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गैंगस्टर बुढ्ढा केस में आगामी जांच से बड़े दोषियों जग्गा और पहलवान के पाकिस्तान से सम्बन्ध हुये उजागर


दोनो अपराधी 2014 -15 से फऱार थे

चंडीगढ़, 16 फरवरी:
पंजाब पुलिस द्वारा ख़तरनाक गैंगस्टर बुढ्ढा केस में आगामी जांच से तीन दिन पहले गिरफ़्तार किये गए जगदीप सिंह उर्फ जग्गा (बिल्ला) और गुरविन्दर सिंह (पहलवान) के पाकिस्तान से सम्बन्ध सामने आए हैं।
पुलिस के एक प्रवक्ता के अनुसार दोनों से पाकिस्तान के सिम कार्ड बरामद किये गए हैं और दोनों दोषी गाँव कोट धर्म चंद कलां पुलिस थाना झबाल, जि़ला तरन तारन के निवासी हैं। प्रवक्ता के अनुसार अपराधियों को संगठित अपराध कंट्रोल यूनिट (ओ.सी.सी.यू.) और एस.ए.एस.नगर पुलिस के सांझे ऑपरेशन में गिरफ़्तार किया था। इन दोषियों के खि़लाफ़ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 के अंतर्गत पुलिस थाना सिटी खरड़ में एफआईआर नं. 61 तारीख़ 13-02-2020 दर्ज की गई है। ए.आई.जी. एसएसओसी गुरमीत चौहान और एडीजीपी आईएस, आर.एन. ढोकर की निगरानी अधीन डीएसपी बिक्रम बराड़ के नेतृत्व वाली टीम द्वारा इस रैकेट की जांच में अब तक तकरीबन दो दर्जन बड़े दोषियों को गिरफ़्तार किया गया है।अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि दोनों दोषी जो 2014-15 से फऱार थे, को अलग-अलग तरीकों के ज़रिये और अलग-अलग मार्गों के द्वारा पाकिस्तान से भारी मात्रा में हेरोइन और जाली भारतीय करैंसी प्राप्त हुई थी। डायरैक्टोरेट रिवेन्यू इंटेलिजेंस (डी.आर.आई.), राजस्थान पुलिस और पंजाब पुलिस को पाकिस्तान से भारी मात्रा में हेरोइन लेने के मामला में इन दोषियों की तलाश थी।
जग्गा और पहलवान दोनों ने अपनी ख़ुद की ढिल्लों ट्रांसपोर्ट कंपनी में ट्रांसपोर्टरों के तौर पर काम किया और इस तरह पिछले 5 सालों के दौरान गिरफ़्तारी से बचते रहे। उन्होंने कथित तौर पर ड्रग मनी के साथ अपना साम्राज्य कायम किया था और फिऱोज़पुर के मक्खू जि़ले में एक नया मकान खरीदने के साथ साथ नई दिल्ली से पाँच नये ट्रक भी खऱीदे थे। उन्होंने कोट धर्म चंद, जि़ला तरन तारन में तकरीबन 4 एकड़ कृषि योग्य ज़मीन भी खऱीदी थी।
प्रवक्ता ने बताया कि जांच के दौरान उनके बैंक खातों में बड़े पैसों के लेन-देन का खुलासा हुआ है। उन्होंने आगे बताया कि प्राथमिक पूछताछ में पता लगा है कि उनको हवाला के द्वारा पाकिस्तान के डीलरों द्वारा ड्रग मनी प्राप्त हुई थी।
जगदीप सिंह उर्फ जग्गा 2008 से ही सरहद पार से हेरोइन की तस्करी में शामिल था और तब ही उसने पहली बार पाकिस्तानी सिम कार्डों का प्रयोग करना भी शुरू किया था। वह उसी साल गुरविन्दर सिंह उर्फ पहलवान के संपर्क में आया था और इसके बाद उसका वह पाकिस्तान के अबद अली उर्फ बदी उर्फ बदली के संपर्क में आया।
जग्गा ने पाकिस्तान के सिम कार्डों का प्रयोग करके अटारी सरहद के नज़दीक पड़ते गाँव राजेतल और महावा ड्रेन के क्षेत्र में जैंका पहलवान और अबद अली ( दोनों पाकिस्तानी) के पास से नशें की खेप प्राप्त की। वह फाजिल्का -फिऱोज़पुर सरहद के नज़दीक बोदी लांमा (पाकिस्तान) से नशे की खेप भी खऱीदता था।
प्रवक्ता के अनुसार जग्गा साल 2015 में पाकिस्तान के गाँव नरवाड के निवासी मलिक के संपर्क में आया था और उस समय के बाद में उसे पाकिस्तान से नशे की भारी खेप मिल रही थी। उसने पाकिस्तान से ज़्यादातर नशे की खेपें रावी नदी के द्वारा और प्लास्टिक की ट्यूबों में प्राप्त की थीं। उसने नशे की ढुलाई के लिए के लिए अपने साथी महिन्दर सिंह उर्फ मिंदा की आल्टो, लेंसर, स्विफट, ट्रक और टाटा सूमो वाहनों का प्रयोग किया। टाटा सूमो में उसने नशे को छिपाने के लिए पिछली सीट के नीचे ना दिखने वाले बक्से बनाऐ थे।
एनडीपीएस के मामलों में उसकी दो बार गिरफ़्तारी के बाद जग्गा ने अंतरराष्ट्रीय नंबर पर वटसऐप का प्रयोग करना शुरू कर दिया था। उसे शुरू में डायरैक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस की तरफ से 13 किलो हेरोइन केस में गिरफ़्तार किया गया था। इस केस में उसे साल 2011 में 10 साल की कैद की सज़ा सुनाई गई थी, परन्तु 2014 में वह पैरोल पर बाहर आ गया। डी.आर.आई. द्वारा जनवरी 2015 में 42 किलो हेरोइन केस में उसको फिर से गिरफ़्तार किया गया। अक्तूबर 2015 में तरन तारन में अदालत में उसकी पेशी के दौरान वह पुलिस हिरासत में से भाग गया था और तब से फऱार था।
संयोग से जगदीप सिंह उर्फ जग्गा के पिता गुरदेव सिंह को भी 2005 के एक ड्रग केस में 11 साल की सजा सुनाई गई थी। 2014 में वह पैरोल पर बाहर आया था और अभी तक फऱार है।
जग्गे का चचेरा भाई पहलवान 2014 से 10 किलो हेरोइन की बरामदगी के मामले में फऱार था। गिरफ़्तारी से बचने के लिए उसने अपना रूप बदल लिया था और पगड़ी बांधनी शुरू कर दी थी।

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