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Saturday, March 02, 2019

पंजाब मंत्रीमंडल द्वारा नई आबकारी नीति को मंजूरी


व्यापार समर्थकी और परचून समर्थकी पहुँच पर लगातार जोर 2018-19 के न बिके हुए कोटे को अगले साल लेजाने के लिए लाईसैंसधारकों को अनुमतिपड़ोसी राज्यों से शराब की तस्करी रोकने के लिए आबकारी विभाग के लिए अतिरिक्त बटालियन बनाई जाएगी

चंडीगढ़, 2 मार्च:
पिछले साल अपनाई गई व्यापार समर्थकी और परचून समर्थकी पहुँच को लगातार जारी रखते हुए पंजाब सरकार ने साल 2019 -20 के लिए आबकारी नीति का ऐलान किया है जिसमें शराब के व्यापार में एकाधिकारवादी प्रचलन को रोकने और छोटे ग्रुपों में शराब के ठेके अलॉट करने की पहुँच अपनाई गई है। 

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में स्वीकृत की गई नई नीति में साल 2018 -19 के 5462 करोड़ रुपए की निर्धारित संभावी वसूली के बदले इस बार 6201 करोड़ रुपए का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 
इसका खुलासा करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि नयी नीति के अनुसार ग्रुपों की संख्या पहले वाली ही तकरीबन 700 रहेगी, राजस्व में संभावी वृद्धि की सूरत में ही केवल ग्रुप के साईज़ में विस्तार किया जा सकता है। इससे छोटे लाईसैंसधारकों की भागीदारी बढ़ेगी और ठेकों की संख्या आबकारी नीति 2019 -20 के दौरान भी तकरीबन पिछले वाली ही रहेगी। 
लाईसैंसधारकों को साल 2018 -19 के दौरान न बिके हुए शराब के कोटे को बहुत ही मामूली फीस के साथ अगले साल 2019 -20 में लेजाने की आज्ञा दी गई है। 
पड़ोसी राज्यों से शराब की तस्करी रोकने के लिए एक अतिरिक्त बटालियन बनाई जायेगी जिसमें पुलिस का एक आई.जी. /डी.आई.जी., डिविजऩल स्तर पर एस.पी. रंैक का अधिकारी, आवश्यक डी.एस.पी., हरेक आबकारी जिले में 50 -60 पुलिस कर्मचारी होंगे। इसको आबकारी और कर विभाग के लिए बनाया जायेगा। 
साल 2018 -19 के दौरान शराब की खपत के अनुसार पी.एम.एल.(देसी शराब) का कोटा 5.78 करोड़ प्रूफ़ लीटर से बढ़ाकर 6.36 करोड़ लीटर किया गया है। यह वृद्धि 10 प्रतिशत है। इसी तरह भारत की बनी विदेशी शराब (आई.एम.एफ.एल.) का कोटा 2.48 करोड़ प्रूफ़ लीटर से बढ़ाकर 2.62 करोड़ प्रूफ़ लीटर किया गया है। यह वृद्धि 6 प्रतिशत है। इसके अलावा बीयर का कोटा 2.57 करोड़ बल्क लीटर से बढ़ाकर 3 करोड़ बल्क लीटर किया गया है जो 16 प्रतिशत अधिक है। 
पिछले साल तक देसी शराब का एक्स -डिस्टिलरी इशु प्राईस (ई.डी.पी.) सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता था। इस साल 2019 -20 के लिए एम.आर.पी. की धारणा को ई.डी.पी. के साथ जोडक़र पेश किया गया है। इससे मंडीकारी शक्तियां मैदान में आएंगी और डिस्टिलरियां अपने ब्रांडों की अपनी दरें निर्धारित करने के योग्य होंगी।
एक रुपए लीटर की दर से बोटलिंग फीस लगाई जायेगी जो 30 करोड़ रुपए का अनुमानित राजस्व पैदा करेगी। यह राशि वित्त विभाग को शराब नशामुक्ति उद्देश्यों के लिए अलॉट की जायेगी। 
थोक के व्यापार को खोलने के लिए आई.एम.एफ.एल. के थोक लाइसेंस देने के लिए लाईसेंस फीस निश्चित होगी जो 50 लाख की जगह 25 लाख होगी। आई.एम.एफ.एल पर तीन रुपए प्रति प्रूफ़ लीटर की दर से अतिरिक्त लाइसेंस के रूप में अस्थिर फीस होगी। यह बीयर पर दो रुपए प्रति बल्क लगाई गई है। यह एल-1 लाईसैंसियों द्वारा शराब की बिक्री पर निश्चित की गई है। 
एक अन्य फ़ैसला लेते हुए मंत्रीमंडल ने पंजाब एक्साईज एक्ट 1914 के सैक्शन 31 की धारा सी में संशोधन करने की सहमति दी है। इसको साल 2019 -20 की आबकारी नीति की व्यवस्थाओं की रौशनी में किया गया है। इसको रेगुलेटरी /निगरानी के पक्ष से अपनाया गया है। 
मंत्रीमंडल ने कम्पोजीशन सकीम के अधीन राज्य में पंजाब एक्साईज एक्ट 1914 के अंतर्गत एल -3, एल-3, एल-4, एल-4, एल-5, एल-5, एल-5बी, एल-5सी और एल-12सी के लाईसैंसियों के विरुद्ध शराब की बिक्री पर लेवी टैक्स को मंजूरी दे दी है। गौरतलब है कि प्रस्तावित कम्पोजीशन स्कीम वैकल्पिक है। इसके लिए शड्यूल-ए और शड्यूल-ई में संशोधन अपेक्षित है। इसी कारण उन लाइसेंस धारकों पर 13 प्रतिशत की दर से वैट + 10 प्रतिशत सरचार्ज लगाया गया है जो कम्पोजीशन स्कीम को नहीं अपनाएंगे। 
इस समय 13 प्रतिशत की दर से वैट + 10 प्रतिशत सरचार्ज डिस्टिलरियों द्वारा उत्पादन चरण पर अदा किया जाता है। 
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