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पंजाब सरकार ने 18 जि़लों में हीमोफीलिया का मुफ़्त इलाज किया शुरू


मोहाली में पहले मरीज़ का एंटी हीमोफीलिया फैक्टर -8 से किया गया सफल इलाज
पहले लोगों को हीमोफीलिया के इलाज के लिए सालाना 18 से 80 लाख रुपए ख़र्चने पड़ते थे

चंडीगढ़, 21 जून:

हीमोफीलिया के मरीज़ों को बड़ी राहत प्रदान करते हुये पंजाब सरकार ने राज्य भर के 18 इंटीगरेटिड केयर सेंटरों में हीमोफीलिया के मरीजों का एंटी हीमोफीलिया फैक्टर उपलब्ध करवा करके इलाज शुरू कर दिया गया है।

इस सम्बन्धी स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री, पंजाब स. बलबीर सिंह सिद्धू ने बताया कि हीमोफीलिया का इलाज उपलब्ध करवाने के लिए कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की तरफ से राज्य के 18 जि़लों में इंटीगरेटिड केयर सैंटर फॉर हीमोगलोबीनोपैथीस और हीमोफीलिया खोले गए हैं। इनमें 3मैडीकल कालेजों के इलावा 15 अन्य जिलों में शुरुआत की जा चुकी है। बाकी 4 जि़लों में भी जल्दी ही शुरुआत कर दी जायेगी। इन सेंटरों में होमीफीलिया के मरीजों को एंटी हीमोफीलिया फैक्टर 8, 9, 7 ए और एफ.ई.आई.बी.ए मुफ़्त उपलब्ध करवाए गए हैं और इन सेंटरों में 24&7 सुविधा उपलब्ध करवाई गई है जिससे मरीजों को किसी भी समय एमरजैंसी के दौरान इलाज मुहैया करवाया जा सके।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इससे पहले हीमोफीलिया के इलाज के लिए मरीज़ों को लगभग 18 से 80 लाख रुपए तक सालाना ख़र्च करने पड़ते थे। यह सारा ख़र्च अब पंजाब सरकार की तरफ से किया जायेगा, जिसके लिए मरीजों की रजिस्ट्रेशन की जा रही है।

स. सिद्धू ने बताया कि एंटी हीमोफीलिया फैक्टर के साथ इलाज करने के लिए स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण पीजीआइ, चंडीगढ़ के माहिर डाक्टरों और वैबीनार के ज़रिये माहिरों द्वारा दिया गया है। पंजाब के बच्चों के माहिर डाक्टरों, मैडीकल स्पैशलिस्ट, स्टाफ नर्स और लैब टैकनीशियन का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है जिससे मरीजों का सन्तोषजनक इलाज किया जा सके।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मोहाली जिले में पहले मरीज़ का इलाज किया गया है जो जिला अस्पताल मोहाली में स्थापित इंटीगरेटिड केयर सैंटर फॉर हीमोगलोबीनोपैथीस और हीमोफीलिया में एंटी हीमोफीलिक फैक्टर -8 के साथ इलाज किया गया। उन्होंने कहा कि उनको यह बताते हुये मान महसूस हो रहा है कि बाल रोगों के माहिर डा. डिम्पल श्रीवास्तव और फिजीशियन डा. ईशा अरोड़ा के द्वारा मोहाली में पहले होमोफीलिया मरीज़ का किया इलाज किया गया है। उन्होंंने कहा कि पहले मरीजों को इलाज करवाने के लिए पीजीआइ, चंडीगढ़ में जाना पड़ता था परन्तु अब यह इलाज सेवाएं पंजाब में उपलब्ध हैं जिससे जरूरतमंद मरीज़ों को बड़ी राहत मिलेगी।

इस सम्बन्धी एडीशनल प्रोजैक्ट डायरैक्टर पंजाब स्टेट एडज कंट्रोल सोसायटी और हीमोफीलिया और थैलासीमिया के स्टेट नोडल अफ़सर डा. मनप्रीत छतवाल ने बताया कि हीमोफीलिया के मरीज़ के ख़ून निकलने पर यह फैक्टर दिया जाता है। यह फैक्टर न मिलने के कारण मरीज़ की ब्लीडिंग ज़्यादा हो जाती है, जिस कारण कई बार मरीज़ को अपंगता का सामना करना पड़ता है और मौत का भी ख़तरा रहता है। इसलिए मरीजों के इलाज के लिए एंटी हीमोफीलिया फैक्टर उपलब्ध करवाए गए हैं जिससे मरीजों का समय पर पर सही इलाज किया जा सके। उन्होंने बताया कि पंजाब में लगभग 500 मरीज़ हीमोफीलिया की बीमारी के शिकार हैं और मरीजों के इलाज के लिए हर संभव इंतज़ाम पूरे कर लिए गए हैं।   

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