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चंडीगढ़, 22 अप्रैल:
पंजाब सरकार ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजऱ पवित्र रमज़ान महीने
को सुरक्षित ढंग से मनाने सम्बन्धी एक एडवाईजऱी जारी की है।
इस सम्बन्धी जानकारी देते हुए सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब सरकार ने मानवीय मेल-जोल के द्वारा इस वायरस को फैलने से रोकने के उद्देश्य से लोगों के स्वतंत्र आवागमन पर पाबंदी लगाई है और जलसा करने पर भी रोक लगा दी है। कोविड-19 महामारी के कारण पैदा हुए इस संकट की स्थिति के दौरान रमज़ान के पवित्र महीने के जश्र मनाने वाले स्थानों पर कुछ ख़ास रोकथाम उपायों के सावधानीपूर्वक पालना करने की आवश्यकता है।
प्रवक्ता ने आगे बताया कि पंजाब सरकार ने मुस्लिम भाईचारे से आग्रह किया है कि वह सभी दिशा-निर्देशों की सावधानीपूर्वक पालना करें, जिसके अंतर्गत सभी मस्जिदों / दरगाहों / इमामबाड़ों और अन्य धार्मिक संस्थाएं बंद रहेंगी और लोगों को जलसा करके नमाज़ें (नमाज़-ए-बाजमात) अदा करने, जुम्मे की नमाज़ समेत तरावीह की नमाज़ अदा करने की मुकम्मल मनाही होगी। लोगों को सलाह दी जाती है कि वह अपने-अपने घरों से ही नमाज़ अदा करें। उन्होंने कहा कि उर्स, पब्लिक और प्राईवेट इफ्तार पार्टियाँ / समारोह, दावत-ए-सेहरी और श्रद्धालुओं की सभा वाले किसी भी अन्य धार्मिक समागम समेत हर किस्म के जश्रों का सख्ती से टाला जाए।
उन्होंने बताया कि मस्जिद परिसर के अंदर जूस, शरबत या खाने-पीने की अन्य चीजों या घर-घर जाकर बाँटी जाने वाली चीजों के सार्वजनिक वितरण पर पूरी तरह पाबंदी है। इसके अलावा खाने-पीने की वस्तुओं की दुकानों / रेहडिय़ों को मस्जिद के नज़दीक लगाने नहीं दिया जाएगा।
प्रवक्ता ने यह भी कहा कि अगर किसी को पहले से ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हैं जैसे कि मधुमेह, हृदय रोग आदि वाले व्यक्तियों को सही डॉक्टरी सलाह के बाद ही रोज़ा रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मस्जिद में सार्वजनिक संबोधन का प्रयोग केवल स्थानीय अधिकारियों द्वारा किसी किस्म की घोषणा करने के लिए या ज़रूरत पडऩे पर सेहरी के अंत और इफ्तार समय की शुरूआत सम्बन्धी घोषणा के लिए ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दिशा-निर्देशों के अनुसार लोगों को घर में ही रहना चाहिए और रिश्तेदारों, मित्रों, पड़ोसियों आदि को इन दिनों के दौरान हर समय किसी अन्य व्यक्ति से कम-से-कम 1 मीटर की दूरी बनाकर देह से दूरी के नियम की पालना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जश्र मनाने और शुभकामनाएं देने के लिए अन्यों को आलिंगन में लेने और हाथ मिलाने से भी परहेज़ करना चाहिए।
संचार और अभिव्यक्ति के अन्य वैकल्पिक तरीकों संबंधी बताते हुए उन्होंने कहा कि दिल पर हाथ रखना, हाथ लहराना, सिर हिलाना आदि को एक दूसरे को बधाई देने के उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोगों को सलाह दी जाती है कि वह अपने-अपने घरों से ही नमाज़ अदा करें और रमज़ान के दौरान इफ्तार और जश्रों के लिए हर तरह की सामाजिक भीड़ को एकत्र करने से परहेज़ करें। उन्होंने कहा कि मोबाइल और अन्य इलैक्ट्रॉनिक मीडिया को लोगों द्वारा बधाई देने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
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