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पशूओं की ढुलाई के लिए अब DC से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की ज़रूरत नहीं

आवारा पशूओं की समस्या का हल करने के लिए केंद्र राज्य सरकार का सहयोग दे- बलबीर सिंह सिद्धू दूध दोहन मुकाबलों में हरियाणा की भैंस ने बनाय...


आवारा पशूओं की समस्या का हल करने के लिए केंद्र राज्य सरकार का सहयोग दे- बलबीर सिंह सिद्धू

दूध दोहन मुकाबलों में हरियाणा की भैंस ने बनाया विश्व रिकॉर्ड

लुधियाना, 09 दिसंबर:

राज्य में पशु पालकों की परेशानी को घटाने और पशु पालन धंधे को उत्साहित करने के लिए पंजाब सरकार ने पशूओं की ढुलाई सम्बन्धी अनापत्ति प्रमाण पत्र की शर्त में ढील देने का फ़ैसला किया है। पशूओं की ढुलाई सम्बन्धी अब अनापत्ति प्रमाण पत्र डिप्टी कमिश्नरों की बजाय वैटरनरी अफ़सरों को जारी करने के लिए अधिकृत किया जा रहा है। यह ऐलान पंजाब के पशु और मछली पालन और डेयरी विकास मंत्री स. तृप्त रजिन्दर सिंह बाजवा ने स्थानीय पशु मंडी में प्रोग्रेसिव डेयरी फारमर्ज़ की तरफ से आयोजित किये मेले के दौरान किया।
इस मौके पर पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में पशु पालकों को अपने ही पशूओं की ढुलाई के लिए डिप्टी कमिश्नर से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना पड़ता था जिससे उनको काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ता था। पशु पालकों की इस परेशानी को दूर करने के लिए यह अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के अधिकार वैटरनरी अफ़सरों को दिए जा रहे हैं। पड़ोसी राज्य हरियाणा की तजऱ् पर लिए गए इस फ़ैसले बारे नोटीफिकेशन जल्द जारी कर दिया जायेगा।  स. बाजवा ने कहा कि इस फ़ैसले से न केवल पशु पालकों की परेशानी घटेगी बल्कि राज्य में पशूओं के व्यापार में भी विस्तार होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से पंजाब को पशूओं का बीमारी मुक्त एरिया बनाने के लिए मुँह खुर और गल-घोटू के मुफ़्त टीके लगाऐ जा रहे हैं जिससे कि हम अपने दूध और मीट बाहर के मुल्क को भेज सकें।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार की तरफ से हरेक जिले के 100 -100 गाँव चुनकर मुफ़्त बनावटी गर्भदान टीके लगाऐ जा रहे हैं। पशूओं की नसल सुधार के लिए माझे में नीली रावी, बॉर्डर एरीए में साहिवाल और मालवे में मुर्रा नसल के बढिय़ा पशु तैयार करने के लिए नयी स्कीम आरंभ की गई है। उन्होंने कहा कि पाँच सूअरों के सरकारी फार्मों से रियायती दरों पर सूअरों के बच्चे दिए जा रहे हैं। बकरियों के लिए बीटल नसल के नर बच्चे पशु पालकों को मुफ़्त दिए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में डेयरी धंधे को उत्साहित करने के लिए डेयरी विकास के नौ प्रशिक्षण केन्द्रों पर हर साल 6000 से अधिक नौजवानों को प्रशिक्षण देकर डेयरी धंधे के साथ जोड़ा जाता है। लगभग 3000 बच्चों को बैंकों से आसान दरों पर कजऱ्े दिलाकर नये डेरी यूनिट स्थापित किये जाते हैं। दुधारू पशूओं की खरीद से लेकर दूध दुहने वाली मशीनें, चारा काटने वाली मशीनें, दूध ठंडा करने वाले यंत्र और दूध से दूध पदार्थ बनाने वाले गाँव स्तर के कारख़ाने और 25 प्रतीशत से 33 प्रतीशत तक सब्सिडी दी जाती है।
उन्होंने कहा कि पंजाब के दक्षिणी जिलों में खारे पानी में झींगा पालने के काम में तेज़ी आई है और नया क्षेत्रफल मछली पालन के अधीन लाया जा रहा है। आगे भी सरकार की तरफ से इन धंधों को उत्साहित किया जाता रहेगा। उन्होंने पी.डी.एफ.ए. को बधाई देते हुए नयी पीढ़ी को कहा कि अपने घर में अपने मुल्क में रहकर ऐसे पेशे शुरू किये जाएँ क्योंकि मुल्क की बढ़ती आबादी की माँग को पूरा करने के लिए दूध, मीट और अंडों की माँग लगातार बढ़ती रहेगी।
प्रोग्रेसिव डेयरी फारमर्ज़ ऐसोसीएशन के प्रधान स. दलजीत सिंह, सभी जि़ला प्रधान और सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि पी.डी.एफ.ए. के सदस्यों की तरफ से बनाऐ गए डेयरी फार्म और बढिय़ा नसल के पशूओं को जहाँ देश की नयी पीढ़ी के नौजवानों के काम करने की भावना पैदा होती है, वहीं अपने आधुनिक फार्म भी बना रहे हैं। पी.डी.एफ.ए. ऐसी संगठन है जो सरकारी नीतियाँ और स्कीमों को किसानों तक पहुंचाती है और किसानों की मुश्किलों को सरकार तक पहुंचाती है। नयी नीतियाँ बनाने में पी.डी.एफ.ए. का काफ़ी योगदान रहा है।
इस मौके पर विशेष तौर पर पहुँचे पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री स. बलबीर सिद्धू ने कहा कि यदि कृषि हमारे देश की आर्थिकता की रीढ़ की हड्डी है तो पशु पालन पेशा भी किसानों की रीढ़ की हड्डी है। पशु पालन में मछली पालन, बकरी पालन और अन्य सहायक धंधे किसानी को आर्थिक तौर पर प्रफुल्लित करने में अहम योगदान डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार राज्य में कृषि और पशु पालन धंधों को प्रफुल्लित करने के लिए मशीनीकरण पर ज़ोर दे रही है। इसलिए पंजाब सरकार की तरफ से किसानों और पशु पालकों को बाकायदा सब्सिडी पर यंत्र मुहैया करवाने के साथ-साथ सस्ती दरों पर कजऱ्े मुहैया करवाए जा रहे हैं।
राज्य में आवारा पशूओं की समस्या पर काबू पाने संबंधी केंद्र सरकार से अपील करते हुए स. सिद्धू ने कहा कि केंद्र सरकार को इस दिशा में राज्य सरकारों का सहयोग करना चाहिए। स. सिद्धू ने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से जी.एस.टी. की पिछले लम्बे समय से किश्त रोकी हुई है जिस कारण राज्य की आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यकुशलता संबंधी पूछे सवाल का जवाब देते हुए स. सिद्धू ने कहा कि सरकारी अस्पतालों की कार्यकुशलता में बड़े स्तर पर सुधार दर्ज किया गया है। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए 118 वैद्यों की भर्ती की गई है। जबकि माहिर डॉक्टरों और पैरा मैडीकल स्टाफ की भी जल्द भर्ती की जायेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य बीमा योजनाएं  सफलतापूर्वक चल रही है। अब तक इस योजना के अधीन 67 करोड़ रुपए की स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा चुकी हैं।
इस मौके पर अलग -अलग मुकाबलों में विजेता रहने वाले पशु पालकों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर दूसरों के अलावा मुख्यमंत्री पंजाब के राजसी सचिव कैप्टन संदीप सिंह संधू, विधायक मनप्रीत सिंह अयाली, पूर्व मंत्री स. मलकीत सिंह दाखा, सीनियर कांग्रेसी नेता स. मेजर सिंह भैनी, डेयरी विभाग के डायरैक्टर स. इन्द्रजीत सिंह, एस.एस.पी. लुधियाना ग्रामीण श्री संदीप गोयल और अन्य उपस्थित थे।

सरस्वती ने बनाया विश्व रिकॉर्ड

इस मेले में हरियाणा की मुर्रा नसल की भैंस सरस्वती ने दूध दोहन के मुकाबले में 32.66 किलो दूध देकर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। बताने योग्य है कि इससे पहले यह रिकॉर्ड पाकिस्तान की भैंस के नाम 32.50 किलो था। इस भैंस के मालिक सुखवीर सिंह ने कहा कि उसे अपनी भैंस पर बहुत गर्व है और वह इसके खाने -पीने और संभाल में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ता।

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