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Wednesday, January 23, 2019

मुख्यमंत्री ने जताया पाकिस्तान के करतारपुर साहिब की यात्रा सिखों तक सीमित करने के कदम पर रोष


भारत सरकार को पाकिस्तान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले यात्रा से संबंधित सभी मसले उठाने की अपील

चंडीगढ़, 23 जनवरी:
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए सिफऱ् सिख श्रद्धालुओं को इजाज़त देने संबंधी पाकिस्तान के प्रस्ताव पर सख्त रोष ज़ाहिर करते हुए कहा कि श्री गुरु नानक देव जी सर्वव्यापक गुरू हैं जिनके श्रद्धालु सभी धर्मों ख़ासतौर पर हिंदु धर्म से भी जुड़े हुए हैं। 


मुख्यमंत्री ने भारत सरकार से अपील की कि जब पाकिस्तान की तरफ से करतारपुर कॉरिडोर के द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र में प्रवेश को नियमित करने के लिए समझौते का मसौदा भेजा जायेगा तो उस समय यह मसला पाकिस्तान सरकार के समक्ष उठाया जाये। 
आज यहाँ से जारी एक बयान में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि बेशक पाकिस्तान को अपने अधिकार क्षेत्र की सुरक्षा से सम्बन्धित शर्तें तय करने का पूरा हक है परन्तु इस पक्ष को भी विचारना चाहिए कि पहले पातशाह की विचारधारा सिफऱ् सिखों तक सीमित नहीं बल्कि सभी धर्मों के लोग उनके द्वारा दिखाऐ गये मार्ग पर चलते हैं। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिख सिद्धांतों में भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है और यहाँ तक कि लंगर की सेवा का प्रस्ताव भी जात-पात से रहित है। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा साहिब के दरवाज़े बिना किसी धार्मिक पक्षपात से हरेक मानव के लिए हमेशा खुले हैं। 
मुख्यमंत्री ने बताया कि हिंदू परिवारों में अपने बड़े पुत्रों को सिख सजाने की रिवायत सालों से चलती आई है और भारत में सिख धर्म के प्रति विश्वास इतना गहरा है कि दूसरे धर्मों को इस विश्वास से वंचित रखने की पाकिस्तान की सरकार को सोच भी नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसलिए श्रद्धालुओं को करतारपुर साहिब के दर्शन करने से वंचित रखना कि वह सिख नहीं हैं, पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। उन्होंने भारत सरकार को यह मसला पाकिस्तान सरकार के साथ पहल के आधार पर उठाने की अपील की। 
करतारपुर कॉरिडोर के द्वारा प्रवेश करने संबंधी पाकिस्तान सरकार की तरफ से तैयार किये जा रहे पांडुलिपि प्रस्ताव संबंधी मीडिया रिपोर्टों का जि़क्र करते हुए मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं की संख्या भी पाकिस्तान की तरफ से तय करने की शर्त पर सख्त ऐतराज़ किया। उन्होंने कहा कि एक ग्रुप में 15 व्यक्तियों को सीमित करना वाजिब नहीं है और श्रद्धालुओं को व्यक्तिगत तौर पर जाने की आज्ञा होनी चाहिए। श्रद्धालुओं के लिए ‘खुले दर्शन दीदार ’ की वकालत करते हुए उन्होंने कहा एक दिन में 500 श्रद्धालुओं के जाने की बन्दिश नहीं होनी चाहिए और ख़ासतौर पर उस समय जब नवंबर 2019 में श्री गुरु नानक देव जी का 550वां प्रकाश पर्व मनाया जाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए पासपोर्ट ज़रूरी होने के क्लॉज संबंधी रिपोर्ट पर चिंता ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि पंजाब में अधिकतर ग्रामीण जनसंख्या के पास पासपोर्ट नहीं है जिस कारणऐसे कदम से वह पवित्र स्थान के दर्शनों से वंचित रह जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने भारत और पाकिस्तान की सरकारों से अपील की कि दोनों पक्ष बातचीत का रास्ता अपना कर इस सम्बन्ध में औपचारिक समझौता लागू होने से पहले करतारपुर कॉरिडोर के द्वारा श्रद्धालुओं के बिना किसी कठिनाई से जाने के लिए सभी मसले निपटा लिए जाएँ। 
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान सरकार की तरफ से कॉरिडोर के द्वारा लोगों के जाने पर बन्दिशें लगाने के ऐसे पीछे हटने वाले कदमों से वहाँ की सरकार द्वारा उठाये इस साकारात्मक कदम पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। उन्होने कहा कि अब भारत सरकार की तरफ से ऐसे सभी मामलों को सुखद ढंग से हल किया जाये जिससे श्रद्धालु दोनों देशों के ऐतिहासिक फ़ैसले का अधिक से अधिक लाभ ले सकें।
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