चंडीगढ़, 17 सितम्बर: कृषि विधेयकों को लेकर संसद से पंजाब के गांव तक मचे हंगामे में घिरे शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्‍करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने वीरवार शाम केंद्रीय कैबिनेट से अपना इस्‍तीफा दे दिया। पार्टी के प्रधान सुखबीर सिह बादल ने लोकसभा में कृषि विधेयकों का विरोध किया और ऐलान किया कि इन विधेयकों के विरोध में हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय कैबिनेट से इस्‍तीफा देंगी। इसके बाद हरसिमरत ने अपना इस्‍तीफा दे दिया। इस्‍तीफा देने के बाद उन्‍होंने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। उधर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने गुरूवार को हरसिमरत कौर बादल की तरफ केंद्रीय कैबिनेट में से दिए इस्तीफे को अकाली दल की तरफ से एक के बाद एक रचे जा रहे ड्रामों की एक और नौटंकी बताया। उन्होंने कहा कि कृषि बिलों पर केंद्र सरकार की तरफ से अकालियों के मुँह पर तमाचा मारने के बावजूद अकाली दल ने अभी तक सत्ताधारी गठजोड़ से नाता नहीं तोड़ा।अकाली दल की तरफ से भाजपा के नेतृत्व वाली एन.डी.ए. की केंद्र सरकार का हिस्सा बने रहने के फ़ैसले पर सवाल करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि हरसिमरत का इस्तीफ़ा पंजाब के किसानों को मूर्ख बनाने के ढकोसले से अधिक और कुछ नहीं। उन्होंने कहा, ‘परन्तु वह (अकाली दल) किसान जत्थेबंदियों को गुमराह करने में सफल नहीं होंगे।उन्होंने इस कार्यवाही को अपर्याप्त और बहुत देर से उठाया कदम बताया।मुख्यमंत्री ने कहा कि हरसिमरत का केंद्रीय कैबिनेट में से इस्तीफ़ा बहुत देरी से लिया फ़ैसला है जिससे पंजाब के किसानों की किसी किस्म की मदद नहीं होनी। उन्होंने कहा कि अगर अकाली दल ने इससे पहले स्टैंड लिया होता और इन आर्डीनैंसों के विरुद्ध राज्य सरकार का समर्थन किया होता तो शायद यह बिल पास होने के हालात पैदा न होते और केंद्र सरकार को यह आर्डीनैंस लाने और किसान विरोधी बिलों को संसद में रखने से पहले 10 बार सोचना पड़ता।मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी भी अकाली दल का केंद्रीय कैबिनेट में से अपनी अकेली मंत्री का इस्तीफ़ा दिलाने के फ़ैसला का किसानों के साथ कोई सरोकार नहीं बल्कि अपनी राजनैतिक भविष्य बचाने और बादलों के छिन चुके राजसी कॅरियर को बचाने की कवायद है जिनकी साख पंजाब के लोगों की नजऱों में पूरी तरह गिर चुकी है।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि इन घातक कृषि आर्डीनैंसों के खि़लाफ़ मैदान में उतरे किसानों का रोष और राज्य की किसान जत्थेबंदियों का दबाव ही था जिन्होंने बादलें को अपने पहले स्टैंड से पलटने के लिए मजबूर कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘क्या सुखबीर और हरसिमरत और उनकी जुंडली ने इस बात की तरफ ध्यान ही नहीं दिया कि यह कानून पंजाब की कृषि और अर्थव्यवस्था तक किस हद तक नुक्सान पहुँचा देंगे। सत्ता की लालसा में वह इतने अंधे हो गए कि उन्होंने इन आर्डीनैंसों के खतरोंं से जानबुझ कर आँखें बंद कर ली।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने व्यंग्य करते हुये कहा कि अब इनकी सुनियोजित खेल पूरी तरह जग ज़ाहिर हो चुकी है और पंजाब में अपना वोट बैंक बचाने के लिए कृषि बिलों के विरुद्ध सार्वजनिक स्टैंड लिये बिना अकालियों के पास और कोई चारा नहीं था बचा। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों ने अकालियों को पहले भी नकार किया और फिर से उनको नकार देंगे।

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