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किसानों को रिवायती फसलों से वैकल्पिक फसलों की तरफ मोडऩे के लिए विश्व बैंक की सहायता मांगी

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने किसानों की आमदन बढ़ाने और पानी बचाने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों को सहयोग देने के लिए कहा
चंडीगढ़, 29 अक्तूबर:
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज किसानों को गेहूँ-धान के फ़सलीय चक्कर में से निकाल कर फ़सलीय विभिन्नता की तरफ मोडऩे के लिए विश्व बैंक से तकनीकी और वित्तीय सहायता की माँग की है जिसका मनोरथ किसानों की आमदन बढ़ाने के साथ-साथ पानी के संरक्षण को यकीनी बनाना है।


विश्व बैंक के कृषि और पानी के वैश्विक डायरैक्टर डॉ. ज्युरेगन वोइगेले के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल के साथ मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा चलाए गए प्रोग्रामों के कारण बहुत से किसानों ने रिवायती फसलों का त्याग करके वैकल्पिक फसलों को अपनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को तकनीकी और वित्तीय सहायता की ज़रूरत है जिसके लिए विश्व बैंक उचित सहायता मुहैया करवा सकता है।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने राज्य के कृषि विभाग को निर्देश दिए कि फ़सलीय विभिन्नता और भूजल को बचाने वाले प्रोजैक्टों का नक्शा तैयार करके विश्व बैंक को सौंपा जाये जिससे बैंक से तकनीकी और वित्तीय सहायता हासिल की जा सके।
किसानों की आमदन बढ़ाने और पानी के गिर रहे स्तर को रोकने के लिए फ़सलीय विभिन्नता के अहम मुद्दों पर आधारित उच्च स्तरीय मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने विश्व बैंक को पंजाब में से फल और पशुधन के निर्यात को उत्साहित करने के लिए सहायता मुहैया करवाने की अपील की जैसे कि उजबेकिस्तान में किया गया है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को कहा कि भूजल को बचाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे यत्नों को पूरा करने के लिए वह अपने तजुर्बे और अनुसंधानों को साझा करें।
मुख्यमंत्री ने खेती सब्सिडियों को उत्पादन से अलग करने का प्रस्ताव रखा और खेती विभिन्नता के लिए किसानों को प्रभावी मंडीकरण का ढांचा देने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में विश्व बैंक द्वारा राज्य सरकार के प्रोग्रामों के लिए सहायता की जा सकती है। उन्होंने मौजूदा खेती सहायता विधि के प्रसार की महत्ता पर भी ज़ोर दिया जिसके अंतर्गत भारत सरकार द्वारा मक्कई, नरमा और गन्ने जैसी वैकल्पिक फसलों की खऱीद समर्थन मूल्य पर किया जाना अहम है।
मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को जानकारी दी कि किसानों के लिए उपयुक्त ढांचा मज़बूत करने के हिस्से के तौर पर राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में जल्द ही संशोधित कृषि उत्पादन मंडी कमेटी एक्ट पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंडी संशोधनों के उद्देश्य से नियमों में संशोधन किये जाने को पहले ही अंतिम रूप दिया जा चुका है।
असरदार डाटा बेस होने की महत्ता का जि़क्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को खेती सैक्टर में विश्लेशनात्मक काम के मिलान के लिए स्थाई ढंग तैयार करने के लिए कहा। मीटिंग के दौरान पराली जलाने का मुद्दा भी उठा और मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ख़तरनाक अमल के विरुद्ध शुरु की गई मुहिम को सफल बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किसानों को मुआवज़ा देने की ज़रूरत है।
प्रतिनिधिमंडल के नुमायंदो ने राज्य सरकार के ‘पानी बचाओ, पैसा कमाओ’ जैसे प्रयासों की प्रशंसा की और खेती विभिन्नता और पानी के संरक्षण सम्बन्धी राज्य सरकार के यत्नों को विश्व बैंक से पूरी सहायता देने का भी भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि फलों की पैदावार और सहायक सैक्टरों में अपना सामथ्र्य बढ़ाकर पंजाब के पास नई खेती क्रांति का अहम मौका है।
मीटिंग में अन्यों के अलावा मुख्यमंत्री के सीनियर सलाहकार लैफ्टिनैंट जनरल (रिटा.) टी.एस. शेरगिल्ल, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रमुख सचिव सुरेश कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव कृषि विसवाजीत खन्ना, मुख्य सचिव करन अवतार सिंह, प्रमुख सचिव वित्त अनिरुद्ध तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव तेजवीर सिंह, पी.ए.यू. के उप- कुलपति बलदेव सिंह ढिल्लों और पंजाब किसान आयोग के चेयरमैन अजयवीर जाखड़ शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों में प्रोग्राम नेता और पंजाब के कोऑर्डीनेटर भावना भाटिया, सतत विकास प्रोग्राम के प्रमुख सुमिला गुलयानी और सीनियर खेती माहिर मनीवानन पाथी शामिल थे।  

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