श्री मुक्तसर साहिब 
आषाढ़ अमावस--21 जून 2020 ई को दिन रविवार को  कंकणा-कृति सूर्य  ग्रहण प्रातः9-15 बजे से अपराह्नकाल-3-04 बजे तक सम्पूर्ण-भारत में खंण्ड-ग्रास रूप में ही दिखाई देगा। इस ग्रहण की कंकणाकृति  केवल,
उत्तरी-राजस्थान, उत्तरी-हरियाणा, और उत्तराखंण्ड 
राज्य के उत्तरी क्षेत्रो से गुजरेगी। भारत के अलावा यह ग्रहण दक्षणी-पूर्वी यूरोप, आस्ट्रेलिया के उत्तरी-क्षेत्रों, न्यू गियाना,फिजी, अफ्रिका, प्रशांन्त-महांसागर,मध्य-पूर्वी,एशिया,अफगानिस्तान,पाकिस्तान, मध्य-दक्षणी,चीन बर्मा,फिलिपीन्स  आदि देशों में दिखाई देगा। यह जानकारी सनातन धर्म प्रचारक विद्वान ब्रह्मऋषि पं. पूरन चंद्र जोशी ने गांधी नगर स्थित कार्यक्रम के दौरान दी। उन्होंने कहा कि भूलोक पर ग्रहण प्रारंम्भ प्रातः 9.15 बजे ,कंकण प्रारंम्भ 10.17 बजे, परम-ग्रास मध्य दोपहर 12.10 बजे, कंकण समाप्त-दोपहर 2.02 बजे , ग्रहण-समाप्त अपराह्नकाल 3.04  बजे होगा।  यह सूर्य ग्रहण रविवार के दिन घटित हो रहा है, इसीलिए इस ग्रहण को चुड़ामणि-सूर्य ग्रहण भी कहते हैं। शास्त्रों में इस ग्रहण में-स्नान ,दान, जप, पाठ पूजा आदि का   विशेष महत्व माना गया है। गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस ग्रहण का सूतक  20 जून की रात में 9.16 बजे शुरू हो जाएगा। सूर्य ग्रहण में सूर्य--उपासना, आदित्य हृदय स्त्रोत,
सूर्याष्टक,स्त्रोत पाठ करना चाहिए, पका हुवा अन्न, कटी हुई सब्जी,
ग्रहणकाल में दुषित हो जाते हैं। यह ग्रहण  मिथुन  राशि में--मृगाशिरा
एवं आद्रा  नक्षत्र  में घटित होगा। इसलिए यह ग्रहण  मिथुन राशि के लोगों
के लिए अशुभ फल दायक  रहेगा। सूर्य ग्रहण में सूर्य का जप और सूर्य
का दान करना चाहिए।
-- इनसैट --
इस ग्रहण का बारह राशियों पर रहेगा इस तरह का प्रभाव
मेष -- धन का लाभ होगा।
वृष -- राशि पर धन का नुकसान हानि
मिथुन -- दुर्घटना,चोट, भय चिन्ता
कर्क – धन हानि
सिह -- शुभ लाभ उन्नति
कन्या --रोग, कष्ट, भय
तुला -- चिन्ता, संतान कष्ट
वृश्चिक -- साधारण लाभ, शत्रु भय,
धनु -- कष्टकारी
मकर -- रोग, गुप्त-चिन्ता
कुम्भ – कार्य में बिलंम्ब वाला, खर्चा अधिक
मीन -- हर कार्य सिद्ध।
इस ग्रहण के प्रभाव से छोटे-छोटे तालाब समाप्त हो जाएंगे। नदियों का
प्रवाह कम  हो जाएगा। कुछ प्रान्तों में भीष्ण अकाल, अग्निकांण्ड
प्राकृतिक प्रकोप से जन धन हानि, एवं  खंण्ड वर्षा होगी। फलों एवं
सब्जीयों की हानि, रविवार को ग्रहण लगने से संभव है। वर्षा की कमी, गायों के दूध में कमी, प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों के मध्य तनाव, युद्धजन्य
वातावरण रहेगा। केन्द्रीय-सत्ता के लिए बहुत चुनौती का समय रहेगा।

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