एस ए एस नगर, 1 नवंबर: 

राज्य में माल गाड़ीयों की यातायात पर पाबंदी लगाकर इंडस्ट्री को बुरी तरह चोट पहुँचाने के लिए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर बरसते हुए पंजाब लार्ज इंडस्ट्रियल डिवैल्पमैंट बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि रेल सेवाएं आतंकवाद के चरम के समय भी बंद नहीं की गई थीं। माल गाड़ीयों के निलंबन ने उद्योग के ज़ख्मों पर नमक छिडक़ने का काम किया है जो पहले ही कोविड-19 से उभरने के लिए जूझ रहे हैं। यहाँ जारी एक बयान में दीवान ने कहा कि केंद्र की तरफ से वायदा किये गए 20 हज़ार करोड़ के आर्थिक पैकेज को अभी तक सही अर्थों में लागू नहीं किया और कहा कि केंद्र सरकार का यह फ़ैसला उद्योगों की कमर तोडऩे के समान है। दीवान ने कहा कि रेल गाड़ीयों के न चलने से आयात और निर्यात दोनों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है क्योंकि उद्योग कच्चे माल की अनुपस्थिति में उत्पादन करने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा कि उद्योगों को भारी नुक्सान का सामना करना पड़ रहा है जिससे सारी आर्थिकता पर बुरा प्रभाव पड़ेगा, इसलिए केंद्र सरकार को जल्द से जल्द अपने फ़ैसले की समीक्षा करनी चाहिए।हौजऱी उद्योग की मिसाल देते हुए दीवान ने कहा कि सर्दियों की शुरूआत से ही हौजऱी की बिक्री पंजाब से देश के अलग-अलग हिस्सों और इससे बाहर की जाएगी; परन्तु रेल यातायात के बंद होने के कारण इसमें रुकावट पैदा हो गई है। अन्य उद्योगों के सामने भी यही मुश्किलें पेश हैं।मोहाली इंडस्ट्रीलिस्ट एसोसीएशन के प्रधान योगेश सागर जिनका शीट मेटल कम्पोनेंट्स मैनुफ़ेक्चरिंग का काम है, ने कहा कि यह वास्तव में उद्योगों के लिए बहुत कठिन समय है; लेबर की कमी, कोविड का प्रभाव, वित्तीय मुश्किलें और सबसे ऊपर माल-गाड़ीयों की यातायात पर रोक, जिस कारण बहुत मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। निर्यातकों को डर है कि ऑर्डर समय पर न भेजने के कारण उनको ऑर्डर रद्द होने, वस्तुओं की डिलिवरी न होने के कारण जुर्माने और विश्वसनीयता गंवाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि घरेलू ऑर्डरों को पूरा करना भी मुश्किल प्रतीत होता है क्योंकि रेल की बजाय सडक़ के द्वारा यातायात के साथ खर्चे काफ़ी बढ़ जाएंगे। इस सीजन की दिवाली ‘काली-दीवाली’ होने की आशंका है। दीवाली बोनस की उम्मीद कर रहे कोविड की मार झेलने वाले मज़दूरों को अब नौकरियाँ जाने का डर है और निर्माता हालात सामान्य होने का इन्तज़ार कर रहे हैं।इसी तरह सिलाई मशीन स्पेयर पार्टस के निर्माता बहादुर उद्योग के बहादर सिंह और नेशनल स्टील इंडस्ट्रीज के जसविन्दर सिंह सैनी ने कोयले की कमी और अम्बाला, हरियाणा में माल के रैक फंसे होने पर दुख जताया। छत्तीसगढ़ से लोहे का ऑर्डर न आने पर ए.वी. फैब्रीकेशंस के ए.आर. चौधरी ने कहा कि अब हम अपनी उपलब्ध सामग्री के साथ काम चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें स्थानीय बाज़ारों से अधिक कीमत पर कच्चा माल खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा।



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