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Friday, June 07, 2019

नशा तस्करों से मिले पुलिस कर्मचारियों की नहीं अब खैर ...


मुख्यमंत्री द्वारा पहचान कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्यवाही के लिए एस.टी.एफ प्रमुख को निर्देश

मुख्य सचिव को कहा... विदेश मामलों के मंत्रालय के समक्ष भोला के साथियों की हवालगी का मुद्दा उठाएं

चंडीगढ़ 
नशों के व्यापार पर और अधिक नकेल कसते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने नशों की तस्करी में लिप्त पुलिस कर्मचारियों की पहचान करने और उनके विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करने के लिए ए.डी.जी.पी (एस.टी.एफ /ड्रग) को निर्देश दिए हैं। उन्होंने राज्य के सरहदी जिलों में तैनात पुलिस कर्मचारियों के विरुद्ध ख़ास तौर पर कड़ी कार्यवाही करने के लिए कहा है। 


नशों की समस्या से निपटने के लिए बनाई विशेष टास्क फोर्स (एस.टी.एफ) की एक उच्च स्तरीय मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने ग़ैर -कानूनी गतिविधियों में शामिल पुलिस कर्मचारियों के साथ कड़ाई से निपटने के लिए पंजाब पुलिस के प्रमुख को कड़ी हिदायतें दीं हैं। उन्होंने ए.डी.जी.पी को सभी सरहदी जि़लों में एस.टी.एफ की दो टीमें गठित करने के लिए निर्देश दिए हैं जिससे वह सम्बन्धित पुलिस कर्मचारियों के साथ नज़दीक का तालमेल बनाकर काम करें और नशों के ख़ात्मे के लिए घिनौनी गतिविधियां करने वालों के विरुद्ध अति चौकसी बरतें। 
इस सम्बन्ध में निचले स्तर तक कड़ा संदेश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषी पुलिस कर्मचारियों को किसी भी कीमत पर बक्शा नहीं जायेगा। 
जगदीश भोला के मामले में शामिल उसके साथियों की हवालगी में तेज़ी लाने के लिए मुख्यमंत्री ने उन दोषियों को जल्द वापिस लाने के लिए यह मामला विदेश मंत्रालय के समक्ष उठाने के लिए मुख्य सचिव को कहा है। 
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने अदालतों में मामलों को प्रभावी ढंग से पेश करने के लिए पुलिस कर्मचारियों को समर्थ बनाने के लिए उनको व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए पूर्व जजों, वकीलों, कानून विशेषज्ञों और कानूनदानों का एक पैनल बनाने के लिए राज्य के एडवोकेट जनरल को कहा है। उन्होंने कहा कि नशों के तस्करों /व्यापारियों /स्मगलरों के मामलों के सम्बन्ध में पुलिस कर्मचारियों को कानूनी ज्ञान के साथ लैस किया जाये ताकि वह परिणाममुखी तरीके से यह केस प्रभावी ढंग से पेश कर सकें। उन्होंने कहा कि गठित किया जाने वाला माहिरों का यह पैनल पुलिस कर्मचारियों को तकनीकी कानूनी कमियों बारे जानकारी दे और नशों के मामलों में गिरफ्तार व्यक्तियों द्वारा कानूनी खामियों के किए जा रहे दुरुपयोग बारे ज्ञान मुहैया करवाएं। 
मुख्यमंत्री ने नशों के हानिकारक प्रभावों बारे लोगों को संवेदनशील बनाने के लिए बड्डी और डैपो प्रोग्रामों की सफलता की प्रशंसा की और उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य को कहा कि वह एम्ज़, नई दिल्ली द्वारा किये अध्ययन का मुल्यांकन करें जिससे इन क्लीनिकों को और मज़बूत बनाया जा सके। यह अध्ययन ओ.ओ.ए.टी क्लिनिकों में नशामुक्ति अमलों से सम्बन्धित है। 
मुख्यमंत्री ने निजी नशामुक्ति केन्द्रों के काम-काज पर नियमित तौर पर निगरानी रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग को कहा है। यह केंद्र निम्नस्तर की सेवाएं देते हैं और नशों के इलाज के लिए बहुत ऊँची दरें वसूलते हैं। मुख्यमंत्री ने नशों में फंसे व्यक्तियों और उनके परिवारों से अपील की है कि वह सरकार द्वारा चलाए जा रहे पुनर्वास केन्द्रों में बढिय़ा इलाज प्राप्त करने के लिए आगे आएं और निजी सैक्टर के जाल में न फसें। 
मीटिंग में पेश किये एक सुझाव के सम्बन्ध में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने हफ्ते के आधार पर बूप्रेनोरफीन की दी जा रही अपेक्षित डोज़ की संभावनाओं का जायज़ा लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग को कहा है क्योंकि बहुत से मामलों में नशों के आदी दैनिक वेतन भोगी मज़दूर हैं और वह दवा की प्राप्ति के लिए लाईनों में लगकर अपना समय खऱाब नहीं कर सकते। 
मीटिंग में उपस्थित दूसरों में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रमुख सचिव सुरेश कुमार, एडवोकेट जनरल अतुल नन्दा, मुख्य सचिव करण अवतार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव तेजवीर सिंह, कार्यकारी डी.जी.पी वी.के. भावड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह एन.एस. कलसी, मुख्यमंत्री के विशेष प्रमुख सचिव हरप्रीत सिंह सिद्धू, एस.टी.एफ के ए.डी.जी.पी गुरप्रीत देयो और अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य सतीश चंद्रा शामिल थे।


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