ये बात साबित है कि मजबूत इम्यूनिटी आपको संक्रमण से बचाती है. इसके लिए आपको जीवन शैली में साधारण बदलाव लाने जरूरी हैं।वर्तमान समय में, काफी सारी बीमारियाँ फैल रही हैं, जिनमें कोरोनावायरस भी शामिल हैं।

हम सभी हर रोज़ कोरोनावायरस संक्रमित लोगों की खबरे टी.वी में देखते रहे हैं, जिसे कम करने के लिए राज्य सरकारों समेत केंद्रीय सरकार हर मुमकिन कदम उठा रहे हैं।
यदि आप कोरोनावायरस से बचने के उपायों पर ध्यान दें, तो उनमें सबसे महत्वपूर्ण रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना है ताकि इस वायरस से बचा जा सके।
लोगों में इम्युनिटी पावर को बढ़ाने के उपायों की जानकारी न होने के कारण वे इसे सुधार नहीं पाते हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता क्या है ? 
प्रतिरक्षा प्रणाली में अंग,कोशिकाएं, टिशू और प्रोटीन इत्यादि शामिल होते हैं।
ये सभी तत्व मिलकर मानव-शरीर को सही तरीके से काम करने में सहायता करते हैं।
इसके साथ में प्रतिरक्षा प्रणाली मानव-शरीर को बीमारियों, संक्रमण, वायरस इत्यादि से लड़ने में सहायता करते हैं।
इस प्रकार, रोग-प्रतिरोधक क्षमता बीमारियों से लड़ने की शक्ति है, जो व्यक्ति को सेहतमंद रहने में सहायता करती है।
रोग-प्रतिरोधक क्षमता क्यों जरूरी है ?
जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि सभी लोगों के लिए बेहतर रोग-प्रतिरोधक क्षमता होना काफी जरूरी है क्योंकि यह उसे मुख्य रूप से इन 5परेशानियों से बचाती है-
  • सेहतमंद रहना- रोग-प्रतिरोधक क्षमता के सही होने का प्रमुख कारण सेहतमंद रहना है।
    जिस व्यक्ति की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है, वह अधिक सेहतमंद रहता है।
  • मानसिक रूप से मजबूत होना- रोग-प्रतिरोधक क्षमता का असर लोगों के शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क पर भी पड़ता है।
    यह उससे मानसिक रूप से मजबूत रहने में मदद करती है, जिससे उसे मानसिक रोग होने की संभावना कम हो जाती है।
  • शारीरिक मज़बूती बनी रहना- रोग-प्रतिरोधक क्षमता व्यक्ति को शारीरिक रूप से मजबूत रहने में सहायता रहती है।
    एक ओर, कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति को कमज़ोर महसूस होती है,वहीं दूसरी ओर मजबूत रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति को ऐसी कोई समस्या नहीं होती है,बल्कि उसकी शारीरिक मज़बूती बनी रहती है।
  • आने वाली पीढ़ियों को सेहमंद रखना- अक्सर, कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता की समस्या पीढ़ी दर तक चलती रहती है, जिसकी वजह से यह समस्या आने वाली पीढ़ियों में भी देखने को मिल सकती है।
    इसी कारण, इसे मजबूत बनाने की आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ी सेहतमंद रहे।
  • परिवार को गंभीर बीमारियों से बचाना- कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का असर आने वाली पीढ़ियों पर नहीं बल्कि परिवार के मौजूद सदस्यों की सेहत पर भी पड़ता है।
    इस प्रकार, सभी लोगों को अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए ताकि उनके परिवार के सदस्यों को किसी तरह की बीमारी न हो।
रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होने के लक्षण क्या हैं ? 
किसी भी व्यक्ति के लिए कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का होना चिंताजनक होता है।
किसी भी अन्य समस्या की तरह कमज़ोर इम्युनिटी पावर के भी कुछ लक्षण होते हैं, जिन्हें किसी शख्स को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
इस प्रकार, यदि किसी शख्स को अपने शरीर में निम्नलिखित लक्षण नज़र आए तो उसे तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए क्योंकि ये कमज़ोर इम्युनिटी पावर के संकेत हो सकते हैं-
  • तनाव महसूस होना- कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का प्रमुख लक्षण तनाव महसूस होना क्योंकि इसका असर व्यक्ति के शरीर के साथ-साथ उसके मानसिक सेहत पर भी पड़ता है।
    इस प्रकार, यदि किसी व्यक्ति को अचानक से किसी भी काम में मन न लगाना, लोगों से  न मिलना इत्यादि जैसे लक्षण महसूस होते हैं तो उसे तुरंत मनोवैज्ञानिक से मिलकर अपनी सेहत की जांच करानी चाहिए ताकि तनाव का इलाज समय रहते कराया जा सके।
  • अधिक सर्दी लगना- यदि किसी शख्स को अधिक सर्दी महसूस हो तो उसे इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि यह लॉ इम्युनिटी पावर का लक्षण हो सकता है।
  • पेट संबंधी परेशानियां होना- अगर किसी शख्स को पेट संबंधी परेशानियाँ जैसे दस्त लगना, कब्ज होना, गैस होना इत्यादि होती हैं, तो उसे मेडिकल सहायता लेनी पड़ सकती है क्योंकि यह कमज़ोर रोग- प्रतिरोधक क्षमता का लक्षण हो सकता है।
  • चोट को ठीक होने में समय लगना- सभी लोगों को चोट को लगती ही रहती है, जो कुछ समय के बाद स्वयं ही ठीक हो जाती है।
    लेकिन, यदि किसी शख्स की चोट लंबे समय तक ठीक न हो तो उसे इसकी सूचना अपने डॉक्टर को देनी चाहिए क्योंकि ऐसा कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का संकेत हो सकता है।
  • संक्रमण होना- कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का अन्य लक्षण संक्रमण होना है।
    ऐसी स्थिति में संक्रमित लोगों को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए ताकि उन्हें संक्रमण से छुटकारा मिल सके।
  • कमज़ोरी महसूस होना- लॉ इम्युनिटी पावर का अन्य लक्षण कमज़ोरी महसूस होना है।
    हालांकि,लोग कमज़ोरी महसूस को सामान्य समस्या समझते हैं, लेकिन उनका ऐसा सोचना उन्हें बीमारी बना सकता है।
वर्तमान में दुनिया की लड़ाई कोविड-19 जैसे अदृश्य दुश्मन से हो रही है. महामारी से लड़ने का सबसे बेहतरीन तरीका पर्याप्त सावधानी, पौष्टिक खाना, कसरत, इम्युनिटी विकसित करना और सरकारी नियमों का पालन करना है। ये आसान इसलिए हैं क्योंकि खराब जीवन शैली लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है. खराब जीवन शैली के कुछ कारणों में डिहाइड्रेशन, कुपोषण, सूजन, थकान जैसी बीमारी होती है।
आम तौर पर कुपोषण के पीछे पर्याप्त खाने की कमी को कारण माना जाता है. लेकिन ये उस वक्त होता है जब आप जीवित फूड के मुकाबले ‘मृत फूड’ या रिफाइंड फूड का सेवन करते हैं. इसके अलावा वर्तमान परिस्थिति में चिंता और तनाव बढ़ने से शरीर के प्रतिरोधक क्षमता के प्रभावित होने का खतरा है. चिंता और तनाव के लक्षणों को कम करने का आसान तरीका इम्युन सिस्टम का मजबूत होना है. इम्युन को मजबूत करना बहुत ज्यादा पेचीदा मामला या ज्ञान नहीं है. आपको सिर्फ अपनी जीवन शैली में मामूली और प्रभावी तब्दीली लाने की जरूरत है।
अच्छी इम्युनिटी की बुनियाद क्या है?
अच्छी इम्युनिटी के बुनियादी तत्व आठ घंटे सोना, 8-10 ग्लास रोजाना पानी पीना, संतुलित आहार और रोजाना कसरत हैं. इन बुनियादी तत्वों में किसी एक की कमी से शरीर और दिमाग पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है. इसके अलावा पौष्टिक सप्लीमेंट और फूड फोर्टिफिकेशन इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार साबित होता है. फूड फोर्टिफिकेशन का मतलब खाद्य पदार्थों में एक या अधिक सूक्ष्म पोषक तत्त्वों की जानबूझकर की जाने वाली वृद्धि है. सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी का शिकार पूरी दुनिया में दो बिलियन से ज्यादा लोग हैं. विटामिन ए, आयोडीन और आयरन की कमी इसका सबसे अच्छा उदाहरण है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि रोजाना कसरत न सिर्फ आपको फिट रखता है बल्कि इसका असर दिमाग, त्वचा पर भी बहुत ज्यादा पड़ता है. हालांकि हफ्ते में सातों दिन कसरत करने की जरूरत नहीं है बल्कि पांच दिन का कसरत पर्याप्त है. मांसपेशियों में ऐंठन से छुटकारा पाने के लिए समय लगता है.
इसके अलावा समय-समय पर हेल्थ चेकअप और टेस्ट कराते रहना चाहिए. शरीर के अंदर होनेवाले बदलाव की सही समझ समय रहते पैदा की जा सकती है. साथ ही इम्युन चेकअप इम्युन सिस्टम के रिकॉर्ड रखने में मददगार साबित होता है. इम्युन सिस्टम के मजबूत होने से संक्रमण का खतरा कम होता है. इस तरह आप कई तरह की आनेवाली मुसीबतों को को रोक सकते हैं. एक बात याद रखी जानी चाहिए कि जितनी ज्यादा इम्युनिटी कमजोर होगी, आपके संक्रमित होने का खतरा उतना ही ज्यादा रहेगा।

रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कैसे बढ़ाए ?

हालांकि, कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता लोगों को बीमारी बनाने के साथ-साथ उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
इसके बावजूद, राहत की बात यह है कि किसी भी अन्य समस्या की तरह ला इम्युनिटी पावर को भी बढ़ाया जा सकता है, और इसके जोखिमों से रक्षा की जा सकती है।
इसी कारण, यदि कोई व्यक्ति इन 5 बातों का पालन करे, तो वह रोग -प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा या सुधार सकता है-
  • पौष्टिक भोजन करना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता का मुख्य कारण अनहेल्थी फूड खाना है।
    इस प्रकार, इसे बढ़ाने के लिए लोगों को पौष्टिक भोजन करना चाहिए जो विटामिन, कैल्शियम, आयरन इत्यादि तत्वों से भरपूर हो।
  • हर रोज़ एक्सराइज़ करना- चूंकि,लॉ इम्युनिटी पावर शारीरिक कमज़ोरी से है, इसलिए दूर करने में एक्सराइज़ करना लाभदायक साबित हो सकता है।
    इसी कारण, यदि कोई व्यक्ति हर रोज़ एक्सराइज़ करता है, तो वह रोग-प्रतिरोधक क्षमता को सुधार सकता है।
  • भरपूर नींद लेना- हेल्थ संबंधी कुछ समस्याएं भरपूर नींद न लेना का नतीजा होती हैं।
    इनमें कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी शामिल है, जो अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
    इसी कारण, इसे बढ़ाने के लिए व्यक्ति को भरपूर नींद (6-8 घंटों) लेना आवश्यक बन जाता है।
  • नशीले पदार्थों का सेवन न करना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि लॉ इम्युनिटी पावर नशीले पदार्थों का सेवन करने से भी होती है।
    इसी कारण, लोगों को इनका सेवन नहीं करना चाहिए ताकि उनकी सेहत खराब न हो और वे सेहतमंद रह सकें।
  • संतुलित वजन बनाए रखना- चूंकि, वजन का अधिक होना कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता समेत काफी सारी बीमारियों का कारण बन सकता है।
    अत: लोगों को अपने वजन को संतुलित वजन बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए ताकि उन्हें कोई बीमारी न हो।
  • आभार सहित https://tehkiqat.com/

Dr. Jaswinder Sadioura, Nirogshala Ayurveda Barnala. Contact: 94171 25093

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