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लोगो अगर किसी दूसरे का नहीं सोचना तो न सोचो परन्तु कम से कम अपने परिवार का ख्याल तो रख लो

जनता की रक्षा करना, सुविधाएं उपलब्ध करवाना तो केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की जिम्मेवारी देश में कोरोना मरीजों की संख्या कुछ ही दिनों...


जनता की रक्षा करना, सुविधाएं उपलब्ध करवाना तो केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की जिम्मेवारी
देश में कोरोना मरीजों की संख्या कुछ ही दिनों में हुई लाखों में परन्तु न लोग जागे और न ही सरकारें
दोष दूसरे को देना कि वह नहीं काम करता और वह नहीं काम करता राजनीतिक पार्टियों का नारा बन चुका है


कोरोना वायरस की चपेट में सारा विश्व आया हुआ है। अमेरिका, ब्राजील, रशिया, स्पेन, यू.के. इटली, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की आदि देशों सहित दूसरे देशों में कोरोना के मरीजों की संख्या लाखों में पहुँच गई है जो अब भारत में भी कोरोना के मरीजों की संख्या भी लाखों में हो गई है, परन्तु हैरान करने वाली बात यह है कि इसको ले कर ना तो लोगों की आँखें खुलीं है और ना ही सरकारों की नींद को कोई फर्क पड़ा है। जब कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या सैंकड़ों में थी तो सरकारों की बातें थी कि अब हम मिल कर जागरूकता मुहिम चलानी है जिससे मरीजों की संख्या हजारों में न हो, परन्तु मरीजों की संख्या लाखों में भी हो गई है परंतु नाम तो कोरोनों के प्रति लोगों ने गंभीरता दिखाई और ना ही सरकारों ने कोई चेतनता दिखाई परन्तु यह जरूर हुआ कि जब मरीजों की संख्या सौ में थी सब कुछ बंद कर दिया गया, जब हजारों में हुई तो कुछ छूट दे दी गई और अब लाखों में हो गई है तो स्कूलों, कालेजों को छोड़ बाकी सभी काम-कामों को खोल दिया गया है। लोगों को सामाजिक दूरी का पालन करने और नियमों का पालन करने की हिदायतें जरूर जारी कर दीं गई परंतु देखने में कुछ खास असर दिखाई नहीं दिया। देश के जिन प्रदेशों में कोरोनों के मरीज नहीं भी थे अब उन प्रदेशों में भी मरीज सामने आने लग पड़े हैं। लोगों को भी नियमों का पालन करने के लिए प्रशासन को जुर्माने या चालान का सहारा लेना पड़ रहा है। मानते हैं कि मनुष्य की कई जरूरतें हैं परंतु अपनी जान और परिवार से अधिक कुछ नहीं होता। इस बात को मद्देनजर रखते हुए लोगों को जहाँ आप जागरूक होना पड़ेगा वहीं दूसरों को भी जागरूक करना पड़ेगा परन्तु हो उल्टा रहा है ना तो लोग खुद नियमों की पालना करना जरूरी समझ रहे हैं और ना ही दूसरों को प्रेरित कर रहे हैं। बात तो यह है कि नियमों की पालना पहले खुद करनी पड़ती है फिर ही हम दूसरों को उन नियमों की पालना करने के लिए पे्ररित कर सकते हैं। मनुष्य को आज के समय में एक आदत पड़ चुकी है कि मुझे दूसरे के साथ क्या लेना देना है, दूसरा जो मर्जी करे हमें क्या। चलो लोगों के बारे में नहीं सोचना तो ना सोचो लेकिन अपने बच्चों तथा परिवार के बारे सोच लेना चाहिए। जब कोई व्यक्ति घर से बाहर कुछ खरीददारी करने के लिए जाता है, यदि वह सामाजिक दूरी का पालन करता है, मास्क लगाता है तो वह घर में कोरोना की बीमारी नहीं ले कर आता परन्तु अगर नियमों की पालना नहीं करता तो वह जहाँ परिवार  में बीमारी को ले कर आता है, वहां पता नहीं कितने लोगों को यह बीमारी तोहफे के रूप में भी दे देता है। इस लिए लोगों को एक बात समझ लेनी चाहिए कि यह बीमारी इतनी खतरनाक है कि जब यह रोग किसी को लग जाता है तो सज्जन, रिश्तेदारों की बात तो दूर अपना परिवार भी साथ छोड़ जाता है। इस लिए आप ही हमें स्वास्थ्य विभाग की हिदायतों का पालन करना चाहिए। अब बात करते हैं केंद्र और राज्य सरकारों की, जो कि जब बीमारी देश में आई थी ना तो तब ही कुछ चेतन थे और अब जब मरीजों की संख्या लाखों में हो गई है अब तो बिल्कुल ही आँखें खोल कर ही सोए पड़े हैं। जनता की किसी भी समस्या और कुदरती आफत के समय पर लोगों की रक्षा करना और लोगों को सुविधाएं मुहैया करवाना सरकारों की जिम्मेवारी होती है, जिस केंद्र सरकार भी भाग हो रही है और राज्य सरकारें भी अपनी जिम्मेवारी को निभाने में गंभीर नहीं हैं हैं । एक बात के प्रति पूरी तरह के साथ गंभीर हैं और जागृत हैं कि एक दूसरे पर आरोप किस तरह लगाने हैं और दूसरे को निंदा कैसे करनी है। जहाँ कांग्रेस पार्टी की सरकारें हैं वह यह बात कहते सुने जाते हैं कि केंद्र सरकार हमारा साथ नहीं दे रही और केंद्र सरकार का एक ही जवाब होता है कि राज्य सरकारों को पैसे भेज दिए गए हैं परन्तु वह सही स्थान पर नहीं लगा रही। सरकारें इस बात को भूल चुकीं हैं कि लोग कोई बच्चे नहीं, क्या हो रहा है कौन काम कर रहा कौन नहीं सब कुछ जानते हैं परन्तु अपनी जिम्मेवारी से भागना कोई अच्छी बात नहीं कही जा सकती। सरकारों को एक बात हमेशा ही याद रखनी चाहिए कि जिस दिन जनता अपनी जिम्मेवारी को भूल गई तो हालातों पर काबू पाना बहुत ही कठिन हो जायेगा। कुल मिला कर बात यहाँ आ कर खत्म होती है कि यदि अब भी लोग और सरकारें न जागीं तो वह दिन दूर नहीं जब एक व्यक्ति दूसरे को मिलना तो दूर की बात देखने से भी दूर भागेगा। इंसानियत बिल्कुल खत्म हो जायेगी। इंसानियत को बचाने और मानव को बचाने के लिए हमें सभी को मिल कर अब भी जागरूक हो जाना चाहिए नहीं तो हालात बहुत ही मुश्किल भरे होंगे।





























लेखक
मनप्रीत सिंह मन्ना
गढ़दीवाला।
मोबा और वट्टसअप्प 09417717095,078148 -00439।  


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