बिल को असंवैधानिक और विघटनकारी बताया

चंडीगढ़, 12 दिसंबर:
नागरिकता संशोधन बिल को भारत के धर्म निरपेक्ष चरित्र पर सीधा हमला बताते हुये पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज कहा कि उनकी सरकार इस कानून को राज्य में लागू करने की इजाज़त नहीं देगी।
देश की संवैधानिक नैतिक मूल्यों की सुरक्षा के लिए अपनी वचनबद्धता ज़ाहिर करते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के पास राज्य की विधान सभा में बहुमत है और सदन में इस असंवैधानिक  बिल को रोक देगी। राज्य सभा में पास किये गये विवादस्पद बिल के पास होने के एक दिन बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार देश के धर्म निरपेक्ष ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचाने देगी क्योंकि यह नैतिक मूल्य देश की विभिन्नता की मज़बूती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद को ऐसा कानून पास करने का कोई अधिकार नहीं जो संविधान को चोट पहुंचाता हो और संविधान के मूलभूत सिद्धांतों और देश के लोगों के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन करता हो। इस बिल को संवैधानिक मूल्यों के विपरीत बताते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि यह रद्द होना चाहिए।
इस कानून के विघटनकारी स्वरूप का जि़क्र करते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि देश को धर्मके आधार पर बाँटता हुआ कोई भी कानून असंवैधानिक और अनैतिक है जिसको बरकरार रखने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनी हुई सरकार का यह फर्ज बनता है कि वह संविधान में दर्ज नैतिक मूल्यों की सुरक्षा करे और इनको किसी भी तरह नुकसान ना पहुंचने दे। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि ऐसी संवैधानिक उल्लंघन को वह अपने कार्यकाल में कोई भी जगह नहीं लेने देंगे। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि जब हम देश को प्रभुसत्ता सम्पन्न, समाजवादी, धर्म निरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणतंत्र बनाने और इसके नागरिकों को न्याय, समानता और आज़ादी का भरोसा देने का ऐलान किया है तो भारत की आबादी के बड़े वर्ग को सुरक्षा से एक तरफ़ कैसे छोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि नागरिकता को कानून के साथ जोड़ कर नागरिकता संशोधन बिल देश की नींव पर ज़ोरदार हमला करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि अन्य देश भी ऐसे कानून लाने का फ़ैसला कर लें तो वहाँ बड़ी संख्या में बस रहे भारतीयों का क्या होगा जिन्होंने नागरिकता भी हासिल की हुई है। इन भारतीयों के साथ क्या घटेगा यदि यह देश यह फ़ैसला लें कि  उनके धार्मिक विश्वास के आधार पर उनकी नागरिकता वापस ले ली जाये।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने इस कदम को प्रतिगामी बताते हुये कहा कि यह संविधान की तरफ से देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रण से पीछे धकेलने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि संसद में बहुमत के ज़ोर पर इस बिल को पास कराने की बजाय केंद्र सरकार को इस मसले पर सभी पार्टियों के साथ विचार-विमर्श करना चाहिए था और यदि भारत और यहाँ के लोगों के हित में ऐसे कानून की ज़रूरत महसूस होती तो इस पर आम सहमति पैदा करने की कोशिश की जाती।
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