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चंडीगढ़, 31 दिसंबर :

 

पंजाब के जल संसाधन विभाग द्वारा रबी की फसलों के लिए 1 से 8 जनवरी, 2021 तक नहरों में पानी छोडऩे का प्रोग्राम जारी किया गया है। सरहिन्द कैनाल सिस्टम जैसे कि बिस्त दोआब कैनाल, सिंद्धवां ब्रांच, बठिंडा ब्रांच, पटियाला फीडर और अबोहर ब्रांच क्रमवार पहली, दूसरी, तीसरी, चौथी और पाँचवी प्राथमिकता के आधार पर चलेंगी।

जल संसाधन विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि भाखड़ा मेन लाईन में से निकलने वाली नहरें, जो ग्रुप ‘ए’ में हैं, को पहली प्राथमिकता के आधार पर पूरा पानी मिलेगा। घग्गर लिंक और इसमें फीड होती घग्गर ब्रांच और पटियाला माइनर, जो ग्रुप ‘बी’ में हैं, को दूसरी प्राथमिकता के आधार पर बाकी बचा पानी मिलेगा।

प्रवक्ता ने बताया कि हरीके सिस्टम के रजबाहों, जो ग्रुप ‘ए’ में हैं, को पहली प्राथमिकता के आधार पर पूरा पानी मिलेगा और ग्रुप ‘बी’ के रजबाहों को दूसरी प्राथमिकता के आधार पर बाकी बचा पानी मिलेगा।

उन्होंने आगे बताया कि अप्पर बारी दोआब में से निकलने वाली सभरों ब्रांच और इसके रजबाहों को पहल के आधार पर पूरा पानी दिया जायेगा, जबकि कसूर ब्रांच लोअर और मेन ब्रांच लोअर और इनके रजबाहों और लाहौर ब्रांच को क्रमवार बाकी बचा पानी मिलेगा।




चंडीगढ़, 30 दिसम्बर: 

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब मंत्रीमंडल ने बुधवार को राज्य सरकार और इसकी संस्थाओं में नयी भर्ती के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की तजऱ् पर नये वेतन स्केल (मैट्रिक्स) देने के लिए पंजाब सिविल सर्विसेज़ रूल्ज़ में कुछ संशोधनों को मंज़ूरी दे दी है।

इस वर्चुअल कैबिनेट मीटिंग के दौरान केंद्र सरकार के वेतन स्केल के अनुसार संभावित भर्ती/नियुक्तियों के लिए सीधी भर्ती/तरस के आधार पर भर्ती के लिए जिल्द-1, भाग-1, नियम 4.1 (1) में संशोधन करने का फ़ैसला लिया गया।

जि़क्रयोग्य है कि वित्त विभाग ने 17 जुलाई, 2020 को हिदायतें जारी की थीं कि 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारशों के अनुसार पंजाब सरकार के किसी भी प्रशासकीय विभाग या इसकी संस्थाओं के किसी भी काडर का वेतन स्केल केंद्र सरकार में उसी काडर के वेतन स्केल से अधिक नहीं होना चाहिए। वित्त विभाग द्वारा 15 जनवरी, 2015 को जारी किए गए पत्र और इसके उपरांत जारी किये गए पत्रों के अनुसार परख काल के दौरान प्राथमिक वेतन (न्यूनतम वेतन बैंड) की ग्रांट और भत्ते भी इस नियम के अंतर्गत ही लागू हैं।

मुख्यमंत्री दफ़्तर के एक प्रवक्ता के अनुसार मंत्रीमंडल द्वारा प्रवानित संशोधन में कहा गया है कि 17 जुलाई, 2020 से पहले भर्ती किये गए कर्मचारियों के लिए ‘निश्चित मासिक वेतन’ से भाव सरकारी मुलाजि़म द्वारा लिया जाने वाला मासिक वेतन उसके पद के न्यूनतम वेतन बैंड के बराबर होता है। उक्त रकम में सम्बन्धित पद के ग्रेड पे के हवाले के मुताबिक लिए गए यात्रा भत्ता के बिना ग्रेड पे, विशेष वेतन, सालाना वृद्धि या कोई अन्य भत्ता शामिल नहीं होगा।

इसके अलावा संशोधित हुए नियम के अनुसार 17 जुलाई, 2020 को या इसके बाद सीधे कोटे के पदों के लिए नियुक्त किये गए कर्मचारियों के लिए ‘निश्चित महीनावार वेतन’ से भाव सरकारी कर्मचारी द्वारा लिए जाने वाले वेतन सम्बन्धी प्रशासनिक विभाग जिसमें नियुक्ति हुई है, की तरफ से नोटीफायी पे मैट्रिक्स के बराबर होगी। इसमें सम्बन्धित पदों के ग्रेड पे के हवाले के मुताबिक लिए गए यात्रा भत्ता के बिना ग्रेड पे, विशेष वेतन, सालाना वृद्धि या कोई अन्य भत्ता शामिल नहीं होगा।

प्रवक्ता ने बताया कि संशोधित हुए नियम में नियम 2.44 (बी) के अनुसार कोई अन्य रकम शामिल नहीं होगी, जिसको योग्य अथॉरिटी द्वारा वेतन के हिस्से के तौर पर विशेष तौर पर श्रेणीबद्ध किया गया हो।

प्रवक्ता के अनुसार राज्य के प्रशासनिक विभागों को वित्त विभाग द्वारा राज्य की रोजग़ार योजना के अंतर्गत नयी नियुक्तियों के लिए वेतन मैट्रिक्स संबंधी सलाह दी जा रही है। इसके अलावा प्रशासनिक विभागों की सीधी भर्ती, मौके के मुताबिक, पंजाब लोक सेवा आयोग (पी.पी.ऐस.सी.), अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (एस.एस.एस.बोर्ड) और विभागीय कमेटी जैसी भर्ती एजेंसियों द्वारा प्रक्रिया अधीन हैं।


दूरसंचार सेवाओं में विघ्न और मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के लिए पुलिस को कह

चंडीगढ़, 28 दिसम्बर: पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सोमवार को राज्य में मोबाइल टावरों की तोड़-फोड़ और दूरसंचार सेवाओं में विघ्न डालने वालों को सख्त चेतावनी जारी करते हुये पुलिस को ऐसी गैर-कानूनी गतिविधियों करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट करते कि वह पंजाब में किसी भी निजी या सरकारी जायदाद का नुकसान सहन नहीं करेंगे, कहा कि उनकी तरफ से ऐसी कार्यवाहियों न करने की बार -बार अपीलेें करने के बाद भी इस को अनदेखा करने के कारण उनको सख्त रुख अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।मुख्यमंत्री ने यह बात जोर देकर कही कि वह किसी भी कीमत पर पंजाब में अराजकता फैलाने और किसी को भी कानून अपने हाथों में लेने की आज्ञा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को पिछले कई महीनों केंद्र के काले खेती कानूनों के खिलाफ राज्य में चल रहे शांतमयी प्रदर्शनों पर कोई ऐतराज नहीं था और न ही उनकी सरकार ने ऐसे किसी प्रदर्शन को रोका। उन्होंने कहा कि जायदाद का नुकसान और नागरिकों को असुविधा सहन नहीं की जायेगी।मुख्यमंत्री की यह चेतावनी उस समय पर आई जब राज्य में कुल 1561 मोबाइल टावर प्रभावित हुए हैं जिनमें से 25 टावरों की तोड़-फोड़ हुई है। यह नुकसान केंद्र के काले खेती कानूनों के खिलाफ शांतमयी प्रदर्शन कर रही किसान यूनियनों के निर्देशों पर कुछ किसानों और उनके समर्थकों की तरफ से कथित हिंसा के दौरान हुआ।किसानों और उनके समर्थकों को ऐसीं नुकसानदेय गतिविधियों जिनको किसान नेताओं की तरफ से न मंजूर कर दिया गया है, तुरंत बंद करने का न्योता देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरसंचार सेवाओं में विघ्न से राज्य में संचार ब्लैकआउट हो सकता है और इससे खास कर विद्यार्थियों और काम करते पेशेवर व्यक्तियों को गंभीर नुकसान हो सकता है।उन्होंने कहा कि परीक्षाओं खास कर बोर्ड के इम्तिहान नजदीक होने और कोविड महामारी के मद्देनजर विद्यार्थी ऑनलाइन शिक्षा पर निर्भर हैं जिस कारण दूरसंचार सेवाओं में विघ्न डालने की ऐसी कार्यवाहियों से बच्चों के भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को 1.75 लाख स्मार्ट फोन बाँटे हैं जिससे वह बोर्ड के इम्तिहान देने के लिए पुख्ता ढंग के साथ तैयारियाँ कर सकें परन्तु मोबाइल टावरों की तोड़ -फोड़ करने से बच्चों की पढ़ाई में विघ्न पड़ रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि पेशेवर लोग भी घर से काम कर रहे हैं और इनमें से बहुत से महामारी के दौरान पंजाब आ गए थे जिस कारण हिंसा और जायदाद को नुकसान पहुँचाने की ऐसी कार्यवाहियों से इन लोगों का रोजगार तक छिन सकता है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सेवाओं, जो कोविड के संकट के दौरान बड़े स्तर पर आनलाईन लेन-देन पर निर्भर हैं, को ऐसी गैर -कानूनी गतिविधियों से ठेस पहुंच रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक किसान संघर्ष कामयाब रहा है और इसको समाज के सभी वर्गों के लोगों से हिमायत मिली और यहाँ तक कर इस संघर्ष के शांतिपूर्ण होने के कारण देश भर के लोगों ने भी समर्थन दिया। उन्होंने सावधान करते हुये कहा कि हिंसा का प्रयोग प्रदर्शनकारियों को आम लोगों से अलग कर सकता है जो किसान भाईचारे के हितों के लिए दुष्प्रभावी साबित होगा।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि चाहे उनकी सरकार की संघर्षशील किसानों के साथ पूरी हमदर्दी है और इसी कारण ही राज्य की विधान सभा में केंद्र के कानूनों को बेअसर करने के लिए प्रांतीय संशोधन बिल लाए गए परन्तु किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जायेगी।सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि बीते कुछ दिनों में 1561 मोबाइल टावरों की सेवाएं प्रभावित हुई हैं जिनमें से सोमवार से 32 मोबाइल टावरों की बिजली सप्लाई में विघ्न पडऩे के कारण 146 टावर प्रभावित हुए और इससे बाकी 114 टावरों की सेवाएं भंग हो गई। अब तक 433 टावरों की मुरम्मत की जा चुकी है। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि राज्य के कुल 22 जिलों में 21306 मोबाइल टावर हैं।




आयात किये गए के बैलों से राज्य में दूध उत्पादन बढ़ेगा और दुधारू पशूओं की नस्ल में होगा सुधार

चंडीगढ़, 27 दिसंबर

जर्मनी से उत्तम नस्ल के मंगवाए होलस्टीन फ्राईसियन नस्ल के बैलों में से पंजाब को 4 बैल मिले हैं। पंजाब के पशु पालन और डेयरी विकास मंत्री श्री तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा ने इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने देश में क्रॉसब्रीड गाएँ के जर्म प्लाज़्मा में सुधार के लिए जर्मनी से यह उत्तम नस्ल के बैल मंगवाए हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब को मुहैया करवाए गए उत्तम नस्ल के इन बैलों से राज्य में न सिफऱ् दूध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राज्य में दुधारू पशूओं की नस्ल में भी सुधार होगा। श्री बाजवा ने कहा कि जैसे हर कोई जानता है कि खाद्य उत्पादन के लिए तेज़ी से बढ़ रही लागत के कारण रिवायती कृषि अब किसानों के लिए लाभप्रद नहीं रही, इसलिए पंजाब सरकार द्वारा राज्य में डेयरी को सहायक कृषि धंधे के तौर पर विकसित करने पर ज़ोर दिया जा रहा है और डेयरी को एक लाभप्रद धंधा बनाने के लिए राज्य के पशु पालकों को मुफ़्त गर्भधारन और टीकाकरण सेवाओं और अन्य सेवाएं मुहैया करवाई जा रही हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि पशु पालन विभाग ज्य़ादातर सेवाओं के लिए पशु पालकों से नाम-मात्र फीस वसूल ली जाती है।  पंजाब पशु पालन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री वी.के. जंजूआ ने बताया कि आयात किये गए एच.एफ. नस्ल के बैल 10 से 12 महीनों के उम्र के हैं और अगले 2 सालों में इनसे सीमन उत्पादन सही तरह से शुरू हो जायेगा। उन्होंने आगे कहा कि पहले साल के दौरान इन बैलों से तकरीबन 8,000-10,000 सीमन स्ट्राज़ के उत्पादन की उम्मीद की जा रही है, जो आने वाले सालों में 25,000 सीमन स्ट्राज़ तक बढ़ जायेगी। उन्होंने कहा कि विदेशी जर्म प्लाज़्मा को स्थानीय जीन पुल में शामिल किया जायेगा, जिसके नतीजे के तौर पर नस्ल में सुधार होगा। डायरैक्टर पशु पालन विभाग पंजाब डा. एच.एस. काहलों ने बताया कि आयात किये गए यह चार बैल को माहिरों की निगरानी अधीन रूपनगर के सीमन बैंक में रखा गया है। जिनमें से दो को रौणी फार्म पटियाला में भेजा जायेगा। उन्होंने आगे कहा कि जब इन नये बैलों से सीमन उत्पादन शुरू हो जायेगा तो सीमन बैंक के ज़रिये सभी पशु अस्पतालों और जिलों की डिस्पैंसरियों को सीमन स्ट्राज़ बाँटें जाएंगे, जो विभाग के गर्भधान प्रोग्राम के लिए इस्तेमाल की जाएंगी।



 दस्तावेज़ पेश करने में नाकाम रहने पर 2 गाँवों में स्टोन क्रशिंग यूनिट सील  

चंडीगढ़, 25 दिसंबर: राज्य में ग़ैर कानूनी खनन को रोकने के लिए अपनी कोशिशों में तेज़ी लाते हुए पंजाब सरकार ने मोहाली जि़ले के 2 गाँवों में लगे स्टोन क्रशिंग इकाईयों को दस्तावेज़ पेश करने में नाकाम रहने पर सील कर दिया है। इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए एक प्रवक्ता ने बताया कि राज्य में ग़ैर कानूनी खनन को रोकने के लिए माइनिंग विभाग द्वारा पुलिस और पैसको के सहयोग से विभिन्न स्तर पर सख़्त कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा ग़ैर कानूनी खनन को रोकने के लिए तकनीकी पहुँच अपनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने आगे बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा 10 दिसंबर, 2020 को जारी आदेशों में यह सामने आया है कि कई स्टोन क्रशिंग इकाईयों की सामग्री की खऱीद प्रक्रिया और उपभोग के सम्बन्ध में पूरी जानकारी पेश करने में असफल रही हैं। उन्होंने कहा ‘‘यह बताया गया है कि पिछले समय के दौरान हुई ग़ैर कानूनी खनन के मद्देनजऱ स्टोन क्रशरों द्वारा ग़ैर-जि़म्मेदाराना ढंग से सामग्री की खऱीद की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।’’ प्रवक्ता ने कहा कि इन हुक्मों की पालना हेतु सरकार द्वारा पंजाब माइनर मिनरल रूल्ज़, 2013 और राज्य की स्टोर क्रशर नीति के अनुसार काम न कर रही क्रशर इकाईयों की निगरानी में तेज़ी लाने का फ़ैसला किया है। इसके अनुसार जि़ला मोहाली में ग़ैर कानूनी खनन के विरुद्ध एक विशेष मुहिम के अंतर्गत विभाग के अधिकारियों ने पुलिस फोर्स के साथ मिलकर स्टोन क्रशिंग इकाईयों की चैकिंग की। मुबारकपुर और हंडेसरा के इलाकों में चैकिंग के दौरान क्रशर इकाईयों के मालिक कच्चे माल के स्रोत की प्रामाणित तोल पर्ची, रजिस्ट्रेशन और स्टॉक रजिस्टर सम्बन्धी दस्तावेज़ पेश करने में नाकाम रहे, जिसके चलते इन क्रशर इकाईयों को मौके पर सील कर दिया गया। जि़क्रयोग्य है कि इन क्रशिंग इकाईयों को पहले ही उचित दस्तावेज़ पेश करने के निर्देश दिए गए थे परन्तु अभी तक इन इकाईयों से कोई दस्तावेज़ प्राप्त नहीं हुए। उन्होंने आगे कहा कि अगर क्रशर मालिक तस्दीक के लिए अपने दस्तावेज़ जमा करवाना चाहते हैं तो वह इसके लिए विभाग से संपर्क कर सकते हैं। अगर उनके द्वारा जमा किये गए सभी दस्तावेज़ सही पाए जाते हैं तभी क्रशिंग इकाईयों को चलने की आज्ञा दी जाएगी।



चंडीगढ़, 24 दिसंबर:भारत सरकार ने 28 दिसंबर और 29 दिसंबर, 2020 को कोविड-19 के टीके का ट्रायल शुरू करने के लिए पंजाब राज्य को चुना है। 2 जि़ले लुधियाना और शहीद भगत सिंह नगर को कोविड- 19 टीके के ट्रायल के लिए चुना गया और हर जि़ले में 5 स्थानों की पहचान की जाएगी। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री स. बलबीर सिंह सिद्धू ने प्रैस बयान के द्वारा दी। यह जानकारी देते हुए श्री सिद्धू ने बताया कि इस ट्रायल का उद्देश्य स्वास्थ्य प्रणाली में कोविड-19 टीकाकरण शुरू करने के लिए निर्धारित तरीकों की जांच करना है। यह कोविड-19 मुहिम की शुरुआत से पहले किसी भी आंतरिक कमियों या रुकावटों संबंधी जानकारी प्रदान करेगा, जिससे समय रहते उनको हल किया जा सके। यह परीक्षण दो जिलों में जि़ला क्लैकटर / मैजिस्ट्रेट के नेतृत्व में चलाया जायेगा।मंत्री ने बताया कि टीकाकरण हिस्सेदार यू.एन.डी.पी. और राज्य स्तर पर विश्व स्वास्थ्य संस्था इस गतिविधि का समर्थन करेंगे। इस दो दिनों के ट्रायल की सभी गतिविधियां नज़दीक करने, लाभपात्रियों के डेटा अपलोड, सैशन साइट निर्धारन (माईक्रो-प्लानिंग), सैशन साइट प्रबंधन (टैस्ट किए लाभपात्रियों के साथ) रिपोर्टिंग और शाम के ड्रीफिटिंग आदि शामिल की जानी हैं। उन्होंने कहा कि जि़ला और राज्य टास्क फोर्स में परीक्षण का सुझाव उपचार कार्यवाही के लिए उपयुक्त होगा (अगर ज़रूरी हो) टीके का ट्रायल 28 और 29 दिसंबर 2020 दौरान किया जाना है। मंत्री ने कहा कि इस ट्रायल के दौरान कोविड-19 टीकाकरण प्रक्रिया की एंड-टू-एंड टेस्टिंग को यकीनी बनाया जायेगा और एक इलेक्ट्रानिक एप्लीकेशन के द्वारा सहयोगी समूहों द्वारा पहले से पहचान किए गए लाभपात्रियों का टीकाकरण किया जायेगा। इस ट्रायल का मुख्य उद्देश्य वातावरण में को-विन एप्लीकेशन का प्रयोग की कार्यशील संभावना का मुल्यांकन करना और योजनाबंदी के बीच संबंधों का टैस्ट करना शामिल है। उन्होंने कहा कि टीके का यह परीक्षण 4 राज्यों जैसे कि आंध्रा प्रदेश, असम, गुजरात और पंजाब में चलाए जाने की प्रस्ताव है।


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कहा, सरकारी प्रोग्रामों को समय पर मुकम्मल करने के लिए योगदान देंगे सुपरवाईजऱ

 सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण होगा सुनिश्चित

 

चंडीगढ़, 23 दिसंबर: महिलाओं को रोजग़ार के मौके मुहैया करवाकर उन्हें अधिक सशक्त बनाने की पहल के अंतर्गत पंजाब की सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री अरुणा चौधरी ने आज 34 आंगनवाड़ी सुपरवाईजऱों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इससे एक महीना पहले भी 362 आंगनवाड़ी सुपरवाईजऱों को नियुक्ति पत्र जारी किये गए थे। यहाँ आज पंजाब भवन में करवाए गए समागम के दौरान एक्स सर्विसमैन और खेल कोटे में से पदोन्नत इन 34 आंगनवाड़ी सुपरवाईजऱों को विभाग में निष्ठा और समर्पण के साथ काम करने के लिए प्रेरित करते हुए श्रीमती अरुणा चौधरी ने कहा कि वर्करों को पदोन्नत कर सुपरवाइजऱ बनाने से न सिफऱ् विभाग को मज़बूती मिलेगी, बल्कि राज्य की नयी पीढ़ी को पौष्टिक ख़ुराक और स्वस्थ वातावरण देने में मदद के अलावा राज्य में हर वर्ग के लोगों को सरकार की कल्याण योजनाओं संबंधी समयबद्ध जानकारी देने में भी ये सुपरवाइजऱ अहम योगदान देंगी। सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने और पंचायती चुनाव में 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह का धन्यवाद करते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने एक लाख नौकरियाँ सरकारी क्षेत्र में देने का ऐलान किया है, जिसमें महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जायेगा। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री के साथ विभाग के प्रमुख सचिव राजी पी. श्रीवास्तव, संयुक्त सचिव विमी भुल्लर और डिप्टी डायरैक्टर गुरजिन्दर सिंह मौड़ भी मौजूद थे। अरुणा चौधरी ने महिलाओं को लोक सेवा के लिए राजनीति में आगे आने की अपील की और कहा कि इससे महिलाओं के सशक्तिकरण के मंतव्य से शुरू किये प्रोग्रामों को लागू करने में मदद मिलेगी। कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा कि मुख्यमंत्री के उद्देश्य ‘घर-घर रोजग़ार मिशन’ के अंतर्गत नौजवानों को नौकरियाँ देने के लिए हमारे प्रयास जारी हैं और सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग में खाली पद भरे जा रहे हैं।



धोखेबाज़ी और सियासीकरण के द्वारा किसानों की हमदर्दी जीतने की नौटंकियां केजरीवाल के किसी काम नहीं आएंगी कोई ई.डी. केस पैंडिंग नहीं 

चंडीगढ़, 22 दिसम्बर:आम आदमी पार्टी द्वारा की जा रही निम्र दर्जे की राजनीति और कीचड़ उछालने की कड़ी आलोचना करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आप कनवीनर और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को आईना दिखाते हुए स्पष्ट किया कि केंद्रीय गृह मंत्री के साथ उनकी मीटिंग में सिफऱ् राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित एजेंडे पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि सरहदी राज्य के गृह मंत्री के तौर पर वह दुश्मन पड़ोसी का सामना कर रहे हैं जिस कारण उनकी यह जि़म्मेदारी बनती है कि राज्य में चल रही गतिविधियों बारे भारत सरकार को अवगत करवाया जाये। उन्होंने यह भी कहा कि वह प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को मिलने से तब भी संकोच नहीं करेंगे जब-जब पड़ोसी दुश्मन देशों द्वारा अंदरूनी सुरक्षा मामलों में शह दी जाती रहेगी।आप नेता की तरफ से लगाए जा रहे दोषों को बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताते हुए इनकी घोर निंदा करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि इन दोषों में कतई सत्य नहीं है कि वह केंद्रीय गृह मंत्री को अपने परिवार पर चल रहे ई.डी. केसों के सम्बन्ध में मिले थे। उन्होंने आप पर बरसते हुए कहा कि वह अपनी राजनीति चमकाने के लिए झूठ और छल पर आधारित उनके खि़लाफ़ मुहिम चला रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ई.डी. की तरफ से उनके खि़लाफ़ कोई केस दर्ज नहीं किया गया। हालाँकि उनके पुत्र रणइन्दर सिंह के खि़लाफ़ ई.डी. की तरफ से दर्ज एक केस पिछले एक दशक से चल रहा है और वह भी फेमा एक्ट के अधीन है जो कि सिविल /वित्तीय मामले के साथ जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने उनके पुत्र को इससे पहले भेजे आयकर के गलत अनुमानों के हुक्मों पर भी रोक लगा दी थी। बौखलाहट में आकर आयकर विभाग ने अब उनको समूचे परिवार समेत बदलाखोरी का निशाना बनाया और यहाँ तक कि उनके छोटे पोते-पोती को भी नहीं बक्शा और उनको काला धन रोकथाम अधिनियम के अंतर्गत नोटिस जारी किये गए जिनके साथ कानूनी ढंग से निपटा जा रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि केजरीवाल जैसा नौसिखिया और निकम्मा राजनीतिज्ञ ही ऐसे नतीजे पर पहुँच सकता है जबकि दिल्ली के मुख्यमंत्री की तरफ से पेश की जा रही तस्वीर से असली तस्वीर बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल को शिष्टाचार की हदें पार नहीं करनी चाहीएं। अमृतसर (ग्रामीण) जिले में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के साथ जुड़े ड्रोन गिरोह का पर्दाफाश करने के पाँच दिन बाद एक ड्रोन के द्वारा 19 और 20 दिसंबर की रात को पाकिस्तान की तरफ से फेंके गए 11 हैंड ग्रेनेड ज़ब्त करने की घटना जिसको आज मीडिया में भी प्रमुखता के साथ उभारा गया है। इस कारण उनका यह फज़ऱ् बनता है कि केंद्र सरकार को इस संबंधी अवगत करवाया जाये जिससे प्रांतीय और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियाँ पाकिस्तान के घिनौने इरादों को नाकाम करने के लिए ठोस रणनीति तैयार करने के लिए आपसी तालमेल के साथ काम करें क्योंकि पड़ोसी मुल्क राज्य की अमन-कानून व्यवस्था के साथ-साथ देश की एकता और अखंडता के लिए हमेशा ही बड़ा ख़तरा बना हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी कई घटनाएँ मीडिया में रिपोर्ट नहीं होतीं क्योंकि लोगों में घबराहट पैदा होने से बचने के लिए इनको सार्वजनिक नहीं किया जाता। हालाँकि राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी यह ड्यूटी बनती है कि ऐसी हर गतिविधि संबंधी केंद्र सरकार को अवगत करवाया जाये।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केजरीवाल को काले खेती कानूनों बारे अपने अस्पष्ट स्टैंड पर सफाई देने की चुनौती देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने पहले तो इस खेती कानून को नोटीफायी कर दिया और अब किसानों के प्रति झूठी हमदर्दी दिखाकर इस नाजुक मुद्दे पर मगरमच्छ के आंसु बहाए जा रहे हैं जो सिफऱ् और सिफऱ् केजरीवाल की नौटंकियों से अधिक और कुछ नहीं।आप के नेताओं पर बरसते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केजरीवाल को चोटी का पाखंडी बताते हुए कहा कि उसके चमचों की आँख पंजाब के 2022 विधानसभा चुनाव पर है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि आप तो सिफऱ् सस्ती राजनैतिक शोहरत कमाने के लिए किसानों के संघर्ष में शामिल हुए जबकि आप और आपकी पार्टी का उनकी दुख तकलीफ़ों के साथ कोई लेना-देना नहीं है। यदि आपको किसानों की थोड़ी सी भी चिंता होती तो आपकी पार्टी को अपने स्तर पर दिल्ली में केंद्र सरकार के कानूनों के विरुद्ध प्रदर्शन करना चाहिए था।दिल्ली के मुख्यमंत्री को गिरगिट की तरह रंग न बदलने की सलाह देते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि पंजाब के लोग पूरे दिल से किसानों के साथ खड़े हैं और केजरीवाल के चालबाज़ खेल को बहुत ध्यान के साथ देख रहे हैं जो किसानों के संघर्ष से राजनैतिक लाभ कमाने के लिए तत्पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि थोड़ा इन्तज़ार करो और देखो कि यह दीवार पर लिखा हुआ है कि आप और आपके चापलूसों की पार्टी पंजाब के राजनैतिक दृश्य से मिट जायेगी और इसकी शुरुआत भी हो गई है।


चंडीगढ़, 19 दिसंबरः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री पंजाब बलबीर सिंह सिद्धू ने आज 96 मल्टीपर्पज़ हैल्थ वर्करों (एम. पी.एच.डब्ल्यू.) को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस मौके पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव हुस्न लाल विशेष तौर पर मौजूद थे।आज यहां इस सम्बन्धी जानकारी देते हुये स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मल्टीपर्पज़ हैल्थ वर्करों के कुल 200 मंजूरशुदा पदों में से आज 96 हैल्थ वर्करों को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं। जबकि बाकी पद जल्दी से जल्दी क्रमवार ढंग से भरे जाएंगे। यह सभी नियुक्तियाँ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की तरफ से योग्यता के आधार पर पारदर्शी ढंग से भरी जा रही हैं।बलबीर सिंह सिद्धू ने नव-नियुक्त मल्टीपर्पज़ हैल्थ वर्करों को बधाई दी और उनको स्वास्थ्य संस्थाओं में ईमानदारी और तनदेही से अपनी जिम्मेवारियां निभाने के लिए उत्साहित किया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अमले ने पूरी सौहर्दयता से अपनी जिम्मेदारी निभाई है और शानदार कारगुजारी वाले कर्मचारियों का सम्मान भी किया गया है।  स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने ‘घर घर रोजगार योजना’ के अंतर्गत नौकरियाँ देने का वायदा किया था और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। जिक्रयोग्य है कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से साल 2017 से 2019 के दौरान पैरा मैडीकल और मैडीकल अफसरों समेत अन्य स्टाफ के कुल 7000 पद भरे गये हैं जबकि 3954 पदों की भर्ती प्रक्रिया अधीन है।स्वास्थ्य सेवाओं (परिवार कल्याण) के डायरैक्टर प्रभदीप कौर जौहल ने स्वास्थ्य विभाग में नौकरियां हासिल करने वाले नव-नियुक्त स्टाफ का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी को काफी हद तक काबू कर लिया गया है और बीमारी का अभी तक पूरी तरह खात्मा नहीं हुआ है। रोजमर्रा के सैंकड़ों केस सामने आ रहे हैं। इसलिए कोरोना से निपटने के लिए मास्क पहनना और समय-समय पर अपने हाथ धोने चाहिएं और सामाजिक दूरी के नियमों की सख्ती से पालना किया जाना लाजिमी है।इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री के राजनैतिक सचिव श्री हरकेश चंद शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री के ओ.एस.डी. डा. बलविन्दर सिंह, परिवार कल्याण विभाग के डायरैक्टर के निजी सहायक परविन्दर सिंह, सुपरडैंट सूरज कुमार, मास मीडिया अफसर गुरमीत सिंह राणा और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

  



आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल को पाखंडबाज़ बताय

मोहाली, 18 दिसम्बर: 

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज अरविन्द केजरीवाल को चोटी का चालबाज़ बताते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल, दोनों ही पाखंडी पार्टियाँ हैं जिनके खेती कानूनों के मुद्दे पर दोगले किरदार ने यह सिद्ध कर दिया कि किसानों के प्रति इनका कोई सरोकार नहीं है। 

‘पंजाब स्मार्ट कनेक्ट स्कीम’ के दूसरे पड़ाव की शुरुआत के बाद पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘आप और अकाली दल के विधायकों की कथनी और करनी में ज़मीन-आसमान का अंतर है।’’ 

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि जब उनकी सरकार ने केंद्र के काले खेती कानूनों को बेअसर करने के लिए विधानसभा में बिल पास किये थे तो आप और अकाली दल के विधायकों ने समर्थन किया परन्तु अब अपने राजनैतिक हितों की ख़ातिर दोनों पार्टियों ने सुर बदल लिए हैं। मुख्यमंत्री ने तंज़ कसते हुए कहा कि अब किसानों के संघर्ष से राजनैतिक फ़ायदा उठाने के लिए उन्होंने इस मुद्दे पर यू-टर्न ले लिया और अपने-आप को किसानों का मसीहा बता रहे हैं जबकि दोनों पार्टियों ने किसानों के हित भारतीय जनता पार्टी के पास गिरवी रख दिए हैं। 

मुख्यमंत्री ने बताया कि चाहे शिरोमणि अकाली दल पहले पड़ाव पर खेती ऑर्डीनैंस लागूकरण में शामिल था और दूसरी तरफ़ दिल्ली में आप सरकार ने इन घातक खेती कानूनों में से एक को तुरंत ही लागू कर दिया। 

दिल्ली विधानसभा में केजरीवाल की नौटंकियों की खिल्ली उड़ाते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि आप नेता ने पिछले महीने इन काले खेती कानूनों में से एक कानून को नोटीफायी करने की मंज़ूरी दे दी और अब केंद्रीय कानूनों की कॉपियां फाडक़र घटिया स्तर की राजनीति खेली जा रही है। किसानों के मुद्दे पर आप के दोहरे मापदण्डों के लिए आप की आलोचना करते हुए कहा कि इससे पता चलता है कि केजरीवाल और आम आदमी पार्टी का बाहरी किरदार लोगों में कुछ और है और अंदरूनी रूप से पूरी तरह बुरे इरादे पाल रखे हैं।



कैबिनेट मंत्री साधु सिंह धर्मसोत ने हरीके झील और वन्य जीव सैंचरी हरीके का किया दौरा

चंडीगढ़, 15 दिसंबरः हरीके वन्य जीव सैंचुरी में सैलानी अब फिर से विज़ट कर सकते हैं। यह जानकारी पंजाब के वन मंत्री स. साधु सिंह धर्मसोत ने हरीके पतन में स्थित हरीके वन्य जीव सैंचुरी का दौरा करने के दौरान दी। कैबिनेट मंत्री ने चीफ वाइल्ड लाईफ वार्डन पंजाब, आर.के. मिश्रा (आई.एफ.एस.) के साथ हरीके पतन के अपने इस विशेष दौरे के दौरान वकील और नेचर फोटोग्राफर हरप्रीत संधू की तरफ से तैयार किये हरीके वैटलैंड की प्राकृतिक छवि को दर्शाते हुये पोर्ट्रेट भी लांच किये। इस मौके उनके साथ विधायक पट्टी हरमिन्दर सिंह गिल विशेष तौर पर मौजूद थे।पोर्ट्रेट में हरीके पतन की प्राकृतिक छवि को खूबसूबत ढंग के साथ दिखाया गया है, जोकि प्रवासी पक्षियों के रेन बसेरे और सतलुज और ब्यास दरियाओं के संगम के साथ बनी प्राकृतिक झील के तौर पर मशहूर है।पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि सैंचुरी को और भी आकर्षित बनाने के लिए पहले 15 करोड़ रुपए की राशि जो कोविड-19 संकट के कारण जारी नहीं की जा सकी थी इसको जल्द जारी किया जायेगा।उन्होंने आगे कहा कि इन यत्नों के हिस्से के तौर पर हरीके पत्तन में वन्य जीव सुरक्षा में वृद्धि के लिए एक कमेटी भी बनाई जायेगी।वन मंत्री, पंजाब ने इस पोर्ट्रेट को लांच करते हुये वकील हरप्रीत संधू की तरफ से हरीके वैट्टलैंड की प्राकृतिक छवि पर नजर डालने के लिए तालाबन्दी के दौरान किये उनके सख्त यत्नों को मान्यता दी।इस मौके पर हरप्रीत संधू ने कहा कि पंजाब का यह प्रसिद्ध प्राकृतिक स्थान अपने आप में एक स्वर्ग है और अपनी वनस्पती और प्रवासी पक्षियों के लिए जाना जाता है, जो वन्य जीव सैंचुरी हरीके में प्रकृतिक झील के साथ घिरा हुआ है और अगर इस स्थान को सैलानियों के लिए खोला जाता है तो इस वैट्टलैंड की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद मानने के लिए विश्व भर से सैलानी यहाँ आऐंगे।

 




 

मैं कभी भी किसी के दबाव आगे नहीं झुका परन्तु किसान यह जानना चाहते हैं कि आपने किस मंसूबे के तहत खेती कानून नोटीफायी कर दिये

चंडीगढ़, 14 दिसंबरः अरविन्द केजरीवाल को अकाली नेता बिक्रम मजीठिया की तरफ से किये मानहानि केस में घिर जाने के मौके से डरते हुये भाग जाने और माफी मांगने के लिए कायर करार देते हुये पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि केजरीवाल की बौखलाहट भरी कोशिशों से उसकी सरकार की नाकामियों पर पर्दा नहीं पड़ सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा करने में असफल रह जाने के बाद अब केजरीवाल अपनी साख बचाने के लिए हाथ पैर मार रहा है जोकि न तो उसे किसानों के गुस्सा से बचा सकेगा और न ही आगामी विधान सभा चुनाव में उसकी पार्टी की डूबती बेड़ी को बचा सकेगा। केजरीवाल की तरफ से उनके (कैप्टन अमरिन्दर सिंह) खिलाफ लगाऐ गए झूठे दोषों का बदले में जवाब देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा, “यह बात हर पंजाबी जानता है कि मैं ई.डी. के झूठे केस या किसी अन्य मामल से डरने वाला नहीं हैं। पंजाबी यह भी जानते हैं कि यदि केजरीवाल का मनोरथ पूरा होता हो तो वह अपनी आत्मा भी बेच देगा।” मुख्यमंत्री ने दिल्ली में अपने हमरुतबा को ऐसी एक भी मिसाल देने की चुनौती दी जब वह (कैप्टन अमरिन्दर सिंह) ई.डी. या किसी अन्य एजेंसी के दबाव के कारण पीछे हटे हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओपरेशन ब्लयू स्टार से लेकर सतलुज -यमुना लिंक नहर तक और अब खेती कानूनों के मुद्दे पर वह अपने लोगों के साथ हमेशा ही डट कर खड़े जबकि दूसरी तरफ इसके बिल्कुल उलट केजरीवाल जो मानहानि के मामूली जैसे केस का सामना करने से डर के कारण गिड़गिड़ाते हुये पूरे पंजाब ने देखा था और यहीं बस नहीं महामारी के दरमियान भी मदद के लिए पूरी दिल्ली ने उसको केंद्र के आगे विनतियां करते हुये देखा था। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया को यह पता लग चुका है कि कैसे राष्ट्रीय राजधानी में काले खेती कानूनों में से एक कानून लागू करके किसानों के हित बेचे गए और यह घिनौना कदम भी उस समय पर उठाया जब किसान दिल्ली की तरफ कूच करने की तैयारियाँ कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस कदम से दिल्ली के मुख्यमंत्री की केंद्र सरकार के साथ सांठगांठ जग-जाहिर हो गई। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय कनवीनर की तरफ से हर कदम पर झूठ बोलने की सख्त निंदा करते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने उनको पूछा, “केजरीवाल, आपने यह क्यों किया? आपके ऊपर केंद्र ने कौन सा दबाव बनाया? या फिर इसलिए किया कि जब अगली बार आपकी सरकार कोविड के संकट से निपटने में नाकाम रह जाये, जैसे कि दो बार पहले भी रह चुकी है, तो आप केंद्र के आगे फिर विनतियां कर सकें? किसानी आंदोलन को देश विरोधी कह कर कमजोर करने की कुछ स्वार्थी हितों की साजिश संबंधी केजरीवाल की तरफ से अपने गुस्से का ढिंढोरा पीटने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री पर बरसते हुये पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को 2017 के विधान सभा मतदान के समय खालिस्तानियों के साथ सम्बन्ध रखने वाले व्यक्ति से किसी हिमायत की जरूरत नहीं है। कैप्टन अमरिन्दर ने कहा, “अगर आप सोचते हो कि किसान आपकी नौटंकियों और मगरमच्छ के आंसूओं के झाँसेे में आ जाएंगे, तो श्री केजरीवल, आप अब भी उसी तरह ही पूरी तरह गलत हो, जिस तरह आप 2017 के पंजाब विधान सभा चुनाव में “आप” के जीतने की उम्मीद लगा कर गलत साबित हुए थे।” मुख्यमंत्री ने दिल्ली के मुख्यमंत्री की तुलना उस धूल भरी आँधी के साथ की जो हवा की दिशा को देखते चलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केजरीवाल की किसान आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशों, जिसके जरिये वह अपने राजनैतिक एजंडे को उत्साहित करने के मौके तौर पर देख रहा है, बिल्कुल भी सफल नहीं होंगी। कैप्टन अमरिन्दर ने केजरीवाल को आग से खेलने के विरुद्ध चेतावनी देते हुये कहा, “आपको और आपकी पार्टी को भारत के राजनैतिक नक्शे से पूरी तरह मिट जाने से पहले पीछे हट जाना चाहिए।” मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों के साथ धोखा करने वाला कभी भी जनता के गुस्से से बचा नहीं है और केजरीवाल, जिसने पहले ही किसानों के साथ एक से अधिक बार धोखा किया है, को भी इसके नतीजे भुगतने पड़ेंगे।



 

चंडीगढ़, 11 दिसम्बर: शादियों और पार्टियों के दौरान कोविड के प्रतिबंधों का बड़े स्तर पर उल्लंघन करने की शिकायतों के दरमियान पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने राज्य में एक जनवरी, 2021 तक इन्डोर और आउटडोर जमावड़ों की संख्या क्रमवार 100 और 250 तक रखने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सभी शहरों और कस्बों में रात का कफ्र्यू एक जनवरी, 2021 तक बढ़ाने के भी आदेश जारी किये हैं।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता को मैरिज पैलेसों और अन्य स्थानों पर बन्दिशें सख्ती से लागू करने के हुक्म दिए हैं और उल्लंघन करने की सूरत में मेज़बान पर जुर्माना लगाने के लिए कहा।राज्य में अधिक मृत्यु दर का नोटिस लेते हुए मुख्यमंत्री ने कफ्र्यू की बन्दिशें (रात 10 बजे से प्रात:काल 5 बजे तक) एक जनवरी तक बढ़ाने के हुक्म दिए हैं। इससे पहले रात का कफ्र्यू एक दिसंबर से 15 दिसंबर तक लगाया गया था।कोविड के जायज़े के लिए उच्च स्तरीय मीटिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने सह-रोगों से पीडि़त 70 साल से अधिक उम्र के पाजि़टिव मरीज़ों के लिए घरेलू एकांतवास ख़त्म करने के हुक्म दिए, बशर्ते कि घर में उचित मैडिकल सुविधाएं मुहैया हो सकती हों। वर्चुअल मीटिंग के दौरान स्वास्थ्य सचिव हुसन लाल ने बताया कि बड़ी संख्या में कोविड मौतें घरेलू एकांतवास मामलों में सामने आई हैं।और मौतों को रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने सभी प्राईवेट अस्पतालों की विस्तृत जांच के हुक्म दिए हैं, जिससे यह यकीनी बनाया जा सके कि सिफऱ् स्तर-3 के उचित बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन वाले अस्पतालों को ही कोविड मरीज़ दाखि़ल करने की इजाज़त दी जाये। उन्होंने कहा कि ऐसी सुविधाओं की कमी वाले अस्पतालों को मरीज़ अन्य अस्पतालों में रैफर कर देना चाहिए।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि चाहे पिछले तीन हफ़्तों से पंजाब में घट रही पॉजि़टिव दर स्वागतयोग्य है परन्तु मृत्यु दर अभी भी चिंता का विषय है। उन्होंने डी.जी.पी. को मास्क पहनने और सामाजिक दूरी समेत कोविड के सुरक्षा उपायों की सख्ती से पालना को यकीनी बनाने के हुक्म दिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को आर.टी.पी.सी.आर. सैंपलिंग/टेस्टिंग दर प्रतिदिन 30,000 की सीमा बरकरार रखने के लिए कहा और संभावित तौर पर कोरोना फैलाने वालों को शामिल करने के लिए लक्षित सैंपलिंग पर और ज़ोर दिया जाये। उन्होंने कहा कि जिलों को ‘इतिहास’ पोर्टल का पूरा प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहन देना चाहिए, जिससे संभावित हॉटस्पॉट (प्रभावित स्थानों) की पहचान करने और वहां उनकी सैपलिंग को केंद्रित किया जा सके। उन्होंने कंटेनमैंट और माईक्रो-कंटेनमैंट ज़ोनों में टेस्टिंग बढ़ाने और 100 प्रतिशत सैपलिंग को यकीनी बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को यह भी कहा कि दिल्ली में मामलों की बढ़ी संख्या से पेश ख़तरे के मद्देनजऱ वहाँ से वापस आने वाले किसानों की सेहत की जांच की जाये।स्वास्थ्य सचिव हुसन लाल ने इस मौके पर बताया किया कि अभी तक राज्य में 35 लाख नमूनों की जांच की जा चुकी है, जिनमें से 1.5 लाख नमूने पॉजि़टिव पाए गए हैं। हालाँकि, पंजाब में दूसरी लहर धीमी ही रही है, परन्तु उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने इस पक्ष पर भी गौर फरमाया कि 87 प्रतिशत मौतें 45 साल से अधिक उम्र के व्यक्तियों की हुई हैं और निजी ट्रशरी केयर सेंटरों में मौतों की दर 50 प्रतिशत है।पंजाब सरकार के स्वास्थ्य सलाहकार डा. के.के. तलवाड़ ने मीटिंग के दौरान उन कदमों संबंधी जानकारी दी जो कि मृत्यु दर को और घटाने के लिए उठाए जा रहे हैं। इस पक्ष पर गौर करते हुए नवंबर के दौरान 3.2 प्रतिशत रह जाने के बावजूद भी सी.एफ.आर. अभी भी चिंता का विषय है, डा. तलवाड़ ने कहा कि मरीज़ों की लगातार निगरानी की जा रही है और हरेक हफ्ते अस्पताल स्तर पर विस्तृत रूप में मृत्यु दर सम्बन्धी अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इन-हाऊस बल्ड गैस ऐनालाईजऱ और हाई फ्लो नेज़ल कैनूलास की उपलब्धता यकीनी बनाई जा रही है, खासकर तीसरे स्तर पर और इसके साथ ही आई.सी.यू. में प्रति 2 बिस्तरों पर 1 नर्स और दिशा-निर्देश आधारित इलाज प्रणाली अपनाई जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि मौतों की ज़्यादा संख्या का कारण सह-रोगों का होना है।



चंडीगढ़/एस.ए.एस. नगर, 10 दिसंबर: 

चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को यात्रियों की सुविधा के लिए बैगेज हैंडलिंग प्रणाली के क्षेत्र में तकनीकी विकास करते हुए इन-लाईन बैगेज स्क्रीनिंग प्रणाली की स्थापना के साथ अपग्रेड किया गया है। यह जानकारी आज यहाँ नए स्थापित किए गए इन-लाईन बैगेज स्क्रीनिंग सिस्टम के उद्घाटन के उपरांत पंजाब की मुख्य सचिव विनी महाजन ने दी।इस सम्बन्धी विवरण साझा करते हुए बताया गया कि इन-लाईन सिस्टम से स्क्रीनिंग के समय यात्रियों के सामान की स्क्रीनिंग के लिए आधा समय लगेगा। इसकी स्क्रीनिंग सामथ्र्य 1500 बैग प्रति घंटा है। इस नयी प्रणाली के लागू होने से यात्रियों को सामान की जांच के लिए निजी तौर पर कतार लगाने की ज़रूरत नहीं होगी।इस प्रणाली के साथ चैक-इन करने में मुश्किल नहीं आयेगी और प्रति यात्री औसतन 5 से 10 मिनट की बचत होने की उम्मीद है। यह प्रोजैक्ट 15.8 करोड़ रुपए की लागत के साथ पूरा किया गया है और बैगेज प्रोसेसिंग और स्क्रीनिंग प्रणाली मुहैया करवाने के लिए मौजूदा बैगेज हैंडलिंग प्रणाली के साथ जोड़ा गया है।इसके उपरांत विनी महाजन ने हवाई अड्डे की नयी सुविधाओं का जायज़ा लिया और कॉन्फ्ऱेंस हॉल में अधिकारियों के साथ एक मीटिंग की और चंडीगढ़ एयरपोर्ट के विकास के साथ जुड़े मुद्दों संबंधी लम्बी चर्चा की।मुख्य सचिव ने एयर लाईनज़ के लिए चंडीगढ़ हवाई अड्डे से नये रूट/न इस्तेमाल किए जा रहे रूटों को जोडऩे के लिए शुरू की गई प्रोत्साहन योजना का जायज़ा भी लिया। जि़क्रयोग्य है कि चंडीगढ़ हवाई अड्डा ऐसा पहला हवाई अड्डा है जो नये रूट/न इस्तेमाल किए जा रहे रूटों पर घरेलू हवाई यात्रा के लिए एअरलाईनज़ को छूट की पेशकश कर रहा है। निर्धारित मापदण्डों के मुताबिक एअरलाईनज़ को दी गईं छूटों में प्रति यात्री, जीएसटी छोडक़र 125 नौटिकल मील के लिए 125 रुपए और इससे अधिक दूरी के लिए 300 रुपए की छूट देने की पेशकश की गई है।इस उद्घाटन समारोह में शहरी विमानन के प्रमुख सचिव तेजवीर सिंह, गमाडा के मुख्य प्रशासक प्रदीप कुमार अग्रवाल, डीसी मोहाली गिरीश दियालन, एयर कमोडोर तेजबीर सिंह, ए.ए.आई. उत्तरी क्षेत्र के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक डी.के. कामरा (वीडियो लिंक के द्वारा शामिल हुए) और चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के सीईओ अजय कुमार समेत कस्टम/इमीग्रेशन/पंजाब पुलिस के अधिकारी शामिल थे।



शेर के बच्चे अमर, अर्जुन और दिलनूर को पहली बार देखने का मिलेगा मौका भारतीय लोबड़ी को अपने नए जन्मे बच्चों के साथ पहली बार देखा जा सकेगा मॉम एंड बेबी केयर रूम, मुफ़्त वाई-फाई हॉटस्पॉट, सैल्फी प्वाइंट, मैडीकेट्ड फुट मैट, टच्च फ्री हैंड वॉश और सैनीटाईजऱ डिस्पैंससर सैलानियों के लिए उपलब्ध होंगे प्रति स्लॉट में 900 सैलानियों की एंट्री के साथ एक दिन में अधिक से अधिक 2700 सैलानियों को एंट्री की होगी आज्ञा रोगाणू-मुक्त करने के लिए एक समर्पित टीम तैनात 

 

चंडीगढ़/एसएएस नगर, 9 दिसंबर: पंजाब सरकार ने वन एवं वन्य जीव सुरक्षा विभाग के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है और चिडिय़ाघर सैलानियों, कर्मचारियों और पशुओं की सुरक्षा के लिए सख्त कोविड-19 प्रोटोकोल की पालना करते हुए 10 दिसंबर, 2020 से छत्तबीड़ चिडिय़ाघर को दोबारा खोलने के लिए मंज़ूरी दे दी है। यह जानकारी फील्ड डायरैक्टर एम.सी. ज़ूलोजीकल पार्क, छत्तबीड़ डॉक्टर एम. सुधागर ने दी। पहली बार सैलानियों को शेर के बच्चे अमर, अर्जुन और दिलनूर को देखने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही भारतीय लोबड़ी को अपने नए जन्मे बच्चों के साथ पहली बार देखा जा सकेगा। इसके अलावा, चिडिय़ाघर में सैलानियों के लिए बहुत सी नयी सुविधाएं जैसे मॉम एंड बेबी केयर रूम, मुफ़्त वाई-फाई हॉटस्पॉट, कॉफ़ी बूथ, कंट्रोल रूम, सैल्फी प्वाइंट्स, नया आराम घर, परेशानी रहित पार्किंग, टच्च फ्री हैंड वॉश और सैनीटाईजऱ डिस्पेंसर भी दिए जा रहे हैं। लोगों की माँग और सरकार के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए चिडिय़ाघर प्रशासन ने छत्तबीड़ चिडिय़ाघर और आने वाले दर्शकों की सुविधा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर अमल करते हुए चिडिय़ाघर को दोबारा खोलने के लिए तैयारी मुकम्मल कर ली गई है। चिडिय़ाघर में आने वाले सैलानियों, कर्मचारियों, कामगारों और जानवरों की सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए एसओपी के अनुसार प्रोटोकोल और दिशा निर्देशों की पालना नीचे दिखाए अनुसार की गई है: 1. सैलानियों के लिए चिडिय़ाघर सोमवार को छोडक़र हफ़्ते में 6 दिन खोला जाएगा। सैलानियों को सुबह 9:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक (प्रात:काल 9.00 बजे से शाम 5 बजे तक) एंट्री करने की आज्ञा होगी। 2. चिडिय़ाघर में हर समय सैलानियों की आमद सामथ्र्य को यकीनी बनाने के लिए, चिडिय़ाघर में दाखि़ल होने वालों की संख्या को नियमित किया गया है। चिडिय़ाघर में हालात आम की तरह होने तक एक दिन में अधिक से अधिक 2700 सैलानियों को चिडिय़ाघर में एंट्री की आज्ञा दी जायेगी। चिडिय़ाघर में कम समय के लिए ही टिकट उपलब्ध रहेगी, जिससे सामाजिक दूरी को यकीनी बनाया जाएगा। एंट्री के बाद एंट्री टिकट सिफऱ् दो घंटों के लिए वैध होगी। इसका कार्यक्रम नीचे दिए अनुसार होगा: सुबह 09:30-चिडिय़ाघर में एंट्री शुरू सुबह 09:30 से 11:30-अधिक से अधिक 900 सैलानी एंट्री कर सकते हैं प्रात:काल 11:30 से 12:00 - स्वच्छता के लिए अंतराल दोपहर 12:00 से 02:00 बजे - अधिक से अधिक 900 सैलानी एंट्री कर सकते हैं 02:00 बजे से 02:30 बजे - स्वच्छता के लिए अंतराल दोपहर 02:30 बजे से 04:30 बजे - अधिक से अधिक 900 सैलानी एंट्री कर सकते हैं 04:30 बजे - चिडिय़ाघर में एंट्री बंद कर दी जायेगी 3. चिडिय़ाघर में एंट्री, पार्किंग, बैटरी संचालित कारों आदि की टिकटों की ऑनलाईन बुकिंग के द्वारा बुक की जा सकती हैं, जिसके लिए लिंक चिडिय़ाघर की वैबसाईट (ष्द्धद्धड्डह्लड्ढद्बह्म्5शश.द्दश1.द्बठ्ठ) पर दिया गया है। जो सैलानी अपने घर से ऑनलाइन बुकिंग नहीं कर सकते वह क्यू. आर कोड प्रणाली और पीओएस मशीनों के ज़रिये नकद रहित लेन-देन के साथ चिडिय़ाघर के बुकिंग काउन्टर से टिकटें ले सकते हैं। 5. चिडिय़ाघर में इन-डोर सुविधाएं जैसे कि रिपायटल हाऊस, नौकटरनल हाऊस, वाइल्ड लाईफ़ सफारी (लॉयन सफारी एंड डियर सफारी) सैलानियों की सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए अस्थाई तौर पर बंद कर दिए गए हैं। पहले महीने के तजुर्बे और फीडबैक के आधार पर सैलानियों के लिए इन सुविधाओं को पड़ाववार ढंग से खोला जा सकता है। 6. गन्दगी फैलने को रोकने और स्व-सफ़ाई बनाए रखने के लिए चिडिय़ाघर में एंट्री और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर मैडीकेट्ड फुट मैट, टच्च-फ्री सैंसर आधारित हैंड वॉश सुविधाएं प्रदान की गई हैं। इसके अलावा चिडिय़ाघर की सभी महत्वपूर्ण सुविधाओं में टच-फ्री सैनीटाईजऱ डिस्पैंसर स्थापित किए गए हैं। बैरीकेडों, जानवरों के घेेरे से बाहर की रेलिंग, सार्वजनिक सुविधाओं (पखाने, पीने वाले पानी के स्थानों, बारिश वाली पनाह, मनोरंजन प्वाइंट आदि) को सैनीटाईज़ करने के लिए एक समर्पित टीम तैनात की गई है और इनका प्रयोग अंतराल में की जायेगी। 7. चिडिय़ाघर में सिंगल यूज़ प्लास्टिक की आज्ञा नहीं होगी। प्लास्टिक की पानी वाली बोतलों और दवा के कंटेनर को स्क्रीनिंग के बाद आज्ञा दी जा सकती है। 8. सैलानियों के लिए कम से कम ज़रूरी खाने-पीने की चीजें प्रदान करने के लिए चिडिय़ाघर प्रशासन चिडिय़ाघर के अंदर एक कैंटीन चलाने की योजना बना रहा है जिससे खाद्य पदार्थों, बोतलबन्द पीने वाले पानी, चाय, कॉफी आदि को सुरक्षा के सभी नियमों के अधीन मुहैया करवाया जा सके। इसके अलावा चिडिय़ाघर के सैलानियों के लिए दिशा निर्देशों में शामिल हैं: 1. सैलानी तभी चिडिय़ाघर आ सकेंगे जब उनको खाँसी, ज़ुकाम और बुख़ार के लक्षण नहीं होंगे। 2. चिडिय़ाघर में हालात आम की तरह होने तक 65 साल से अधिक उम्र के व्यक्तियों और 5 साल से कम उम्र के बच्चों को चिडिय़ाघर न आने की अपील की जाती है। 3. सभी सैलानी चिडिय़ाघर में दाखि़ल होने पर लाजि़मी तौर पर मास्क पहनेंगे। अगर वह मास्क पहनना भूल जाते हैं, तो वह चिडिय़ाघर के प्रवेश द्वार पर बनाए गए काउन्टर से मास्क खरीद सकते हैं। 4. चिडिय़ाघर में दाखि़ले वाली टिकटें खरीदने के लिए सिफऱ् कैशलैस और ऑनलाइन बुकिंग की आज्ञा होगी। एंट्री टिकट चिडिय़ाघर के अंदर एंट्री से सिफऱ् दो घंटों के लिए ही योग्य होगी। 5. सभी सैलानियों के लिए चिडिय़ाघर के एंट्री द्वार पर लगाए मैडीकेट्ड फुट मैट से गुजऱना लाजि़मी होगा। 6. चिडिय़ाघर में दाखि़ल होने पर सैलानियों के शारीरिक तापमान की लाजि़मी तौर पर जांच की जायेगी। 7. सभी सैलानी चिडिय़ाघर में सामाजिक दूरी के नियमों की पालना करेंगे। 8. चिडिय़ाघर में बैरीकेडें और अन्य सतहों को छूने से बचें, जिससे संक्रमण और गन्दगी की संभावना को कम किया जा सके। 9. सैलानियों की यातायात सिफऱ् निर्धारित यात्री मार्गों पर होनी चाहिए और शॉर्टकट के प्रयोग से गुरेज़ करना चाहिए। 10. सैलानियों को चिडिय़ाघर के खुले क्षेत्रों में थूकने से गुरेज़ करना चाहिए। किसी को भी पान मसाला, गुटका और खैनी चबाने और चिडिय़ाघर में थूकने की आज्ञा नहीं है। 11. कोविड -19 महामारी के कारण क्लोक रूम /सामान /लॉकर रूम की सुविधा अस्थाई तौर पर वापस ली जा रही है। सैलानियों को सलाह दी जाती है कि वह उपरोक्त सुविधा के लिए सामान न लेकर जाएँ। 12. सभी सैलानी सख्त निगरानी के अधीन होंगे और किसी भी दिशा निर्देशों का उल्लंघन करने वाले हरेक व्यक्ति को कम से कम 500 रुपए प्रति उल्लंघन जुर्माना लगाया जायेगा।




Chandigarh, December 8The Punjab Vigilance Bureau have arrested two former officials of Punjab Labour Welfare Board for misappropriation of Government funds worth crores of rupees.Disclosing this here today, an official spokesperson of the state Vigilance Bureau (VB) said on the basis of an enquiry accused Sucha Singh Bandi, former Deputy Welfare Commissioner, Labour Welfare Board and Jagdeep Singh Saini, former Deputy Controller Finance and Accounts (DCFA) have been arrested for  embezzlement and causing huge loss to the state exchequer.  He informed that Hina, Accounts Assistant of this board was arrested earlier by the VB in this case. He added that Hina, in connivance with the two aforesaid officials, have caused huge loss to the government exchequer to the tune of Rs. 1,56,91,063 via internet banking.He further informed that Hina, resident of Manav Enclave, Kharar transferred all this money to her accounts vis-à-vis to the accounts of her relatives through the use of internet banking. She transferred this money through 172 different transactions to multiple bank accounts.  After the probe, it came to light that Sucha Singh Bandi and Jagdeep Singh Saini never cross-checked the cash book with the bank transactions. Therefore, it has been established that these two officials were involved in the misappropriation of Government funds. In this regard, VB had already registered a case against them u/s 409, 420, 465, 467, 468, 471, and 120-B of IPC at Police Station Kharar, S.A.S.Nagar.



सुखबीर को पूछा, ‘‘ई.डी.केसों के कारण मैं कब मेरे लोगों के लिए लडऩे से पीछे हटा?’’

अकाली दल की डूबती नौका को बचाने की ख़ातिर सुखबीर द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी पाकिस्तान के खतरे को दरकिनार करने के लिए निंदा की

चंडीगढ़, 5 दिसम्बर : पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सुखबीर सिंह बादल द्वारा उनकी (मुख्यमंत्री) अनावश्यक आलोचना को तमाशा करार देते हुए आज कहा कि कोई भी ई.डी. केस उनको अपने लोगों की ख़ातिर लडऩे के लिए रोक नहीं सकता। उन्होंने आगे कहा कि बादलों की तरह वह न ही डरपोक हैं और न ही गद्दार।सुखबीर द्वारा उन पर ‘ब्लैकमेल पर समर्पण करना’ और उनके परिवार पर ई.डी. केसों बारे की गई टिप्पणियों का तीखा जवाब देते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि किसानों के साथ विश्वासघात करने के कारण पूरी तरह अलग-थलग्ग पड़े बादल अपने फऱेब को छुपाने के लिए बौखलाहट में आकर ऐसी हरकतें कर रहे हैं।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यह सुखबीर की निराशा का स्तर ही है कि वह पंजाब और देश की सुरक्षा को पाकिस्तान के खतरे को दरकिनार कर रहा है। ऐसा करके सुखबीर सरहदों पर दुश्मनों के साथ लड़ाई के दौरान रोज़ाना अपनी जान गंवाने वाले रक्षा सेनाओं के साथ विश्वासघात कर रहा है।मुख्यमंत्री ने सुखबीर को पूछा, ‘‘क्या आप और आपकी पार्टी सत्ता हासिल करने के लिए इतने भूखे हो गए हो कि आपने पाकिस्तान के हाथों हमारी सुरक्षा को लेकर आँखें बंद कर ली हैं? क्या आप यह कह रहे हो कि पंजाब के साथ लगती सरहद से हमारे बहादुर रक्षा सैनिकों ने जो हथियार, गोली सिक्का और ड्रोन पकड़े, यह सब ख़तरा नहीं हैं।’’ उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सुखबीर पूरी तरह गुम-सुम हो गया है।ई.डी. मामलों के मामले में मुख्यमंत्री ने सुखबीर को पूछा, ‘‘मेरे और मेरे परिवार के खि़लाफ़ ई.डी. मामलों में नयी बात क्या है जो मुझे अचानक डर लगना शुरू हो गया।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि वह और उनका परिवार ई.डी. और अन्य मामलों के खि़लाफ़ वर्षों से लड़ रहे हैं। ऐसा कोई भी केस उनको लोगों की ख़ातिर लडऩे से रोक नहीं सकता।अकाली दल के प्रधान द्वारा उन (मुख्यमंत्री) पर भाजपा के ब्लैकमेल के आगे समर्पण करने के लगाए दोषों का करारा जवाब देते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि क्या आप ब्लैकमेल का अर्थ जानते हो? उन्होंने आगे कहा कि यह आप और आपकी पार्टी थी जो कई सालों से भाजपा के हितों की पैरवी करते रहे और उनके सहयोगी बनकर उनका दबाव बर्दाश्त करते रहे।मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर मैं तथाकथित ब्लैकमेल से डर गया होता, तो मैं विधानसभा में संशोधन बिल न लाता और दिल्ली के मुख्यमंत्री की तरह केंद्रीय खेती कानूनों को बहुत पहले ही नोटीफायी कर देता। इसलिए झूठ बोलने और लोगों को गुमराह करने से परहेज़ करो। उन्होंने कहा कि कोई भी अकालियों की इस झूठी बयानबाज़ी के झाँसे में नहीं आने वाला, जिनकी खेती कानूनों और किसानों के मुद्दों बारे दोगलापन कई बार उजागर हो चुका है। उन्होंने सुखबीर को पूछा कि जब पहले आपने विधानसभा में खेती बिलों का समर्थन किया था तो बाद में राज्य के संशोधन बिलों पर किस के डर से पलटी मारी थी?सुखबीर के झूठ को सिरे से ख़ारिज करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने अकाली नेता को पूछा कि वह कौन सी चेतावनी का जि़क्र कर रहे हैं। क्या आप ऐसा एक भी उदाहरण दे सकते हो जब मैने किसानों को अपना आंदोलन वापस लेने के लिए कहा हो? उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि हरसिमरत बादल की तरह सुखबीर बादल को भी सादी और सरल अंग्रेज़ी की समझ नहीं है। उन्होंने सुखबीर को पूछा कि क्या आपको किसानों और केंद्र सरकार को मसले का जल्द हल ढूँढने की अपील करने और चेतावनी जारी करने के बीच के फर्क की समझ है?मुख्यमंत्री ने कहा कि समूचे बादल परिवार की नौटंकियां और झूठ किसानों या बाकी पंजाबियों की नजऱों में अपना साख बहाल करने में सहायक नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि यह बात किसी से छिपी नहीं है कि बादलों ने पहले खेती कानूनों के कसीदे पढ़े हैं और अब किसानों के मसीहे बनने का ढकोसला कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को प्रकाश सिंह बादल की वह वीडियो भी नहीं भूली जिनमें वह केंद्रीय सरकार के खेती कानूनों का समर्थन कर रहे हैं और न ही केंद्रीय मंत्री के तौर पर हरसिमरत कौर बादल की तरफ से खेती ऑर्डीनैंसों की मंज़ूरी के लिए दी गई हिमायत भूली है और न ही लोगों ने सुखबीर की तरफ से इस मुद्दे पर एक के बाद एक स्टैंड बदले जाने को भूलाया है।



उम्मीदवारों को रैली में हिस्सा लेने के लिए कोविड -19 मुक्त /लक्षण न होने सम्बन्धी सर्टिफिकेट और नो रिस्क सर्टिफिकेट देना होगा

चंडीगढ़, 4 दिसंबर:कोविड-19 महामारी के मद्देनजऱ और स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रोजग़ार उत्पत्ति, कौशल विकास एवं प्रशिक्षण विभाग और जि़ला प्रशासन, लुधियाना ने एक नये स्थान पर सेना भर्ती रैली करवाने के लिए सेना अधिकारियों के साथ तालमेल किया है। इस साल, सेना भर्ती रैली 7 दिसंबर, 2020 से 22 दिसंबर, 2020 तक ए.एस. कॉलेज कलाल माजरा, खन्ना, लुधियाना में की जा रही है। यह भर्ती रैली विशेष तौर पर मोगा, रूपनगर, एस.ए.एस.नगर (मोहाली) और लुधियाना जिलों से सम्बन्धित नौजवानों के लिए करवाई जा रही है।भर्ती कैंप को उचित सुरक्षा मापदण्डों के साथ सुचारू ढंग से चलाने के लिए सभी उम्मीदवारों को रैली वाली जगह पर रिपोर्टिंग से पहले कोविड-19 मुक्त /लक्षण न होने सम्बन्धी सर्टिफिकेट और नो रिस्क सर्टिफिकेट देना होगा।इस प्रक्रिया को उम्मीदवारों के लिए आसान बनाने के लिए रोजग़ार उत्पत्ति, कौशल विकास और प्रशिक्षण विभाग ने सम्बन्धित जिलों के प्रशासन के साथ तालमेल किया है। सम्बन्धित जिलों के सिविल सर्जन/मैडीकल अफ़सर को यह सुनिश्चित करने कि रैली में भाग लेने वाले उम्मीदवारों को पहल के आधार पर सर्टिफिकेट जारी किये जाएँ, सम्बन्धी हिदायतें जारी की गई हैं।सिफऱ् वही उम्मीदवार रैली में भाग लेने के योग्य होंगे जिन्होंने आर्मी के वैब पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया होगा। उम्मीदवारों को 22 नवंबर से 6 दिसंबर, 2020 तक ई-मेल के द्वारा भेजा गया प्रवेश पत्र लाना लाजि़मी होगा। प्रवेश पत्र में समय और स्थान सम्बन्धी जानकारी दी गई होगी।ई.जी.एस.डी.टी. विभाग आम्र्ड फोर्सिज़, सैंट्रल आम्र्ड पैरा मिलिटरी फोर्सिज़ और पुलिस में भर्ती के लिए ग्रामीण बेरोजग़ार नौजवानों की भर्ती से पहले के प्रशिक्षण के लिए पंजाब भर में सैंटर फॉर ट्रेनिंग एंड इम्प्लायमैंट ऑफ पंजाब यूथ (सी-पॉइट) अधीन 14 कैंप चला रहा है।यह रैली पंजाब के नौजवानों को देश की सेवा करने का मौका प्रदान करेगी। उम्मीदवारों को पूरे उत्साह के साथ रैली में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अधिक जानकारी के लिए आवेदक हेल्पलाइन नंबर - 0161 2412123 पर संपर्क कर सकते हैं।


चंडीगढ़ 3 दिसंबर पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने शिरोमणि अकाली दल के सरपरस्त प्रकाश सिंह बादल द्वारा  पदम विभूषण अवार्ड वापस करने के निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि बेशक उन्होंने यह फैसला राजनीतिक मजबूरी व भूतकाल में अपनी पार्टी द्वारा इन काले खेती कानूनों का साथ देने की की बड़ी गलतियों पर पर्दा डालने की कोशिश के तौर पर लिया है पर फिर भी उनका यह फैसला स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि बादल के इस फैसले से किसानों के संघर्ष को और बल मिलेगा। पर साथ ही उन्होंने कहा कि इसका फायदा तभी है अगर भाजपा की सरकार भी किसानों के मसले को गंभीरता से लें वह सत्ता की मदहोशी का त्याग कर किसानों की मांगों का हल करें।  जाखड़ ने कहा कि जब इन काले कानूनों संबंधी ऑर्डिनेंस आए थे तो यही अकाली दल व इसके नेता इन कानूनों को किसानों के लिए वरदान बता रहे थे। उन्होंने कहा कि श्री बादल ने अपने पुत्र के सत्ता  मोह में आ कर तब इन कानूनों को किसान के हित में बताकर जो गलती की थी अब उसी गलती को ढकने की कोशिश उनके द्वारा की गई है । जाखड़ ने कहा कि केंद्र सरकार का अड़ियल रवैया पूरे देश के विकास व संविधान के संघीय ढांचे के लिए खतरा है। उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार से आग्रह किया कि वे देशभर के किसानों, बुद्धिजीवियों के काले खेती कानूनों के प्रति रोष को समझे व किसानों की मांगों का हल करके इन कानूनों को वापस लिया जाए।



यूनीलेटरल डिसीज़ंस बाईलेटरल लॉसिस पुस्तक की रिलीज़

चंडीगढ़, 3 दिसंबर: अंतरराष्ट्रीय वाघा-अटारी व्यापारिक रास्ता भारत और पाकिस्तान के दरमियान केवल एक सडक़ ही नहीं है बल्कि दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच शांतीपूर्ण संबंधों और ख़ुशहाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। केंद्रीय एशिया तक इसकी पहुँच पंजाबियों की आर्थिक और सामाजिक उन्नति के लिए अहम है। यह खुलासा वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने यहाँ अपने सरकारी निवास पर ‘‘यूनीलेटरल डिसीज़ंस बाईलेटरल लॉसिस’’ पुस्तक रिलीज करते समय किया।नयी दिल्ली आधारित अनुसंधान और नीति माहिर संस्था ब्यूरो ऑफ रिर्सच ऑन इंडस्ट्री एंड इक्नॉमिक फंडामैंटल्स (बी.आर.आई.ई.एफ.) के डायरैक्टर अफ़ाक हुसैन और एसोसिएट डायरैक्टर निकिता सिंगला द्वारा लिखी गई इस पुस्तक में अंतरराष्ट्रीय व्यापार घाटे को घटाने के लिए दिखाए गए नुक्तों बारे जानकारी देते हुए मनप्रीत सिंह बादल ने पड़ोसी मुल्कों के साथ व्यापारिक संबंधों की मौजूदा स्थिति पर चिंता ज़ाहर की। वित्त मंत्री ने कहा कि मैं पंजाब सरकार की तरफ से भारत सरकार के समक्ष वाघा-अटारी व्यापार की बहाली के मामले की पैरवी करूँगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में व्यापार की अथाह संभावनाएं हैं।गौरतलब है कि फरवरी 2019 से, जम्मू-कश्मीर के जिला पुलवामा में आतंकवादी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के संबंधों में खटास आई है। 1996 से पाकिस्तान को व्यापार के लिए सबसे पसन्दीदा देश (मोस्ट फेवर्ड नेशन) के दिए दर्जे को भारत सरकार ने वापस लेने का फ़ैसला किया।  मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि जर्मन राजनीतिज्ञ ओटो वॉन बिस्मार्क ने एक बार टिप्पणी की थी कि - बर्लिन को जाने वाली सडक़ व्याना से होकर गुजऱती है। मैं महसूस करता हूँ कि नयी दिल्ली और इस्लामाबाद के दरमियान सडक़ पंजाब में से होकर गुजऱती है। साझी सीमा के साथ नज़दीकी के मद्देनजऱ पंजाबियों का बहुत कुछ दांव पर है। वाघा-अटारी व्यापार ने इस साझी सीमा को सहयोग और अंतर-निर्भरता का केंद्र बनाया था। व्यापार के निलंबन के कारण ज़मीनी स्तर पर हुए नुक्सान की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि समय के साथ-साथ व्यापार सरहदी इलाकों की आर्थिकता के बचाव के लिए कैसे महत्वपूर्ण बन गया है, जिसके बहाल होने से न सिफऱ् ख़ुशहाली आयेगी बल्कि भारत और पाकिस्तान के दरमियान शांतीपूर्ण संबंधों का आधार बंधेगा। इस पुस्तक पर ऑनलाइन चर्चा के दौरान अमृतसर से संसद मैंबर स. गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि अमृतसर के पास पर्यटन के अलावा वास्तव में कोई अन्य उद्योग नहीं है, जिसको कोविड-19 के कारण बुरी तरह मार पड़ी है। उन्होंने भारत सरकार को वाघा-अटारी व्यापार को अमृतसर के लिए एक पूर्ण विकसित उद्योग के तौर पर विचारने की अपील की, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 25,000 से अधिक परिवारों को रोजग़ार मिलता है। उन्होंने कहा कि इस सरहदी जिले के लिए व्यापार की बहाली बेहद अहम है।अपनी किताब में, लेखकों ने हवाला दिया कि साल 2018-19 में, भारत और पाकिस्तान के दरमियान द्विपक्षीय व्यापार 2.5 बिलियन अमरीकी डॉलर था - भारत से पाकिस्तान को निर्यात 2.06 बिलियन अमरीकी डॉलर और भारत द्वारा पाकिस्तान से आयात 495 मिलियन अमरीकी डॉलर था। भारत द्वारा एम.एफ.एन. (मोस्ट फेवर्ड नेशन) का दर्जा वापिस लेने और 200 प्रतिशत ड्यूटी लगाने के फ़ैसले से पाकिस्तान द्वारा भारत को निर्यात, जो 2018 में प्रति माह औसतन 45 मिलियन अमरीकी डॉलर था, मार्च-जुलाई 2019 में घटकर प्रति माह 2.5 लाख अमरीकी डॉलर रह गई, जब तक पाकिस्तान द्वारा व्यापार को पूरी तरह निलंबित नहीं किया गया।इस किताब में व्यापार निलंबन के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों संबंधी भी शोधपूर्ण जानकारी दी गई है। जैसे कि व्यापारिक भाईचारा और नागरिक, जो सरकार के फ़ैसलों का समर्थन करते हैं, इस पुस्तक में अंतरराष्ट्रीय व्यापार की अनुपस्थिति में पंजाब की सरहदी आर्थिकता को कायम रखने के लिए कारगर उपायों की पहचान करने की माँग की गई है। लेखकों की तरफ से अमृतसर में लोगों के साथ की गई बातचीत के अनुसार इस शहर में 9,000 से अधिक परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए क्योंकि उनकी रोज़ी-रोटी द्विपक्षीय व्यापार पर निर्भर है; और स्थानीय आर्थिकता को प्रत्येक माह तकरीबन 30 करोड़ रुपए के दो-तिहाई हिस्से का नुक्सान बर्दाश्त करना पड़ रहा है।


चंडीगढ़, 1 दिसंबरः भ्रष्टाचार के दोष में शामिल पुलिस मुलाजिमों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करते हुये पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने आज वीडियो सबूतों के आधार पर अमृतसर जिले के चाटीविंड थाने के सात पुलिस मुलाजिमों के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम कानून और अपराधिक साजिश रचने के दोषों के अंतर्गत केस दर्ज किया है और दोषी पुलिस मुलाजिमों में से चार को गिरफ्तार किया है। इस सम्बन्धी जानकारी देते हुये ब्यूरो के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह केस अमृतसर रेंज की तरफ से की गई जांच के उपरांत दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि चाटीविंड गाँव के रहने वाले अवतार सिंह और कंवलप्रीत सिंह राज खालसा खेती स्टोर चला रहे हैं और 22 अगस्त, 2018 को इसी गाँव के एक व्यक्ति गुरहरप्रीत सिंह ने उनकी दुकान के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे को खराब कर दिया था। इसके बाद कंवलप्रीत सिंह बलदेव सिंह, सुखवंत सिंह आदि दोषी गुरहरप्रीत सिंह के घर के बाहर जा पहुँचे। इसके बाद गुरहरप्रीत सिंह ने अपने अन्य साथियों के साथ कंवलप्रीत सिंह, बलदेव सिंह और सुखवंत सिंह पर हमला कर दिया और उनको जख्मी करके मौके से फरार हो गए। प्रवक्ता ने आगे बताया कि इस केस में पुलिस की तरफ से गुरहरप्रीत और अन्यों खिलाफ आई.पी.सी. की धारा 323, 324, 427, 148, 149 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था और पड़ताल के दौरान पुलिस की तरफ से उक्त मामले में दोषियों के विरुद्ध आई.पी.सी. की धारा 326 भी जोड़ दी गई। बाद में यह दोषी पुलिस मुलाजिमों में ए.एस.आई. महिन्दर सिंह, ए.एस.आई. कुलदीप सिंह (अब मृतक), हवलदार पलविन्दर सिंह, हवलदार राम सिंह, सिपाही राजबीर सिंह, सिपाही हरपिन्दर सिंह, सिपाही पलविन्दर सिंह और पंजाब होम गार्ड लाटा सिंह ने शिकायतकर्ता बलदेव के भाई सुखदेव सिंह के पास से विभिन्न मौकों पर 65,000 रुपए की रिश्वत ली थी और उसके पास दोषी पुलिस मुलाजिमों के खिलाफ वीडियो सबूत हैं। विजीलैंस ब्यूरो को शिकायतकर्ता की तरफ से शिकायत पर जांच के दौरान उपरोक्त पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ रिश्वत के दोष सही पाये गए और ब्यूरो ने हवलदार राम सिंह, सिपाही पलविन्दर सिंह, सिपाही हरपिन्दर सिंह और पंजाब होम गार्ड के लाटा सिंह को खिलाफ केस दर्ज करने के बाद गिरफ्तार कर लिया है जबकि बाकी मुलाजिमों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की सिफारिश भी की जायेगी।



सुलतानपुर लोधी/ डेरा बाबा नानक, 30 नवम्बर:पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केंद्र सरकार को कहा है कि वह खेती विरोधी कानूनों को रद्द करने की माँग कर रहे किसानों की माँगों के प्रति अडिय़ल रवैया क्यों अपना रही है और उनकी बात क्यों नहीं सुनी जा रही।मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘लोगों की बात सुनना सरकारों का फर्ज होता है’। दोनों ऐतिहासिक स्थानों सुल्तानपुर लोधी और डेरा बाबा नानक में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘यदि अनेकों राज्यों के किसान केंद्र सरकार के खेती सम्बन्धी कानूनों के विरुद्ध रोष-प्रदर्शनों में तीखा संघर्ष कर रहे हैं तो लाजिमी है कि वह इन कानूनों के कारण चिंता में हैं’। उन्होंने अपनी सरकार की किसानों के हक में डटकर खड़े होने की वचनबद्धता को भी दोहराया।प्रधानमंत्री की तरफ से नये कानूनों को किसानों के लिए लाभदायक बताने के स्टैंड पर कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री शुरू से ही ऐसा कह रहे हैं जिस कारण पंजाब को अपने किसानों के हकों की रक्षा के लिए बिल पास करने पड़े। उन्होंने राज्यपाल की तरफ से बिलों को राष्ट्रपति के पास भेजने की जगह अपने पास रखने पर सवाल उठाते हुये कहा कि मुख्यमंत्री के सलाहकारों की नियुक्ति के समय पर भी पिछले साल राज्यपाल की तरफ से ऐसा किया गया था।न्युनतम खरीद मूल्य और आढ़ती व्यवस्था को पंजाब के सफल खेती मॉडल का आधार बताते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों और आढ़तियों के बीच गहरा रिश्ता है, जिस कारण ऐसी सभ्य व्यवस्था को तबदील करने की क्या जरूरत है? उन्होंने कहा कि ‘क्या आढ़तियों की जगह लेने वाले कॉर्पोरेट घराने मुश्किल घड़ी में किसानों की बाजू पकड़ेंगे?कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि ‘गुरू साहिब की तरफ से छोटे किसानों को खास महत्ता दी गई थी और राज्य की 75 प्रतिशत किसानी के पास 5 एकड़ से कम जमीन है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के काले कानूनों से छोटे और सीमांत किसान कहीं के नहीं रहेंगे, जिस कारण किसान कड़ाकेे की ठंड और कोरोना के खौफ में भी हरियाणा पुलिस के तशद्दद को बरदाश्त करते हुए दिल्ली की सरहद में प्रदर्शन कर रहे हैं।करतारपुर गलियारे संबंधी बोलते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के लिए यह सही समय है कि इसको दोबारा खोला जाये। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान इसको खोल सकता है तो हम क्यों नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे यह समझ नहीं आ रही कि केंद्र सरकार इस गलियारे को खोल क्यों नहीं रही।देश को अंदरूनी और बाहरी चुनौतियों संबंधी बोलते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि समय की सबसे बड़ी जरूरत है कि देश को सांप्रदायिक राह पर बाँटने का यत्न करने वाली शक्ति को एकता से रोका जाये। उन्होंने चीन की सरहद पर देश की एकता और अखंडता की खातिर जानें गवाने वाले शहीद गुरतेज सिंह का जिक्र करते हुये कहा कि पंजाब के इस महान पुत्र ने एल ए सी पर चीन के साथ हाल ही में हुई झड़पों में 12 चीनी सैनिकों को मारकर खुद शहीदी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल एकजुट भारत ही देश के दुश्मणों के साथ लड़ सकता है।उन्होंने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी ने सर्व सांझेदारी का संदेश दिया था, जिसकी वर्तमान समय में सबसे बड़ी सार्थिकता है।पहले सिख गुरू श्री गुरु नानक देव जी के 550वीं शताबदी समागमों की संपूर्णता और 551वें प्रकाश पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री पंजाब कैप्टन अमरिन्दर सिंह दोनों स्थानों का दौरा कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विश्व भर की संगत को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की बधाई देते हुये कहा कि श्री गुरु नानक देव जी की सदियों पुरानी शिक्षाएं आज के समय में भी उतनी ही सार्थक सिद्ध हो रही हैं और लोगों को मानवता की भलाई के लिए प्यार, शांति और हमदर्दी के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सिख दुनिया के कोने-कोनो में बसते हैं और इसी लिए श्री गुरु नानक देव जी के दर्शन ‘सरबत दा भला’ का दुनिया के कोने-कोनेे में प्रचार किया जा रहा है।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि सुल्तानपुर लोधी और डेरा बाबा नानक को योजनाबद्ध ढंग से शहर के तौर पर विकसित करने के लिए अन्य नये विकास कामों की शुरूआत करने के इलावा चल रहे विकास कामों की रफ्तार को और तेज किया जायेगा। उन्होंने विधायक नवतेज सिंह चीमा को यह भी कहा कि यदि सुल्तानपुर लोधी में अन्य नये विकास प्रोजेक्टों की जरूरत है तो उस सम्बन्धी प्रस्ताव बना कर भेजा जाये।इस अवसर पर सुल्तानपुर लोधी से विधायक नवतेज सिंह चीमा की तरफ से मुख्यमंत्री पंजाब कैप्टन अमरिन्दर सिंह का श्री गुरु नानक देव जी के 550वें शताबदी समागमों को बड़े स्तर पर मनाने के लिए दिल से धन्यवाद किया। विधायक की तरफ से कैप्टन अमरिन्दर सिंह से अपील की गई कि रेल कोच फैक्ट्री के साथ लगती कॉलोनियों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए फंड जारी किये जाएँ क्योंकि इन कॉलोनियों में 25000 से ज्यादा लोग रह रहे हैं।श्री गुरु नानक देव जी के जीवन और दर्शन को सबके लिए प्रकश स्तम्भ करार देते हुये पंजाब प्रदेस कांग्रेस कमेटी के प्रधान सुनील जाखड़ ने कहा कि हम सबको खुशहाल और स्वस्थ्य समाज की सृजना करने के लिए श्री गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को अपनाना चाहिए।नामधारी संस्था के प्रमुख सतगुरू उदय सिंह ने कहा कि पंजाबी हमेशा ही समाज के हर वर्गों के कल्याण के लिए अग्रणी रहे हैं और पंजाबियों ने एक बार फिर यह कोविड-19 महामारी के दौरान हर जरूरतमंद लोगों को लंगर खिला कर और मदद करके सिद्ध कर दिया है। उनकी तरफ से राज्य सरकार द्वारा मुश्किल घड़ी का सामना कर रहे लोगों खास कर प्रवासी मजदूरों को सेहत और आवाजायी की सहूलतें मुहैया करवाने के लिए किये गए अथक यत्नों की भी भरपूर सराहना की गई।इससे पहले मुख्यमंत्री ने सुल्तानपुर लोधी के गुरुद्वारा श्री बेर साहिब में माथा टेका, जहाँ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मैंबर जत्थेदार सरवण सिंह कुलार और बीबी गुरप्रीत कौर रूही ने मुख्यमंत्री को सिरोपा भेंट किया। मुख्यमंत्री ने बूढ्ढा दल के प्रमुख बाबा बलबीर सिंह, संत बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल, तख्त श्री पटना साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह और अन्य धार्मिक शख्सियतों को भी सम्मानित किया। गुरुद्वारा श्री बेर साहिब में कैप्टन अमरिन्दर सिंह के साथ पटियाला से संसद मैंबर परनीत कौर, खडूर साहिब से संसद मैंबर जसबीर सिंह गिल डिम्पा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू, विधायक राणा गुरजीत सिंह, नवतेज सिंह चीमा और सुखपाल सिंह भुल्लर भी मौजूद थे।इस मौके पर अन्यों के अलावा पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रधान एच.एस. हंसपाल, विधायक हरमिन्दर सिंह गिल, हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया, सुखपाल सिंह भुल्लर, सुखविन्दर सिंह डैनी, बी.एस. धालीवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री जोगिंदर सिंह मान के अलावा डिविजनल कमिश्नर राज कमल चैधरी, डायरैक्टर सामाजिक सुरक्षा विपुल उज्जवल, डिप्टी कमिश्नर कपूरथला दीप्ति उप्पल, एस.एस.पी कंवरदीप कौर और एस.एस.पी होशियारपुर नवजोत सिंह माहल भी मौजूद थे।इसके बाद डेरा बाबा नानक में मुख्यमंत्री ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रधान सुनील जाखड़, संसद मैंबर परनीत कौर, कैबिनेट मंत्रियों सुखजिन्दर सिंह रंधावा और अरुणा चैधरी समेत गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब डेरा बाबा नानक में माथा टेका। मुख्यमंत्री द्वारा रुमाला साहिब और चैर साहिब भेंट किया गया और देग करवाई।मुख्यमंत्री को श्री दरबार साहिब डेरा बाबा नानक के मैनेजर हरविन्दर सिंह, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की कार्यकारी समिति के मैंबर अमरीक सिंह शाहपुर और एस.जी.पी.सी. मैंबर जोगिंदर कौर द्वारा सिरोपा भेंट किया गया।कैबिनेट मंत्री सुखजिन्दर सिंह रंधावा ने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी ने खेती को प्राथमिक महत्ता दी और उन्होंने खुद भी खेती की, इसलिए पंजाब के लोगों का इस क्षेत्र के साथ धार्मिक सम्बन्ध है। करतारपुर गलियारा खोले जाने का सेहरा मुख्यमंत्री के सिर बाँधते हुए स. रंधावा ने आगे कहा कि यह गलियारा शांति और मानवता की एकता का प्रतीक होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पंजाब के पानी की रक्षा की और अब केंद्र के काले कानूनों के विरुद्ध संघर्ष में फिर आगे आए हैं। मुख्यमंत्री की तरफ से ‘सुहावे थाँ’ श्री गुरु नानक देव जी बलैस्ड ट्रेल’ नामक पुस्तक भी जारी की गई जिसमें गुरू जी के ‘चरण स्पर्श’ प्राप्त गाँवों और कस्बों में चलाए गए प्रोजेक्टों का विवरण दिया गया है। इस मौके पर वैटिकन सिटी के पोप द्वारा दिया संदेश, कैथोलिक चर्च, धारीवाल के पादरी जोसफ मैथ्यूज द्वारा पढ़ा गया।इस मौके पर ज्ञानी कुलविन्दर सिंह की तरफ से अरदास की गई और श्री दरबार साहिब, अमृतसर के पूर्व हजूरी रागी भाई जसवंत सिंह की तरफ से शब्द कीर्तन के साथ संगत को निहाल किया गया।इस मौके पर संसद मैंबर परनीत कौर, कैबिनेट मंत्री अरुणा चैधरी, सुंदर शाम अरोड़ा और साधु सिंह धर्मसोत, विधायक फतेहजंग सिंह बाजवा, बरिन्दरमीत सिंह पाहड़ा, संतोख सिंह भलीपुर, बलविन्दर सिंह लाडी, संगत सिंह गिलजियां, दर्शन सिंह बराड़, अमरीक सिंह ढिल्लों, कुलबीर सिंह जीरा, इन्दु बाला, जोगिंदर पाल, तरसेम सिंह डीसी और दविन्दर सिंह घुबाया और पूर्व मंत्री मास्टर मोहन लाल भी मौजूद थे।मुख्यमंत्री द्वारा इस ऐतिहासिक समागम के दौरान संत समाज के अलावा अहमदिया जमात के प्रमुख तनवीर खादिम को सम्मानित किया गया।



ਕੁੰਡਲੀ ਬਾਰਡਰ(ਦਿੱਲੀ),29 ਨਵੰਬਰ  - ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਦੇ ਗ੍ਰਹਿ ਮੰਤਰੀ ਅੰਮਿਤ ਸ਼ਾਹ ਵਲੋਂ ਸ਼ਰਤਾਂ ਤਹਿਤ ਗੱਲਬਾਤ ਦੇ ਕਰਨ ਦੇ ਦਿੱਤੇ ਸੱਦੇ ਨੂੰ ਰੱਦ ਕਰਦਿਆਂ 30 ਕਿਸਾਨ ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਵਲੋਂ ਕੁੰਡਲੀ(ਸਿੰਘੂ)ਅਤੇ ਬਹਾਦੁਰਪੁਰ ਬਾਰਡਰ ਵਿਖੇ ਦੋਨਾਂ ਸਥਾਨਾਂ ਉੱਤੇ ਦਿੱਲੀ ਦੀ ਘੇਰਾਬੰਦੀ ਜਾਰੀ ਰੱਖਣ ਅਤੇ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਦਿਨਾਂ ਨੂੰ ਦਿੱਲੀ ਦੇ ਬਾਕੀ ਤਿੰਨੋਂ ਮੁੱਖ ਹਾਈਵੇਅ ਵੀ ਬੰਦ ਕਰਨ ਦਾ ਐਲਾਨ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ।ਜਥੇਬੰਦੀਆਂ ਵਲੋਂ ਸਾਂਝੀ ਮੀਟਿੰਗ ਨੇ ਖੇਤੀ ਕਾਨੂੰਨਾਂ ਰੱਦ ਕਰਵਾਉਣ, ਬਿਜਲੀ ਐਕਟ 2020 ਤੇ ਪਰਾਲੀ ਸਾੜਨ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਦੇ ਨਾਂ ਹੇਠ ਜਾਰੀ ਕੀਤੇ ਲੋਕ ਵਿਰੋਧੀ ਨੋਟੀਫਿਕੇਸ਼ਨ ਰੱਦ ਕਰਵਾਉਣ ਅਤੇ ਲੋਕ ਪੱਖੀ ਬੁੱਧੀਜੀਵੀਆਂ ਨੂੰ ਰਿਹਾਅ ਕਰਨ ਸਮੇਤ 8 ਮੰਗਾਂ ਦੇ ਹੱਲ ਲਈ ਸੰਘਰਸ਼ ਨਿਰੰਤਰ ਜਾਰੀ ਰੱਖਣ ਦਾ ਫੈਸਲਾ ਕੀਤਾ ਗਿਆ।ਇਸ ਮੌਕੇ ਦੋਨੋਂ ਚੱਲ ਰਹੇ ਮੋਰਚਿਆਂ ਦੀ ਸਟੇਜ ਸੰਚਾਲਨਾ ਲੲੀ 5-5 ਮੈਂਬਰੀ ਕਮੇਟੀਆਂ ਦਾ ਗਠਨ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਅਤੇ ਹਰੇਕ ਜਥੇਬੰਦੀ ਦੇ 20-20 ਮੈਂਬਰਾਂ ਅਧਾਰਿਤ 600 ਮੈਂਬਰੀ ਵਲੰਟੀਅਰ ਟੀਮ ਵੀ ਬਣਾਈ ਗਈ,ਜੋ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਨੂੰ ਵਿਧੀਬੱਧ ਕਰੇਗੀ ਤੇ ਚੱਲ ਰਹੇ ਅੰਦੋਲਨ ਨੂੰ ਢਾਹ ਲਾਉਣ ਲਈ ਸਰਕਾਰੀ ਇਸ਼ਾਰੇ ਉੱਤੇ ਬਾਹਰ ਤੋਂ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਘੁੱਸਪੈਠ ਉੱਤੇ ਨਿਗਾਹ ਰੱਖੇਗੀ।ਆਗੂਆਂ ਨੇ ਕਿਹਾ ਕਿ ਮੋਦੀ ਦੇ ਇਸ਼ਾਰੇ ਉੱਤੇ ਹਰਿਆਣਾ ਦੀ ਖੱਟਰ ਸਰਕਾਰ ਅਤੇ ਮੀਡੀਆ ਚੈਨਲਾਂ ਵਲੋਂ ਅੰਦੋਲਨ ਵਿੱਚ ਖਾਲਿਸਤਾਨੀ ਤੱਤਾਂ ਦੀ ਘੁੱਸਪੈਠ ਦੱਸਣਾਂ ਅਸਲ ਵਿੱਚ ਕਿਸਾਨੀ ਅੰਦੋਲਨ ਨੂੰ ਤਸੱਦਦ ਨਾਲ ਦਬਾਉਣ ਦੀ ਸਰਕਾਰੀ ਮਨਸ਼ਾ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਸਰਕਾਰ ਨੂੰ ਚੇਤਾਵਨੀ ਦਿੱਤੀ ਕਿ ਸਰਕਾਰ ਅੰਦੋਲਨ ਨੂੰ ਘੱਟ ਅੰਗ ਰਹੀ ਹੈ,ਜਦਕਿ ਸਰਕਾਰ ਦੀ ਸੋਚਨੀ ਤੋਂ ਕਿਸਾਨ ਅੰਦੋਲਨ ਕਿਤੇ ਵੱਡਾ ਹੈ। ਇਹ ਅੰਦੋਲਨ ਪੰਜਾਬ ਦਾ ਨਾਂ ਹੋ ਕੇ ਭਾਰਤ ਦੇ ਹਰ ਕਿਸਾਨ ਮਜ਼ਦੂਰ ਦਾ ਬਣ ਚੁੱਕਾ ਹੈ।ਉਨ੍ਹਾਂ ਮੰਗ ਕੀਤੀ ਕਿ ਬੁਰਾੜੀ ਮੈਦਾਨ ਵਿੱਚ ਸਰਕਾਰੀ ਘੇਰੇ ਵਿੱਚ ਲੲੀਆਂ ਟਰੈਕਟਰ ਟਰਾਲੀਆਂ, ਕਾਰਕੁੰਨਾ ਨੂੰ ਫੌਰੀ ਤੌਰ ਉੱਤੇ ਛੱਡਿਆ ਜਾਵੇ ਅਤੇ ਹਰਿਆਣਾ, ਦਿੱਲੀ ਸਮੇਤ ਕਿਸਾਨਾਂ ਉੱਪਰ ਦਰਜ ਕੀਤੇ ਗਏ ਪਰਚੇ ਤੁਰੰਤ ਰੱਦ ਕੀਤੇ ਜਾਣ।ਉਨ੍ਹਾਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਪਿੰਡਾਂ ਤੋਂ ਹਜ਼ਾਰਾਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਚੱਲ ਪਏ ਹਨ।ਲੋਕ ਪਿੰਡਾਂ ਵਿਚੋਂ ਰਾਸ਼ਨ, ਭਾਂਡੇ ਟੀਂਡੇ,ਕੱਪੜੇ,ਪੈਸਾ ਧੇਲਾ ਤੇ ਹੋਰ ਜ਼ਰੂਰੀ ਰਸਦ ਭੇਜ ਰਹੇ ਹਨ। ਬੀਮਾਰਾਂ ਕਿਸਾਨਾਂ ਲਈ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਵੱਲੋਂ ਕੈਂਪ ਲਗਾਏ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ। ਨੌਜਵਾਨ ਟਰੈਕਟਰਾਂ ਉੱਤੇ ਮੋਦੀ ਦੀ ਹਕੂਮਤ ਵਿਰੁੱਧ ਉੱਚੀ ਆਵਾਜ਼ ਵਿੱਚ ਡੈੱਕ ਲਗਾ ਕੇ ਗੀਤਾਂ ਉੱਤੇ ਨੱਚਦੇ ਹੋਏ ਕੇਂਦਰੀ ਸਰਕਾਰ ਨੂੰ ਚੈਲਿੰਜ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ। ਮੋਰਚਿਆਂ ਵਾਲੀ ਥਾਂ ਉੱਤੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਵਾਲੇ ਘਰਾਂ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਅੰਦੋਲਨਕਾਰੀਆਂ ਲਈ ਆਪਣੇ ਵਾਸਰੂਮ ਨਹਾਉਣ ਆਦਿ ਲਈ ਖੋਹਲ ਦਿੱਤੇ ਹਨ। ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਨਾਲ ਲਿਆਂਦੇ ਰਾਸ਼ਨ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਨਹੀਂ ਪੈ ਰਹੀ। ਵੱਖ-ਵੱਖ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਵਲੋਂ ਲੰਗਰ ਅਟੁੱਟ ਚਲਾਇਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ।ਇਸ ਮੌਕੇ ਕਿਰਤੀ ਕਿਸਾਨ ਯੂਨੀਅਨ ਦੇ ਸੂਬਾਈ ਪ੍ਰਧਾਨ ਨਿਰਭੈ ਸਿੰਘ ਢੁੱਡੀਕੈ,ਬੀਕੇਯੂ ਕਾਦੀਆਂ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਹਰਮੀਤ ਸਿੰਘ ਕਾਦੀਆਂ,ਕ੍ਰਾਂਤੀਕਾਰੀ ਕਿਸਾਨ ਯੂਨੀਅਨ ਦੇ ਸੁਰਜੀਤ ਸਿੰਘ ਫੂਲ, ਬੀਕੇਯੂ ਡਕੌਂਦਾ ਦੇ ਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਧਨੇਰ, ਦੁਆਬਾ ਕਿਸਾਨ ਸੰਘਰਸ਼ ਕਮੇਟੀ ਦੇ ਮਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਰਾਏ,ਬੀਕੇਯੂ ਰਾਜੇਵਾਲ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਬਲਬੀਰ ਸਿੰਘ ਰਾਜੇਵਾਲ, ਜਮਹੂਰੀ ਕਿਸਾਨ ਸਭਾ ਦੇ ਸਤਨਾਮ ਸਿੰਘ ਅਜਨਾਲਾ, ਬੀਕੇਯੂ ਕ੍ਰਾਂਤੀਕਾਰੀ ਦੇ ਦਰਸ਼ਨਪਾਲ, ਬੀਕੇਯੂ ਹਰਿਆਣਾ ਦੇ ਗੁਰਨਾਮ ਸਿੰਘ ਕੁਦਨੀ,ਨਰਮਦਾ ਬਚਾਉ ਅੰਦੋਲਨ ਦੀ ਆਗੂ ਮੇਲਾ ਪਾਟਕਰ, ਪੰਜਾਬ ਕਿਸਾਨ ਯੂਨੀਅਨ ਦੇ ਕੰਵਲਜੀਤ ਸਿੰਘ, ਕਿਸਾਨ ਸੰਘਰਸ਼ ਕਮੇਟੀ ਦੇ ਕੰਵਲਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ ਪੰਨੂੰ,ਪੇਂਡੂ ਮਜ਼ਦੂਰ ਯੂਨੀਅਨ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਕਸ਼ਮੀਰ ਸਿੰਘ ਘੁੱਗਸ਼ੋਰ,ਲੇਖਕ ਤੇ ਗਾਇਕ ਬੀਰ ਸਿੰਘ ਆਦਿ ਨੇ ਸੰਬੋਧਨ ਕੀਤਾ।



चंडीगढ़, 26 नवम्बर: दिल्ली की तरफ कूच कर रहे प्रदर्शनकारी किसानों को रोकने की बेकार कोशिश करते हुए हरियाणा की तरफ से क्रूर बल का प्रयोग करने की कड़ी निंदा करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने इस कदम को किसानों के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने दिल्ली सरकार को खेती कानूनों के मुद्दे पर अपनी चिंताएं ज़ाहिर करने के लिए शांतमयी ढंग से बैठने के लिए किसानों के लिए जगह मुकर्रर करने की अपील की है।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने पिछले महीने उनके नेतृत्व में पंजाब के विधायकों द्वारा जंतर मंतर पर अलॉट की गई जगह पर संकेतक धरना दिए जाने को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा ही कुछ किसानों के लिए भी किया जा सकता है जिससे वह अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करते हुए आवाज़ बुलंद करने के साथ-साथ राष्ट्रीय मीडिया के साथ विचार साझे कर सकें।मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या बीते समय में भाजपा ने रामलीला मैदान में रोष रैलियाँ नहीं की थीं? क्या किसानों को अपनी राष्ट्रीय राजधानी में जाने और उनकी इच्छा मुताबिक खेती कानूनों के विरुद्ध आवाज़ उठाने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए? मुख्यमंत्री ने हरियाणा में एम.एल. खट्टर सरकार को राष्ट्रीय राजमार्ग से प्रदर्शनकारी किसानों को निकलने देने की आज्ञा देने की अपील की है जिससे वह दिल्ली में शांतमयी ढंग के साथ अपनी आवाज़ उठा सकें।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि किसानों ने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया और न ही हिंसा में शामिल हुए और किसानों को रोकने की कोशिश लोकतंत्र के लिए अच्छी बात नहीं है। उन्होंने सावधान किया कि किसानों पर कार्यवाही से ख़ास कर हज़ारों नौजवानों द्वारा पलटवार किया जा सकता है जो प्रदर्शनकारी किसानों के साथ हैं। उन्होंने खट्टर की टिप्पणियों पर हैरानी ज़ाहिर की।मुख्यमंत्री ने कहा कि एम.एल. खट्टर सरकार की कार्यवाहियां संवैधानिक भावना के खि़लाफ़ होने के साथ-साथ किसानों की बोलने की आज़ादी के भी खि़लाफ़ हैं। उन्होंने कहा कि या तो भारत में हमारे पास संविधान है या फिर नहीं और यदि हमारे पास है तो प्रत्येक व्यक्ति को बोलने, सोचने और कार्य करने की आज़ादी और हक है।किसानों को रोकने के पीछे के मूल कारण पर सवाल उठाते हुए जो किसी भी हालत में आगे बढऩे के लिए बैरीकेड तोड़ रहे हैं, मुख्यमंत्री ने कहा कि शांतमयी ढंग के साथ विरोध कर रहे किसानों पर ज़ोरदार बल का प्रयोग पूरी तरह असंवैधानिक है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जो किसान देश का पेट पालते हैं, उनको पीछे धकेलने की जगह उनके साथ खड़े होने की ज़रूरत है। उन्होंने जि़क्र किया कि उनकी सरकार ने पिछले दो महीनों से किसानों को बिना किसी हिंसा या कानून व्यवस्था सम्बन्धी मुश्किलों के शांतमयी ढंग के साथ विरोध प्रदर्शन करने की आज्ञा दी। उन्होंने कहा कि हमने किसान नेताओं को भरोसे में लिया और हरियाणा सरकार को भी ऐसा करना चाहिए।हरियाणा पुलिस द्वारा बल प्रयोग बारे अपने पहले बयान के जवाब में खट्टर की टिप्पणी पर हैरानी ज़ाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह किसान हैं जिनको एमएसपी पर यकीन दिलाने की ज़रूरत है, न कि मुझे। कैप्टन अमरिन्दर ने कहा कि खट्टर अगर सोचते हैं कि वह किसानों को मना सकते हैं तो ‘दिल्ली चलो’ मार्च की शुरुआत से पहले उनको किसानों के साथ बातचीत करने की कोशिश करनी चाहिए थी।हरियाणा के अपने हमरुतबा के दोषों को ख़ारिज करते हुए कि वह (कैप्टन अमरिन्दर) किसानों को विरोध प्रदर्शन के लिए उकसा रहे हैं, मुख्यमंत्री ने कहा कि फिर हरियाणा के किसान इस मामले में दिल्ली की तरफ कूच क्यों कर रहे हैं। उन्होंने इस बात से भी इन्कार किया कि उन्होंने खट्टर सरकार के साथ तालमेल नहीं किया और कहा कि बल्कि हरियाणा के मुख्यमंत्री ने उनके साथ संपर्क करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा कि जब मैं प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के साथ किसानों के मुद्दे पर निरंतर बात कर रहा हूँ तो मैं उनके साथ बात क्यों नहीं करूँगा। उन्होंने आगे कहा कि आज भी उन्होंने पंजाब-हरियाणा सरहद पर बने हालात पर अमित शाह के साथ दो बार बातचीत की थी। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि उन्होंने श्री शाह को इस बात से अवगत करवाया कि किसान नेता हिंसक नहीं हैं और जो छोटी झड़पें हुई हैं, वह हरियाणा पुलिस की कार्यवाहियों की प्रतिक्रिया थीं।यह उम्मीद करते हुए कि किसान नेता 3 दिसंबर को केंद्र द्वारा बुलाई गई मीटिंग में जाएंगे, कैप्टन अमरिन्दर ने ज़ोर देकर कहा कि टकराव कोई हल नहीं है और दोनों पक्षों को मसले के हल के लिए बैठकर सुखद माहौल में बातचीत करनी होगी। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह किसानों को एम.एस.पी. सम्बन्धी कानूनी /संवैधानिक भरोसा दें। यदि केंद्र खेती कानूनों में संशोधन नहीं करना चाहता तो इसको खाद्य सुरक्षा ऐक्ट में संशोधन करना चाहिए और इसको ए.पी.एम.सी. ऐक्ट में शामिल करना चाहिए।


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