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Saturday, March 07, 2020

DCs AND SSPs को नशों के खि़लाफ़ जंग और तेज़ करने के लिए कहा

CM के मुख्य प्रमुख सचिव ने नशे के आदियों के इलाज के बाद फिर गिरफ्त में न आने को यकीनी बनाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया
नशा माफिया की कमर तोड़ दी, अब नशा खुलेआम नहीं मिलता - डी.जी.पी.
चंडीगढ़, 7 मार्च:
नशों के खि़लाफ़ जंग जारी रखते हुए मुख्यमंत्री के मुख्य प्रमुख सचिव सुरेश कुमार ने समूह डिप्टी कमिश्नरों और जि़ला पुलिस मुखियों को अपने यत्न और तेज़ करने के लिए कहा ताकि राज्य से नशों की समस्या का मुकम्मल ख़ात्मा किया जा सके।
यहाँ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा उच्च स्तरीय मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए सुरेश कुमार ने बड्डी ग्रुपों और नशा रोकथाम अफसरों को और सक्रिय और मज़बूत बनाने की हिदायत की ताकि नशों के आदियों को इसके हानिकारक प्रभावों संबंधी अवगत करवाया जा सके। उन्होंने पीडि़त व्यक्तियों के साथ निजी संपर्क कायम करने और अति जोखिम वाले इलाकों का दौरा करने की महत्ता पर ज़ोर दिया। 
एस.टी.एफ. पर हमलों के सम्बन्ध में श्री कुमार ने बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएँ तस्करों द्वारा दिखाई जा रही बेचैनी को दर्शाती हैं और उन्होंने जि़ला पुलिस को इसकी रोकथाम के लिए सख़्त कदम उठाने के लिए कहा।
मुख्य प्रमुख सचिव ने इलाज के बाद नशा छोडऩे वालों के फिर से इसकी गिरफ्त में न आने को यकीनी बनाने के लिए ठोस यत्न करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने आगे कहा कि निर्धारित दवाओं की अनाधिकृत बिक्री को रोकने के लिए मैडीकल दुकानों की लगातार जांच की जाये। श्री कुमार ने डिप्टी कमिश्नरों और जि़ला पुलिस मुखियों को नशा तस्करों की तरफ से दायर ज़मानत याचिकाओं के विरुद्ध भी ज़ोरदार पैरवी करने के लिए कहा। उन्होंने जि़ला पुलिस मुखियों को नशा तस्करों की जायदादों को कानून के मुताबिक ज़ब्त करने की प्रक्रिया तेज़ करने की हिदायत की ताकि एसी कार्यवाहियों में शामिल बाकी लोगों को भी सबक मिल सके। 
मीटिंग में शामिल डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता ने बताया कि नशा माफीए की कमर तोड़ दी गई है और राज्य में नशे अब खुलेआम नहीं मिलते। श्री गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2019 में हेरोइन की बरामदगी की 464 किलो की खेप अब तक किसी एक वर्ष में बरामद की जाने वाली सबसे अधिक खेप है। उन्होंने कहा कि मार्च, 2017 से नशों की बरामदगी बहुत बढ़ी है जिसमें पाँच गुणा विस्तार हुआ है जो वर्ष 2016 में 19 किलो था और 2019 तक 464 किलो हो गया। इसी तरह डी.जी.पी. ने बताया कि वर्ष 2016 में हेरोइन की बरामदगी 19 किलो, 2017 में 207 किलो, 2018 में 410 किलो और 2019 में 464 किलो थी। बड़ी मात्रा में अन्य नशे भी बरामद किये जा रहे हैं। बीते वर्ष 2 किलो या इससे अधिक मात्रा की हेरोइन की बरामदगी वाली ‘बड़ी मछलियों ’ को गिरफ्तार किया गया। बीते तीन वर्षों में 67 करोड़ की जायदाद कुर्क की गई है। श्री गुप्ता ने आगे बताया कि नशों से मृत्यु की संख्या में भी कमी आई है जो वर्ष 2018 में 114 थी और 2019 में घटकर 47 रह गई।
नशे और अन्य नशीले पदार्थों को बड़ी स्तर पर बरामद करने पर श्री गुप्ता ने मीटिंग में बताया कि एन.डी.पी.एस. एक्ट के अंतर्गत 33500 केस दर्ज किये और 44500 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया और 11000 नशा तस्कर राज्य भर की अलग-अलग जेलों में बंद हैं। इसके अलावा विभिन्न ऑपरेशनों में 1100 किलो हेरोइन, 380 किलो स्मैक और चरस, 1500 किलो अफ़ीम और 1,30,000 किलो भुक्की बरामद की गई।
इसी दौरान डिप्टी कमिश्नरों ने नशों की समस्या को प्रभावी ढंग से ख़त्म करने के लिए गार्डियंज़ ऑफ गवर्नेंस की भूमिका की भी प्रशंसा की।
मीटिंग में बताया गया कि 1 अप्रैल, 2017 से 31 दिसंबर, 2019 तक लुधियाना जिले में 4000 कैमिस्ट दुकानों का निरीक्षण किया गया जबकि संगरूर में 19 मामले ग़ैर-लाईसेंसी मैडीकल स्टोरों के खि़लाफ़ दर्ज किये गए इसके अलावा तरन तारन में 30 हज़ार सार्वजनिक मीटिंगें /रैलियाँ /लैक्चर आदि पीडि़तों को नशे से दूर रहने के लिए किये गए
होशियारपुर जिले में डैपो वॉलंटियरों द्वारा 3 लाख से अधिक व्यक्तियों के साथ संपर्क किया गया जबकि बरनाला में डैपो वॉलंटियरों ने 35000 नशा पीड़तों के साथ संपर्क किया। अमृतसर जिले में डैपो वॉलंटियरों के सहयोग से 16000 से अधिक पीडि़तों को ओट सैंटरों /नशा मुक्ति केन्द्रों में भेजा गया। लुधियाना जिले में बड्डी प्रोग्राम अधीन एक लाख गतिविधियां की गई।
मीटिंग में यह भी बताया गया कि राज्य में नशों सम्बन्धी दर्ज किये गए 65 प्रतिशत मामले हेरोइन, स्मैक, फ़ार्मा ड्रग्ज़ से सम्बन्धित हैं। तरन तारन जिले में सबसे ज़्यादा 963 केस हेरोइन के दर्ज किये गए और 1304 व्यक्ति गिरफ्तार किये गए जबकि लुधियाना कमिश्नरेट दूसरे स्थान पर है। अदालतों द्वारा वर्ष 2018 के 152 मामलों के मुकाबले 2019 में 15 व्यापारिक मात्राओं के मामलों में ज़मानत मिली। पिछले वर्ष 158 अदालती भगौड़े नशों के मामलों में काबू किये गए जबकि पिछले वर्ष नशों के मामलों से जुड़े 547 भगौड़े काबू किये गए।  नशा व्यापारियों की 38 करोड़ मूल्य की अटेच की गई 50 जायदादों में सबसे अधिक तरन तारन जिले में 28 करोड़ मूल्य की 19 थीं। स्पैशल टास्क फोर्स द्वारा दर्ज मामलों में सज़ा की दर 100 प्रतिशत रही जबकि लुधियाना ग्रामीण पुलिस 92 प्रतिशत सज़ा दर के साथ दूसरे स्थान पर रही।
दूसरी तरफ़ नशा छुड़ाने और पुनर्सुधार पक्ष से 1.20 लाख से ज़्यादा नशा पीडि़तों को ओट सैंटरों पर रजिस्टर किया गया। जिन 3.5 लाख लोगों का इलाज किया गया उनमें से 2.15 लाख नशामुक्ति केन्द्रों में और 1.40 लाख ओट सैंटरों में और 29156 का पुनर्सुधार केन्द्रों में इलाज किया गया।
मीटिंग में शामिल प्रमुख अधिकारियों में अतिरिक्त मुख्यसचिव (गृह) सतीश चंद्रा, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अनुराग अग्रवाल, प्रमुख सचिव/मुख्यमंत्री पंजाब तेजवीर सिंह, एस टी एफ प्रमुख हरप्रीत सिंह सिद्धू और नोडल अफ़सर नशा रोकथाम राहुल तिवारी के नाम शामिल हैं। 

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