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-श्री गुरु नानक देव जी का 550 साला प्रकाश पर्व - सर्वदलीय मीटिंग के दौरान समागम साझे तौर पर मनाने का संकल्प

पंजाब सरकार सुल्तानपुर लोधी में 12 नवंबर को होने वाले समागम के लिए पंजाब और देश की सभी राजनैतिक पार्टियों को न्यौता देगी
मीटिंग के दौरान कुछ राजनैतिक पक्षों द्वारा अपने संकुचित हितों की ख़ातिर रिवायतें तोडऩे का दोष 
चंडीगढ़, 1 नवंबर:
आज यहाँ मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की रिहायश पर हुई सर्वदलीय मीटिंग के दौरान श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को समर्पित पंजाब सरकार द्वारा 12 नवंबर को सुल्तानपुर लोधी में करवाए जा रहे राज्य स्तरीय समागम में शामिल होकर इसको साझे रूप में मनाने का संकल्प लिया। 


मीटिंग के दौरान इस बात पर भी अफ़सोस ज़ाहिर किया गया कि कुछ राजनैतिक पार्टियों ने अपने संकुचित हितों के लिए इस पवित्र मौके पर समानांतर समागम रखने का फ़ैसला किया है जिससे विश्व भर में सिख भाईचारे में गलत संदेश जा रहा है। 
मीटिंग के दौरान यह भी विचार किया गया कि इससे पहले ऐसे मौकों पर हुए समागम राज्य सरकार द्वारा करवाए गए थे और इन समागमों में सभी राजनैतिक पार्टियों के नेता साझे तौर पर शामिल होते थे। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि कुछ राजनैतिक पार्टियों ने इस बार इस रिवायत को तोडऩे का फ़ैसला किया है और इस पवित्र और ऐतिहासिक मौके को अपने निजी स्वार्थों के लिए बरतने की कोशिश की है। 
मीटिंग के बाद एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया मीटिंग के दौरान यह फ़ैसला किया गया कि राज्य सरकार 12 नवंबर को करवाए जा रहे समागम के लिए पंजाब और देश की सभी राजनैतिक पार्टियों के नेताओं को न्यौता देगी। इस समागम की धार्मिक भावनाओं के मद्देनजऱ सभी भाषण गुरू साहिब जी के जीवन और फलसफे के प्रसार तक ही सीमित होंगे। 
मुख्यमंत्री के अलावा सत्ताधारी कांग्रेस के नुमायदों के तौर पर सुखजिन्दर सिंह रंधावा, चरनजीत सिंह चन्नी और सुनील जाखड़ शामिल हुए। बाकी राजनैतिक शख्सियतों में शिरोमणि अकाली दल 1920 के हरबंस सिंह कंधोला, सी.पी.आई. के भुपिन्दर सांभर और हरदेव अरशी, सी.पी.आई. (एम) के गुरपरमजीत कौर तग्गड़, शिरोमणि अकाली दल टकसाली के सेवा सिंह सेखवां, संत समाज के बाबा सर्बजोत सिंह बेदी, बसपा के राज्य प्रधान जसवीर सिंह गड़ी, आम आदमी पार्टी के मनजीत सिंह बिलासपुर और विरोधी पक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा मीटिंग में शामिल थे। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपने राजनैतिक भिन्नताओं से ऊपर उठ कर मुख्य समागमों में सभी राजनैतिक पार्टियाँ और उनके नुमायंदों के शामिल होने की तीव्र इच्छा रखती है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक मौके को राजनैतिक तंग नज़रिए से दूर रखना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को भी एक समागम के लिए विनती की थी जिसको उन्होंने सहमति भी दे दी थी परन्तु आखिऱ में यह कोशिशें पूरी न हो सकी।
इस पवित्र मौके का सियासीकरण किये जाने के लिए अकालियों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समागम की पवित्रता के मद्देनजऱ वह (कैप्टन अमरिन्दर सिंह) पहले दिन से ही साझे समागम मनाने के हक में थे और इसी भावना की पालना करते हुए वह 9 नवंबर को डेरा बाबा नानक में भारत सरकार द्वारा करवाए जा रहे समागम के दौरान मंच से निजी तौर पर भी जुड़ी सभा को संबोधन करेंगे। 
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि उनकी सरकार ने इस ऐतिहासिक मौके की याद में कई प्रोजैक्टों की शुरुआत की है जिनमें पटियाला में जगत गुरू नानक ओपन यूनिवर्सिटी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरफेथ स्टड्डीज़, पिंड बाबे नानक दा और अन्य प्रोजैक्ट शामिल हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने इस दिवस के सत्कार में कपूरथला में मैडीकल कॉलेज स्थापित करने के लिए भी केंद्र से माँग की है। 
कैबिनेट मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने कहा कि सर्वदलीय मीटिंग के दौरान साझे तौर पर समागम मनाने का लिया गया फ़ैसला लोगों के दरमियान ख़ास कर सिख भाईचारे में साकारात्मक संदेश देगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को कई पेशकशें की गई थी परन्तु उसने सहमति प्रकट नहीं की जिससे उसकी तरफ से अकेले ही समागम मनाने का इरादा किया हुआ लगता है। 
सेवा सिंह सेखवां ने कहा कि जब वह अकाली सरकार में लोक संपर्क मंत्री थे तो उस समय पर सभी समागम राज्य सरकार द्वारा करवाए गए थे परन्तु अब अकाली बेवजह ढिंढोरा पीट रहे हैं जिससे उनका दोहरा किरदार सामने आया है। 
बाबा सरबजीत सिंह बेदी ने कहा कि चाहे शिरोमणि कमेटी और श्री अकाल तख्त साहिब को धार्मिक समागम ऐसे ढंग से मनाने का अधिकार है परन्तु बदकिस्मती से यह दोनों संस्थाएं आज़ाद नहीं रही और पूरी तरह एक परिवार के प्रभाव अधीन हैं। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा जारी किये जाने वाले हुक्मनामों की पवित्रता भी खतरे में है। उन्होंने कहा कि भाजपा और अकाली दल की राजनीति स्वरूप ही करतारपुर गलियारे के द्वारा जाने वाले जत्थे राजनैतिक पथ में विभाजित हो जाएंगे जिससे श्रद्धालुओं में दुविधा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी ने हमें एकजुट रखा था परन्तु राजनीति ने हमें विभाजित कर डाला है।

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