चंडीगढ़, 8 अक्तूबर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने गुरूवार को अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल द्वारा ‘फिक्स्ड मैच’ के लगाए दोषों की आलोचना करते हुए इनको बेतुका करार दिया। इसके साथ ही उन्होंने किसानों को बर्बाद करने के लिए भाजपा की बोली बोलने के कारण अकालियों की कड़ी आलोचना भी की।मुख्यमंत्री ने पूछा, ‘‘मैं किसके साथ फिक्स्ड मैच खेल रहा हूँ?’’ उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के साथ खेती कानूनों के मामले में फिक्सड मैच खेलने के बाद सुखबीर अब इस कदर भ्रम का शिकार हो गया है कि वह यह भी भूल चुका है कि फिक्सड मैच अकेले कभी नहीं खेला जा सकता। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि अगर कोई फिक्सड मैच खेल रहा है तो वह अकाली दल है। उन्होंने कहा कि हाल ही में अकालियों की तरफ से भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल) द्वारा खेती कानूनों के खि़लाफ़ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापिस लेने के फ़ैसले का बचाव करने की घटना इस बात का ताज़ा उदाहरण है कि अकाली दल लगातार भाजपा के इशारों पर नाच रहा है और एन.डी.ए. छोडऩे के बाद भी केंद्र सरकार के हित के लिए काम कर रहा है। मुख्यमंत्री ने सुखबीर की उस टिप्पणी की भी आलोचना की जिसमें कहा था कि अकाली अपनी सरकार को कुछ भी करवाने के लिए मजबूर कर देंगे। इस तरह अकालियों ने खुद ही मान लिया कि वह केंद्र में किसान विरोधी कानून न लाने के लिए केंद्र सरकार को मनाने में बुरी तरह फेल हुए। उन्होंने कहा कि बादलों ने काले खेती कानूनों के मामले में अपने बेतुके बयानों और झूठे दावों के साथ अपना और अपनी पार्टी को हँसी का पात्र बनाया है। उन्होंने कहा कि अकाली दल के पुराने सहयोगी भाजपा ने भी सार्वजनिक तौर पर ऐलान किया है कि अकालियों ने पहले दिन से ही इन कानूनों की पूर्ण हिमायत की थी। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि बादलों के झूठ और दोहरे मापदण्डों का न केवल पंजाब और इसके किसानों के आगे भंडाफोड़ हुआ है बल्कि पूरे देश को इनकी दोगली नीति का भी पता लग गया है। उन्होंने कहा कि सुखबीर ऐसी शर्मनाक टिप्पणियों के साथ अकालियों की बदनामी पर पर्दा डालना चाहता है। शिरोमणि अकाली दल के प्रधान की तरफ से टिप्पणी कि मुख्यमंत्री ने खेती कानूनों को प्रभावहीन बनाने के लिए बनाने प्रांतीय कानून के लिए विशेष सत्र बुलाने के लिए उसके सुझाव को रद्द कर दिया है, पर कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि जब वह ख़ुद ही स्पष्ट तौर पर यह घोषित कर चुके हैं कि वह रास्ता तलाश रहे हैं तो सुझाव को स्वीकार करने या रद्द करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को सुझाव देने वाला सुखबीर कौन होता जिसने सर्वदलीय बैठक के दौरान खेती ऑर्डीनैसों को रद्द करने के लिए हमारा साथ देने से इन्कार कर दिया था और इन ऑर्डीनैंसों के विरुद्ध हमारे द्वारा प्रस्ताव लाने के समय अपने विधायकों को ग़ैर-हाजि़र रहने के लिए कहा था? मुख्यमंत्री ने सुखबीर बादल की तरफ केंद्र के खेती कानूनों के विरुद्ध प्रांतीय कानून लाने के लिए राज्य सरकार की तरफ से जानबूझ कर देरी किये जाने के लगाऐ दोषों का मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के नाते, जो हमेशा ही किसानों के हकों के लिए उचित रहा है, वह वही कर रहे हैं जो किसान भाईचारे के हित में बेहतर होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के लोग जानते हैं कि उन्होंने किस पर भरोसा करना है और किस पर नहीं। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यह उनकी जि़म्मेदारी है कि जल्दबाज़ी में ऐसा कोई भी कदम न उठाया जाये जो उल्टा किसानों के खि़लाफ़ हो जाए बल्कि ऐसे ठोस हल ढूँढे जाएंगे जो इन केंद्र के घातक कानूनों का मुकाबला करने के लिए कानूनी नज़रिए की कसौटी पर खरे उतरते हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनको यह आशा नहीं कि सुखबीर इसको समझ या मुल्यांकन कर सकता है क्योंकि बादल कभी भी पंजाब के लोगों के किसी वर्ग के हितों में कोई भले का काम करने का विश्वास नहीं रखते। उन्होंने कहा कि अकालियों ने 10 सालों के शासनकाल के दौरान भाजपा के साथ मिलकर राज्य के किसानों को बर्बाद कर दिया और अब भी अपने राजनैतिक आकाओं को खुश करने के लिए खेती सैक्टर को बर्बाद करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ते। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने चुटकी लेते हुए कहा कि जो व्यक्ति कभी अपने राज्य के लोगों का वफ़ादार न रहा हो और अब वही व्यक्ति (सुखबीर बादल) वफ़ादारी की बात करे तो उसे मज़ाक से अधिक और क्या कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि बादलों के दोगलेपन का लोगों के सामने कई बार पर्दाफाश हो चुका है जिस कारण लोग उनके खोखले दावों से अच्छी तरह परिचित हैं।


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