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Saturday, December 08, 2018

केन्द्र सरकार रक्षा रणनीती तैयार करने के प्रति रक्षा माहिरों की सलाह लेने हेतु उदासीन: रक्षा माहिरों की राय


चंडीगढ़, 8 दिसंबर:

भूतपूर्व सैनिकों और रक्षा विशेषज्ञों ने शनिवार को देश की रक्षा रणनीति तैयार करने में उनके सुझाव न लेने संबंधी केंद्र सरकार की अनिच्छा पर दुख प्रकट किया और दीर्घकालिक संघर्ष और रक्षा योजना के लिए चिंतन करने की मांग की।
आज यहाँ मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल -2018 के दूसरे दिन ‘इवोलविंग चैंलंजिस इन इंडियन आर्मी’ विषय पर आयोजित सैशन के दौरान उन्होंने फ़ैसला लेने वालों को इस बात पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए कहा कि अर्थव्यवस्था के प्रसार के साथ हथियारबंद फौजों के लिए फंडों की कमी न हो।
पूर्व आर्मी चीफ़ जनरल वी.पी. मलिक (सेवामुक्त) इस सैशन के संचालक थे जबकि लैफ्टिनैंट जनरल के.जे. सिंह (सेवामुक्त), कर्नल पी.के वासूदेवा (सेवामुक्त), लेफ्टिनेंट जनरल आदित्य सिंह (सेवामुक्त), सीनियर पत्रकार दिनेश कुमार और विष्णु सोम पैनल में मौजूद थे। विष्णु सोम ने कहा कि पड़ोसी देश चीन अपने अंदरूनी और बाहरी रक्षा पर बहुत ज़्यादा प्रसार कर रहा है और वर्तमान समय में उनके ड्रोन और हवाई जंगी प्रौद्यौगिकी दुनिया की बेहतरीन प्रौद्यौगिकी मानी जाती है। उन्होंने कहा कि चीन की तरफ से स्टैलथ तकनीक वाले हथियारबंद ड्रोन विकसित किये जा रहे हैं जिसकी मार से दुश्मन बच नहीं सकता और यहाँ तक कि चीन की तरफ से अगर -20 लड़ाकू जहाज़ भी अपनी हवाई फ़ौज में शामिल कर लिया गया है जोकि स्टैलथ तकनीक के साथ लैस है। उन्होंने कहा कि कई ऐसे अति-आधुनिक उपकरण ऐसे भी हैं, जिनको यदि चीन की तरफ से पाकिस्तान को सौंप दिया जाये तो भारत के लिए ख़तरा हो सकता है। सेवामुक्त लेफ्टिनेंट जनरल आदित्य सिंह ने कहा कि चीन अपने ड्रोनों में आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक भी ला रहा है जोकि चेहरा पहचानने की तकनीत से लैस है। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य की लड़ाईयां हाईपरसोनिक लड़ाकू जहाजों, ड्रोनो और रोबोटों द्वारा लड़ी जाएंगी। जनरल वीपी मलिक (सेवामुक्त) ने कहा कि इनके अलावा भविष्य की लड़ाईयां अंतरिक्ष और साईबर क्षेत्र की होंगी।
कर्नल पी.के. वासुदेवा ने प्रश्र किया कि क्या भारत अपने सशस्त्र बलों पर चीन के मुकाबले पर्याप्त खर्चा कर रहा है। मैं कह सकता हूँ कि हम हालात का समाना 1971 या 1965 की तरह नहीं कर सकेंगे। आखिर हुआ क्या है। सेना जम्मू-कश्मीर और उत्तरपूर्व में आधारित तौर पर आतंकवाद विरोधी अभियान चला रही है हमारे सिपाही उपकरणों, छोटे हथियारों और असले की कमी के कारण बड़ी संख्या में शहीद हो रहे हैं। यह अर्थ व्यवस्था दुनिया की की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है पर अभी तक इस कारण देश के सैन्य सिपाहियों को को आवश्यक आधारभूत उपकरण भी नहीं मिल सके।
इज़राइल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह छोटा सा देश 17 दुश्मन देशों द्वारा घिरा हुआ है पर फिर भी सारा क्षेत्र इस छोटे से देश से डरता है। उन्होंने ने शिकवा किया कि भारत सरकार मूर्तियों और बुलेट ट्रेनों पर तो करोड़ो रूपए खर्च कर रही है परंतु रक्षा बजट को अनदेखा कर रही है। सेवामुक्त लेफ्निेंट जनरल के.जे.सिंह ने कहा कि भारत को अपने दुश्मनों के खिलाफ ऐसा ढांचा विकसित करना चाहिए ताकि दुश्मन हमारे देश के विरूद्ध कुछ करने से पहले दो बार सोचे। उन्होंने सर्जीकल स्ट्राईक जैसे अन्य कदम उठाए जाने की वकालत भी की।दिनेश कुमार ने अपने विचार रखते हुए कहा कि चीन अपने पड़ोस में कदम फैला रहा है जिसका भारत को बड़ा खतरा है क्योंकि हमारे इर्द-गिर्द काफी दुश्मन हैं।