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Friday, November 16, 2018

सिर्फ गोपाष्टमी के दिन नहीं, बल्कि हर रोज करें गाय की सेवा : स्वामी कमलानंद जी


 श्री राम भवन में कार्तिक महोत्सव तहत मनाई गई श्री कृष्ण गोपाष्टमी 

श्री मुक्तसर साहिब
 श्री कल्याण कमल आश्रम हरिद्वार के अनंत श्री विभूषित 1008 महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरि जी महाराज ने गायों की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गाय की पूजा सिर्फ गोपाष्टमी के दिन करते तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि रोजाना गायों की पूजा होनी चाहिए। गो भक्तों को नित्य-प्रतिदिन गोशाला जाकर गायों की सेवा का पुण्य कमाना चाहिए। गो सेवा समान कोई सेवा नहीं है। यह सबसे उत्तम सेवा है। पुरातन काल में बड़े-बड़े राजा-महाराजाओं ने गो सेवा के  फलस्वरुप कई मनोकामनाएं पूर्ण की थीं।



महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद जी महाराज ने ये विचार श्री राम भवन में चल रहे कार्तिक महोत्सव तहत गोपाष्टमी पर्व पर प्रकाश डालते हुए व्यक्त किए। उन्होंने श्रद्धालुओं को पंचगव्य का सेवन करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि गाय के गोबर, मूत्र, दूध, दही व घी से बने पंचगव्य का सेवन करने से बीमारियां पास नहीं फटकती। पुरातन समय में ऋषि-मुनि पंचगव्य सेवन करते थे तो लंबी उम्र तक हष्ट-पुष्ट रहते थे। मगर आज लोग पंचगव्य सेवन करने में संकोच करते हैं। स्वामी जी ने श्रद्धालुओं को घर के आंगन में रोज नहीं तो सप्ताह में एक दिन जल में गोमूत्र डाल पोछा जरुर लगाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि गोमूत्र के जल से पोछा लगाने से घर-आंगन पवित्र होता है। गायों को स्नान कराकर, उन्हें सुसज्जित करके सुगंध-पुष्पादि से उनका पूजन करना चाहिए। इसके पश्चात यदि संभव हो तो गायों के साथ कुछ दूर तक चलना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।
गायों को हरा चारा, गुड़, भोजन आदि कराना चाहिए तथा उनकी चरण रज को मस्तक पर लगाना चाहिए। ऐसा करने से सौभाग्य की वृध्दि होती है। स्वामी जी ने श्रद्धालुओं को भजन 'माता से भी जिस माता ने ज्यादा दूध पिलाया, कैसे हो तुम भक्त गऊ के ध्यान न तुमको आया...Ó,  'गोविंद मेरो है, गोपाल मेरो है...Ó तथा 'सेवा गऊ दी तू कर चित्त ला के स्वर्गां नूं जाएंगा मनां...Ó आदि भजन सुनाकर भाव-विभोर कर दिया। इस मौके मंदिर प्रांगण गौ माता के जयकारों से गूंज उठा।
-- इनसैट --
गायों की रक्षा करने पर भगवान कृष्ण का नाम पड़ा 'गोविंदÓ
महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद जी महाराज ने कहा कि गायों की रक्षा करने के कारण भगवान श्री कृष्ण जी का अतिप्रिय नाम 'गोविंदÓ पड़ा। हिंदू संस्कृति में गाय व गोपाष्टमी पर्व का विशेष स्थान हैं। गाय को मां का दर्जा दिया गया हैं क्योंकि जिस तरह एक मां का हृदय कोमल होता है उसी प्रकार गाय माता का हृदय भी कोमल होता हैं। जिस तरह एक मां अपने बच्चो को हर स्थिति में सुख देती हैं, वैसे ही गाय माता भी हर समय मानवों को लाभ ही प्रदान करती हैं। स्वामी जी ने विभिन्न गोशालाओं में जाकर की गायों की सेवा शुक्रवार को टिब्बी साहिब गोशाला में भी गोपाष्टमी उत्सव हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया गया। गोपाष्टमी पर स्वामी कमलानंद जी की अध्यक्षता में श्रद्धालुओं ने टिब्बी साहिब रोड स्थित गोशाला में पहुंचकर गौ सेवा कर पुण्य-लाभ कमाया। सुबह सवा पांच बजे स्वामी जी के नेतृत्व में श्रद्धालु श्री राम भवन से प्रभातफेरी के रुप में भजन-कीर्तन करते हुए टिब्बी साहिब गोशाला पहुंचे। जहां स्वामी जी ने गायों का पूजन कर उन्हें हरा चारा, गुड़ आदि खिलाया। वहीं गायों को वस्त्र भेंट किए। यहां स्वामी कमलानंद जी महाराज ग्वाला रुप में सजे हुए श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खिंच रहे थे। गोशाला कमेटी के अध्यक्ष अमृत लाल खुराना ने स्वामी जी व आए श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। इस मौके मेघराज गर्ग दोदेवाले, नत्थू राम गोयल, रमन जैन, कृष्ण कुमार गावड़ी, दीपू कोठारी, गोविंद, साजन, दीपक
समेत बड़ी गिनती में श्रद्धालु उपस्थित थे। उधर, श्री श्याम मंदिर कमेटी
के चेयरमैन जीवन शर्मा के नेतृत्व में भी श्रद्धालु गायों का पूजन करने
गौशाला पहुंचे। स्वामी जी महाराज टिब्बी साहिब गोशाला के बाद, मलोट रोड, नई अनाज मंडी, पुरानी दाना मंडी व फैक्ट्री रोड स्थित गोशाला भी पहुंचे। जहां स्वामी जी ने गायों की सेवा की। स्वामी कमलानंद जी ने श्रद्धालुओं को वितरित किए तुलसी के पौधे श्री राम भवन में गोपाष्टमी उत्सव के  उपरांत स्वामी कमलानंद गिरि जी महाराज ने श्रद्धालुओं को तुलसी के पौधे भी वितरित किए। स्वामी जी ने श्रद्धालुओं को श्री राम तुलसी व श्री श्याम तुलसी के पौधे दिए। श्रद्धालुओं ने घर जाकर अपने निवास पर तुलसी पौधे लगाए। प्रवचनों दौरान स्वामी जी ने श्रद्धालुओं को तुलसी के पौधे को घर में लगाने का महत्व भी बताया। उन्होंने कहा कि हर घर में तुलसी का पौधा लगा होना जरुरी है। जिस घर में तुलसी का पौधा लगा होता है, वह घर वृंदावन समान है।