ी करने या एक दो दिनों के बाद साफ़ करने की तकनीक विकसित की है। जिससे बदबू और मक्खियों की समस्या से काफ़ी हद तक निजात मिली है।