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Monday, November 12, 2018

‘अकाली अकाओं द्वारा लिया गया फ़ैसला राजनैतिक हितों से प्रेरित’

पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा सिख हिस्ट्री रिसोर्स ऐडीटिंग प्रोजैक्ट के चेयरमैन के पद से डा. कृपाल सिंह को हटाने के एस.जी.पी.सी के फ़ैसले की आलोचना


चंडीगढ़

          पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने 12वीं कक्षा की इतिहास की पुस्तकों में कथित तौर पर गलतियों के विवाद के बीच में ही सिख स्कॉलर और प्रसिद्ध इतिहासकार डा. कृपाल सिंह को सिख हिस्ट्री रिसोर्स ऐडीटिंग प्रोजैक्ट के चेयरमैन के पद से हटाने के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एस.जी.पी.सी) के फ़ैसले की तीखी आलोचना की है।



          कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने इस फ़ैसले की निंदा करते हुए कहा कि यह स्पष्ट तौर पर एस.जी.पी सी द्वारा अपने अकाली आकाओं की तरफ से किया है।

          मुख्यमंत्री ने इस फ़ैसले के समय पर भी उंगली उठाई है और कहा है कि यह फ़ैसला राजनैतिक हितों से प्रेरित है जो एस.जी.पी.सी पर नियंत्रण करते हुए अकालियों की तरफ़ से लिया गया है। उन्होंने कहा कि अकालियों ने अपने अंदरूनी संकट से लोगों का ध्यान एक तरफ़ करने के लिए यह संकुचित राजनैतिक खेल खेला है जबकि बेअदबी जैसे अन्य गंभीर मुद्दे सामने पड़े हैं। जस्टिस (सेवामुक्त) रणजीत सिंह आयोग इन मामलों में अकालियों की भागीदारी को सामने लाया है।

          कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड के इतिहास के सिलेबस को तोडऩे-मरोडऩे से एस.जी.पी.सी को कोई चिंता नहीं है जिसके दो मैंबर सिलेबस का जायज़ा लेने के लिए गठित की गई कमेटी में शामिल हैं और यह कमेटी की मीटिंगों में हिस्सा ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रसिद्ध सिख इतिहासकार और विद्वान डा. कृपाल सिंह के नेतृत्व में यह कमेटी सिलेबस के मुद्दे को देखने के लिए बनाई गई है इसलिए एस.जी.पी.सी का फ़ैसला उचित नहीं है।

          मुख्यमंत्री ने राजनैतिक उद्देश्यों में लिप्त होने के लिए बादलों की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अकाली अपने राजनैतिक एजंडे को आगे रख कर राज्य में सांप्रदायिक बेचैनी पैदा कर रहे हैं जिसे न केवल सूबे के लोगों ने रद्द किया है बल्कि उनकी पार्टी के सीनियर नेताओं ने भी उनको नकार दिया है।

          इतिहास के सिलेबस के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सम्बन्ध में सिफऱ् अकाली ही जि़म्मेदार हैं और स्कूल के इतिहास की पुस्तकों में यह गलतियाँ उनके अपने शासन के दौरान 2014 में हुई थी जब बी.जे.पी के नेतृत्व वाली एन.डी.ए सराकर के मानव संसाधन मंत्रालय ने ‘राष्ट्रवादी ’ पहुँच के नाम पर समाज विज्ञान के विषयों के सिलेबस को ‘तर्कसंगत ’ बनाने के लिए पहले कदम उठाये थे।

          इसके बाद एच.आर.डी मंत्रालय ने इस मकसद के लिए सिलेबस कमेटी गठित करने के लिए एन.सी.ई.आर.टी के नुमायंदों समेत राज्यों को भी दिशा निर्देश दिए।

          मुख्यमंत्री आगे कहा कि शिरोमणिी अकाली दल-भाजपा सरकार ने एक 14 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था जिसमें बहुत से मैंबर पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ के टीचिंग स्टाफ में से लिए गए थे। इस कमेटी में पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला या गुरू नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर का कोई भी मैंबर नहीं लिया गया। श्री गुरु तेग़ बहादुर खालसा कॉलेज दिल्ली का एक जूनियर लैक्चरर इस कमेटी में शामिल किया गया था।

          कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि इतिहास के सिलेबस को तर्कसंगत बनाने के नाम पर ऐसे ढंग से इसको तैयार किया गया कि पंजाब का इतिहास 9वीं से लेकर 12वीं कक्षा तक चार क्लासों में शामिल किया गया और इसको अस्पष्ट रूप में तैयार किया गया।

          उन्होंने आगे कहा कि सिख इतिहास से सम्बन्धित केवल दो विषय 12वीं कक्षा के लिए मुहैया करवाए गए।

          मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि गुरू नानक देव जी संबंधी अध्याय भक्ति लहर के अध्याय में शामिल किया गया जिसके साथ उनके सिख मत के वाणी के रुतबे को घटाया गया।

          मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली उस समय चुप रहे परन्तु सत्ता छिनने के बाद इन्होंने हो-हल्ला शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि सिख हिस्ट्री रिसोर्स ऐडीटिंग प्रोजैक्ट के चेयरमैन के पद से डा. कृपाल सिंह को उस अहम और जटिल समय हटाया गया है जब सिलेबस का तर्कसंगत और ग़ैर राजनैतिक ढंग के साथ जायज़ा लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि शिरोमणि अकाली दल कांग्रेस सरकार की कोशिशों को नुक्सान पहुंचाना चाहते हैं जबकि सरकार विद्यार्थियों के बड़े हितों के मद्देनजऱ यह मुद्दा हल करना चाहती है।