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Tuesday, February 19, 2019

डायल 100 की जगह लेगा पंजाब में एकमात्र ऐमरजैंसी रिस्पाँस नंबर 112

कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए नागरिक समर्थकी सेवा की शुरूआत

चंडीगढ़, 19 जनवरी -
    पंजाब के लोगों के लिए ऐमरजैंसी शिकायत प्रणाली को और मज़बूत करने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने डायल 112 को जारी किया। यह एकमात्र नंबर अगले दो महीनों के दौरान डायल 100 पुलिस हेल्प लाईन की जगह लेगा।


    ऐमरजैंसी रिस्पांस स्पोर्ट सिस्टम (ई.आर.एस.एस) की शुरुआत नयी दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर जारी की गई विलक्षण नागरिक केन्द्रित सेवा के समानांतर एक ही समय की गई है।
    मुख्यमंत्री ने इस मौके पर प्रयोग के तौर पर पहली कॉल की और उन्होंने उम्मीद प्रकट की कि यह लोक समर्थकी पहलकदमी राज्य की कानून व्यवस्था की मशीनरी को और बढ़ावा देगी और लोगों के प्रशासन में विश्वास को बढ़ाएगी। उन्होंने उम्मीद प्रकट की कि यह सेवा साफ़, बेहतर और पारदर्शी प्रशासन दिए जाने को यकीनी बनाएगी जिसके लिए मार्च 2017 में मौजूदा सरकार ने सत्ता संभालने के बाद रास्ते से एकतरफ़ हट के पहले ही सुधार किये हैं। 
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि संकट की स्थिति में यह प्रणाली लोगों के लिए बहुत ज़्यादा लाभकारी होगी। यह प्रणाली औरतों और मुसीबत में फंसे लोगों के लिए ख़ास तौर पर लाभप्रद होगी। संकट के समय फ़ोन करने पर पुलिस की प्रतिक्रिया में भी इस प्रणाली से महत्वपूर्ण सुधार होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि यह प्रणाली राज्य के समूचे सुरक्षित माहौल में सुधार लाएगी और अपराधों की रोकथाम में मदद करेगी। 
ई.आर.एस.एस प्रणाली पहले ही दो राज्यों में अमल में है। यह लोगों द्वारा ऐमरजैंसी के समय फ़ोन करने पर पूरे प्रबंध के लिए पूरी तरह लैस है। इस प्रणाली में मुसीबत के समय औरतों के लिए विशेष व्यवस्था है और पुलिस से सम्बन्धित नागरिक सेवाओं के लिए विभिन्न आपातकलीन स्थितियों के लिए तुरंत रिस्पाँस की विशेषता है। स्वास्थ्य और आग से सम्बन्धित सेवाओं के सम्बन्ध में यह सेवा भारत आधारित है। महिलाओं की कॉलिंग सुविधा के लिए फाईनांस निर्भया फंड में से मुहैया करवाए गए हैं।
यह प्रणाली पूरी तरह स्वचलित और कम्प्यूटर आधारित है। हरेक फ़ोन बहुत बेहतर तरीके से रिकार्ड होता है जिससे किसी भी संकट वाली स्थिति के समय पुलिस द्वारा मदद में सुधार होगा। शुरू में रिस्पांस का समय 10 से 12 मिनट होगा जिसको बाद में 6 से 8 महीनों में घटाकर 8 मिनट पर लाया जायेगा। 
सीनियर पुलिस अधिकारी नागरिकों द्वारा 112 नंबर पर दर्ज की शिकायतों का रोज़मर्रा के आधार पर निगरानी करेंगे। यह प्रणाली अपराध के रुझान का विश्लेषण करने के लिए एक प्रभावी प्रबंधन उपकरण होगी। यह अपराध पर नियंत्रण करने के लिए पुलिस साधनों की प्रभावी ढंग से योजनाबंदी और संगठित करने के लिए सीनियर पुलिस प्रबंधन के लिए असरदार होगी। यह स्वास्थ्य और आग से संबंधित मुसीबतों भरी स्थिति के दौरान पुलिस के रिस्पांस में तालमेल बिठाएगी। 
आज की इस शुरुआत से यह स्कीम पंजाब समेत 14 राज्यों /केंद्र शासित प्रदेश में अमल में आ गई है। पहले पड़ाव के दौरान यह प्रणाली पुलिस एमरजैंसी तक सीमित रहेगी बाद में इसमें स्वस्थ्य और आग सम्बन्धी अन्य सेवाएं भी शामिल की जाएंगी। 
ई.आर.एस.एस को लोगों से प्राप्त होने वाले एमरजैंसी सिग्नल को प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह संदेश वॉयस कॉल, ई. मेल, पैनिक एस.ओ.एस. और ई.आर.एस.एस वेब पोर्टल आदि हो सकते हैं। नागरिकों को अपनी शिकायतें दर्ज कराने के लिए यह मल्टी -मॉडल प्लेटफार्म मुहैया करवाया गया है। लोग 112 नंबर डायल करके अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। स्रद्बड्डद्य-११२ञ्चश्चह्वठ्ठद्भड्डड्ढश्चशद्यद्बष्द्ग.द्दश1.द्बठ्ठ पर लॉगइन किया जा सकता है। ‘112 इंडिया’ एप पर पैनिक बटन मैसेज दबाया जा सकता है। 112.द्दश1.द्बठ्ठ पर शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। 112.द्दश1.द्बठ्ठ पर सीधा वेब लिंक विदेशों में बसे लोगों ख़ासकर एन आर आईज़ के लिए मददगार होगा। 
ई.आर.एस.एस को फंड साझे तौर पर भारत सरकार के गृह मंत्रालय और पंजाब सरकार द्वारा उपलब्ध करवाए हैं। इस प्रोजैक्ट के लिए 9.28 करोड़ रुपए के फंड गृह मंत्रालय द्वारा राज्य को मुहैया करवाए हैं। पहले पड़ाव के दौरान मार्च 2018 में 3 करोड़ रुपए जारी किये गए जबकि 5.21 करोड़ रुपए मोबायल डेटा टर्मिनल की खरीद के लिए अलॉट किये गए। इसके  अलावा राज्य सरकार ने 6 करोड़ रुपए के फंड इस प्रोजैक्ट के जल्दी मुकम्मल करने के लिए उपलब्ध करवाए हैं। इसके लिए मोहाली के सैक्टर 89 में एन.ई.आर.एस  भवन का निर्माण किया जाएगा। 
पंजाब भर में 112 नंबर पर आने वाली सभी कॉल सैंट्रल सेल टॉकिंग सैंटर में आएंगी जो पंजाब पुलिस हाऊसिंग कार्पोरेशन बिल्डिंग फेस -7 एस ए एस नगर में स्थित है। यह आगे 12 डिसपैच सेंटरों में भेजी जाएंगी जो रूप नगर, होशियारपुर, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, गुरदासपुर, पठानकोट, फिऱोज़पुर, फाजिल्का बठिंडा, संगरूर और पटियाला में हैं। समूचे पंजाब राज्य को इन 12 डिसपैच सैंटरों के द्वारा कवर किया जायेगा। सैंट्रल सेल टॉकिंग सैंटर में 49 वर्क स्टेशन होंगे। 
पैट्रोलिंग गाड़ीयों पर मोबाइल डेटा टर्मिनल (एम.डी.टी) लगे होंगे और यह डिस्पैचरों की वीडियो स्क्रीन पर आऐंगी। डिस्पैचर कॉल आने वाली जगह के नज़दीक वाली गाड़ी को सक्रिय करेंगे। पैट्रोलिंग गाड़ी का इंचार्ज शिकायत को अटेंड करने के बाद घटना की विसतृत जानकारी के विवरण डिस्पैचर को बतायेगा। पैट्रोलिंग गाड़ीयों पर मोबाइल डेटा टर्मिनल स्थापित होने के बाद विभिन्न कंट्रोल रूमों और गाड़ीयों के बीच टैक्स्ट /मेल्ज़ /वीडीयोज़ के अदान -प्रदान की भी सुविधा मिलेगी। 
इस प्रोजैक्ट के लिए सभी हल उपलब्ध करवाने के लिए भारत सरकार की एजेंसी सैंटर फॉर डिवैल्पमैंट ऑफ एडवांस कम्प्यूटिंग (सी.डैक), डिपार्टमैंट ऑफ इलेक्ट्रिॉनिक्स एंड इन्फर्मेशन टेक्नोलोजी की सेवा प्राप्त की गई हैं। सी-डैक अथॉरिटी पहले तीन साल के लिए इस प्रोजैक्ट को चलाएगी। यह इसके लिए तकनीकी और अन्य सहयोग मुहैया करवाएगी। 112 नंबर के लिए कर्मचारी पंजाब पुलिस उपलब्ध करवाएगी। 
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