हर परिवार के एक सदस्‍य को सरकारी नौकरी देने का वादा कर सत्‍ता में आई कांग्रेस सरकार के घर घर रोजगार मुहिम वालों के लिए वह बेरोजगार भी सहारा बन रहे हैं जिन्‍होंने खुद कांग्रेस पार्टी द्वारा किए गए वादे के तहत जोब कार्ड बनवाया था, लेकिन नौकरी न मिलने के बाद थकहारकर अब अपना कारोबार शुरू कर लिया है।
गौरतलब है कि सत्‍ता में आने से पहले कांग्रेस पार्टी की ओर से पंजाब में बेरोजगार युवाओं एवं उनके परिजनों को लुभाने के लिए प्रत्‍येक परिवार में से एक सदस्‍य को ना सिर्फ सरकारी नौकरी देने का वादा किया था बल्कि उनको पूरी तरह से झांसे में लेने के लिए जिस तरह कर्ज माफी के फार्म भरवाए गए तथा मोबाइल फोन के लिए आवेदन करवाए गए ठीक उसी तरह युवाओं के जोब कार्ड भी बनवाकर दिए गए। लेकिन सत्‍ता पर काबिज होने के बाद पार्टियां अपने खुद के किए गए वादों में अपने हिसाब से फेरबदल कर देती हैं। जिस तरह किसी समय अकाली भाजपा ने सत्‍ता में आने से पहले गरीबों को सस्‍ता आटा दाल देने का वादा कर वोट बटोरने के बाद इस योजना को लागू करते समय कई प्रकार की शर्ते लगाकर योजना के दायरे को सीमित कर दिया था उसी प्रकार कांग्रेस सरकार द्वारा भी सत्‍ता संभालने के बाद युवाओं को नौकरियां देने के लिए रोजगार मेले लगाए गए लेकिन मेलों में युवाओं को सरकारी नौकरी के बजाय निजी कंपनियों का सहारा लिया गया। यही नहीं घर घर रोजगार योजना के तहत युवाओं को फूड डिलिवर करने वाली कंपनियों में डिलिवरी ब्‍वाय से लेकर नए खुलने वाले निजी संस्‍थानों में सुरक्षा गार्ड तक के पदों पर लगवाने में सहयोग किया गया। राजवीर आरवी एवं जसप्रीत सिंह रीत नामक दो युवाओं ने जब कांग्रेस पार्टी द्वारा सत्‍ता में आने से पूर्व किए गए वादे के बारे में सुना तो उनकी उम्‍मीदों को पंख लग गए तथा दोनों ने बहुत चाव से जाकर अपने जोब कार्ड बनवाए। उनकी उम्‍मीद के अनुसार जब कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी तो दोनों को लगने लगा कि अब तो वह पक्‍की सरकारी नौकरी पर लग ही जाएंगे। इसी उम्‍मीद के सहारे उन्‍होंने निजी कं‍पनियों व अपना कोई काम करने का अहमियत नहीं दी। दोनों के परिवार वालों ने भी सरकारी नौकरी मिलने की उम्‍मीद में उनके जोब कार्ड संभाल संभाल कर रखे तथा बच्‍चों को नौकरी मिलने तक कोई अन्‍य काम करने को नहीं कहा। धीरे धीरे समय बीतता गया और सरकार द्वारा लगाए जाने वाले मेगा रोजगार मेलों में जब उन्‍होंने असलियत को जाना तो उनके सरकारी नौकरी के सपनों पर पानी फि‍र गया। काफी सोच विचार तथा परिजनों के नौकरी के पीछे समय बर्बाद करने के बजाय अपना कारोबार शुरू करने के लिए कहा तो आखिर में दोनों ने अपने अपने कारोबार करने का निर्णय ले ही लिया। राजवीर ने उचित जगह के चुनाव के बाद सारी तैयारी कर अकेडमी का आगाज कर दिया जबकि जसप्रीत ने भी मलोट रोड मुख्‍य मार्ग पर फास्‍ट फूड से अपने रेस्‍टोरेंट खोलने के इरादे से दुकान लेकर फर्नीचर आदि बनवाना शुरू किया। अभी उसका रेस्‍टोरेंट तैयार ही हो रहा था कि उसे सरकार द्वारा चलाई जा रही घर घर रोजगार योलना वाले कर्मचारियों का फोन आया। जब फोन रिसीव करने के बाद उसको दूसरी ओर से बताया कि हम घर घर रोजगार योजना  के तहत बोल रहे हैं आपको अपने रेस्‍टोरेंट के लिए कितने कर्मचारियों की जरूरत है हम आपको उपलब्‍ध करवाएंगे तो जसप्रीत की हैरानी की हद ना रही इसी तरह का फोन राजवीर को भी आया। दोनों जब शाम को रेस्‍टोरेंट पर मिले तो दोनों ने एक दूसरे को फोन के बारे में बताया तथा एक साथ ही दोनों ने अपने पर्स में से वह जोब कार्ड निकाले और उनको काफी देरतक देखते रहे जिन्‍हे पाकर उन्‍होंने भी कभी सरकारी नौकरी पर लगने का सपना देखा था।
नरिंदर सलूजा
श्री मुक्‍तसर साहिब
9872508564

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