देसी घी की जांच प्रक्रिया ज़ोरों पर:  48 घंटों में 200 नमूने ज़ब्त- पन्नू

चंडीगढ़, 11 जनवरी:
देसी घी के उत्पादकों के लिए जागरूकता मुहिम चलाने के 15 दिनों के बाद फूड सेफ्टी कमिशनरेट की टीम द्वारा नकली घी की बिक्री पर रोक लगाने के लिए जांच मुहिम चलाई गई। यह जानकारी पंजाब के फूड सेफ्टी कमिशनर श्री के.एस.पन्नू ने दी। इन 48 घंटों की लम्बी मुहिम के दौरान राज्य भर की विभिन्न स्थानों से लगभग 200 नमूने ज़ब्त किये गए।


श्री पन्नू ने कहा कि यह देखा गया है कि कई स्थानों पर उपभोक्ताओं को गुमराह करने के लिए उत्पाद पर छोटे अक्षरों में ‘कुकिंग मीडियम’ प्रिंट करके देसी घी के तौर पर बेचा जा रहा था, जिसको उपभोक्ताओं द्वारा अनदेखा किया जाना संभावित है और साथ ही कहा कि गुमराह करने के ऐसे हथकंडे कानून की नजऱों में अपराध हैं। इसी तरह 350 रुपए किलो वाले देसी घी में वनस्पती तेल जैसे 40 रुपए किलो वाला पाम तेल मिला कर लाईट मीडियम के तौर पर बेचा जा रहा था। उन्होंने बताया कि फील्ड में से भी गलत ब्रांडिंग के कई केस रिपोर्ट किये गए हैं।


उन्होंने कहा कि दो दिनों की मुहिम के दौरान ज़ब्त किये गए नमूने विश्लेषण के लिए स्टेट लैब में भेजे गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस लैब को पहले घी की मिलावट की पहचान करने के लिए उचित मशीनरी से लैस नहीं किया गया था परन्तु अब उचित मशीनरी की खरीद कर ली गई है और मिलावटी घी के विक्रेता अब बच नहीं सकेंगे।
लोगों से अपील करते हुए फूड सेफ्टी कमिशनर ने कहा कि उपभोक्ताओं को गलत ब्रांडिंग, घटिया और गुमराह करने वाले उत्पादों के प्रति चौकस रहना चाहिए और उत्पाद खरीदने से पहले लेबल की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए।
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